उमरिया कलेक्ट्रेट परिसर में जनसुनवाई के दौरान एक ऐसा मामला उजागर हुआ, जिसने सरकारी तंत्र की पोल खोल दी। यहां एक पीड़ित व्यक्ति अपने पूरे शरीर और कपड़ों में सैकड़ों आवेदन और पावतियों को चिपकाकर कलेक्टर के सामने न्याय की गुहार लगाने पहुंचा। यह दृश्य देखकर हर कोई स्तब्ध रह गया और यह सवाल उठने लगा कि यह किस प्रकार का न्याय है?

भूमाफिया के कब्जे में पुस्तैनी भूमि: मामला उमरिया जिले के चंदिया तहसील के नगरीय क्षेत्र का है, जहां बृजेन्द्र नाथ शुक्ला अपनी पुस्तैनी भूमि पर भूमाफियाओं के कब्जे को लेकर 48वीं बार कलेक्टर की जनसुनवाई में पहुंचे। बृजेन्द्र का आरोप है कि कटनी के कुछ भूमाफियाओं ने उनकी भूमि पर जबरन कब्जा कर लिया है।

47 बार की गई अनसुनी: बृजेन्द्र बताते हैं कि उन्होंने तहसीलदार से लेकर कलेक्टर और कमिश्नर कार्यालय तक कई बार शिकायतें कीं, लेकिन अब तक उन्हें न्याय नहीं मिला है। उनकी भूमि चंदिया तहसील के समीप ही हाइवे से गुजरती है, और बचे हुए हिस्से पर भूमाफिया का कब्जा है।

सोशल मीडिया पर उठे सवाल: जनसुनवाई में बृजेन्द्र के दुखद स्थिति का वीडियो भी कई लोगों ने बनाया और सोशल मीडिया पर साझा किया। इससे पूरे सरकारी सिस्टम पर सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर क्यों पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पा रहा है?

यह मामला सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गहरा प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। आवेदन और पावतियों के साथ बार-बार अधिकारियों की चौखट पर दस्तक देने के बावजूद बृजेन्द्र को न्याय न मिलना सिस्टम की विफलता दर्शाता है।