उमरिया में महाराणा प्रताप जयंती के अवसर पर आयोजित भव्य समारोह में शेर सिंह राणा की उपस्थिति ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। करणी सेना के तत्वावधान में इस आयोजन में समाज के विभिन्न वर्गों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम में महाराणा प्रताप के शौर्य, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति को युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बताया गया।

कार्यक्रम में शेर सिंह राणा का स्वागत विशेष धूमधाम से किया गया। उन्होंने अपने संबोधन में महाराणा प्रताप के जीवन और संघर्ष की चर्चा करते हुए युवाओं से राष्ट्रहित और समाज के प्रति समर्पित रहने का आह्वान किया। शेर सिंह राणा, जो स्वयं को महाराणा प्रताप की परंपरा का अनुयायी मानते हैं, ने महाराणा की वीरता को अनुकरणीय बताया।

वर्ष 2006 में शेर सिंह राणा राष्ट्रीय चर्चा में तब आए थे, जब उन्होंने अफगानिस्तान के काबुल से सम्राट पृथ्वीराज चौहान की कथित अस्थियां भारत लाने का दावा किया था। यह घटना राजपूत समाज के एक वर्ग में उनकी विशेष पहचान का कारण बनी।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और श्रद्धांजलि

समारोह के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं और महाराणा प्रताप के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। पूरे आयोजन में उत्साह का माहौल था।

कार्यक्रम के समापन पर समाज के लोगों ने महाराणा प्रताप के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया। सुरक्षा के विशेष इंतजाम भी किए गए थे।

इस भव्य आयोजन ने उमरिया में महाराणा प्रताप की जयंती को एक यादगार अवसर बना दिया।