जब पूरे देश में डीजल-पेट्रोल के बढ़ते दाम चर्चा में हैं, वहीं उमरिया जिले के आकाशकोट क्षेत्र के माली गाँव के निवासी पेयजल के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इस आदिवासी बाहुल्य गाँव में पानी की समस्या इतनी गंभीर है कि लोगों को 2-3 किलोमीटर की दूरी तय कर घाट उतरना पड़ता है, तब जाकर उन्हें पीने का पानी मिलता है।

गाँव की निवासी इन्द्राणां बाई ने बताया, "हमारे गाँव में केवल एक ही कुआँ है। घाट चढ़कर पानी भरना पड़ता है, जो उम्रदराज लोगों के लिए बेहद कठिन है। जिला प्रशासन ने पानी देने का वादा किया था, लेकिन अब तक कोई सुविधा नहीं मिली।"

गाँव के सुंदर सिंह ने कहा, "हमारे गाँव में पानी की जटिल समस्या है। पीने के लिए 2-3 किलोमीटर घाट चढ़कर पानी लाना पड़ता है। हम जिला प्रशासन से अनुरोध करते हैं कि हमें पानी उपलब्ध करवाया जाए। गाँव में नलजल योजना भी बंद पड़ी है।"

इमरती बाई ने बताया, "पीने के पानी के साथ-साथ नहाने के लिए भी पानी की समस्या है। गाँव से 2 किलोमीटर दूर तालाब तक जाना पड़ता है, फिर कुएँ से पानी लाना होता है। छोटे-छोटे बच्चे भी दिनभर पानी भरने में लगे रहते हैं।"

गनेसिया बाई ने कहा, "पानी के लिए हमें अकाल जैसी स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। स्कूल में भी पानी के लिए एक-दो घंटे लाइन में लगना पड़ता है।"

इस समस्या पर जब जिला कलेक्टर राखी सहाय से बातचीत की गई, तो उन्होंने कहा, "माली गाँव में पेयजल संकट की जानकारी मिलते ही मैंने एसडीएम बांधवगढ़ और राजस्व अमले को स्थिति की जांच करने के लिए कहा है। यदि समस्या है, तो तत्काल टैंकर के माध्यम से पानी उपलब्ध करवाया जाएगा।"

गाँव के निवासियों की यह समस्या प्रशासन के लिए एक चुनौती है, और जल्द से जल्द उचित कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि ग्रामीणों को राहत मिल सके।