8 नवंबर की लक्ष्मी पूजा के बाद हर घर में मिट्टी के दीये, फूल-माला, पत्ते, अक्षत, नारियल, मौली और सजावट का सामान बचता है। मान्यता है कि पूजा की चीजें कूड़े में नहीं फेंकी जातीं, इसलिए बहुत से लोग इन्हें नदी या तालाब में बहा देते हैं।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यानी CPCB के 2020 के मूर्ति विसर्जन दिशानिर्देश कहते हैं कि पूजा की सामग्री पानी में न जाए, बल्कि अलग करके उसका निपटारा हो।
आज जानेंगे कि-
- पूजा का विसर्जन असल में क्या होता है?
- बचे हुए दीये, फूल और सामग्री का क्या करें?
- CPCB के दिशानिर्देश पूजा सामग्री के बारे में क्या कहते हैं?

सवाल- पूजा का विसर्जन क्या होता है?
जवाब- पंचांग गणना के स्रोतों के अनुसार दिवाली पूजा का आखिरी चरण विसर्जन है, जिसमें प्रार्थना के साथ पूजा का औपचारिक समापन किया जाता है। यानी विसर्जन एक प्रार्थना है, इसके लिए सामग्री को नदी में डालना जरूरी नहीं। कई परिवार पूजा स्थान अगले दिन तक वैसा ही रखते हैं।
सवाल- CPCB के दिशानिर्देश पूजा सामग्री पर क्या कहते हैं?
जवाब- CPCB के 12 मई 2020 के संशोधित मूर्ति विसर्जन दिशानिर्देशों में साफ लिखा है कि फूल, पत्ते, वस्त्र और सजावट की सामग्री विसर्जन से पहले हटाई जाए और रंग वाले अलग-अलग डिब्बों में डाली जाए। दोबारा इस्तेमाल लायक कपड़े अनाथालय जैसी जगहों को दिए जाएं, सड़ने वाली चीजों से खाद बने और न सड़ने वाली चीजें लैंडफिल में जाएं। इस्तेमाल किए गए फूल, कपड़े और सजावट का सामान इधर-उधर फेंकना या जलाना मना है। सजावट में सिंगल यूज प्लास्टिक और थर्मोकोल की अनुमति नहीं है।
सवाल- बचे हुए सामान का क्या करें?
जवाब- परंपरा और नागरिक जिम्मेदारी, दोनों के हिसाब से आसान तरीके स्टेप में समझिए…
- 1. साबुत दीये धोकर सुखा लें और अगले साल या रोज की पूजा में दोबारा इस्तेमाल करें।
- 2. टूटे दीये मिट्टी के हैं, इन्हें गमले के तले में या बगीचे की मिट्टी में मिला दें।
- 3. फूल-माला और पत्तों से मौली और प्लास्टिक अलग करें, फिर इन्हें गमले या कम्पोस्ट में डालें।
- 4. अक्षत और अनाज पक्षियों को डाल दें, मिठाई और फल प्रसाद के रूप में बांट दें।
- 5. चौकी का कपड़ा धोकर दोबारा इस्तेमाल करें।
- 6. पन्नी, थर्मोकोल और प्लास्टिक की सजावट सूखे कचरे में दें, जो दोबारा काम आए उसे संभालकर रखें।

सवाल- फूलों से खाद कैसे बनाएं?
जवाब- फूल और पत्ते रसोई के गीले कचरे की तरह जल्दी सड़ते हैं। इन्हें छोटे टुकड़ों में करके गमले की मिट्टी में दबा दें या घर के कम्पोस्ट बिन में डालें। कुछ हफ्तों में यह खाद बन जाती है। नगर निगम की गाड़ी में फूल गीले कचरे में दें।
सवाल- दीयों का बचा तेल और बत्ती कहां डालें?
जवाब- बचा तेल नाली या बर्तन धोने के सिंक में न डालें, इससे नाली जाम होती है। दीया ठंडा होने पर बत्ती निकालकर कागज में लपेटें और सूखे कचरे में दें।

सवाल- पटाखों के कचरे का क्या करें?
जवाब- जले हुए पटाखों पर पहले पानी डालकर पूरी तरह ठंडा करें। फिर उन्हें अलग थैले में भरकर सूखे कचरे के साथ दें। इन्हें पूजा के फूलों या गीले कचरे में न मिलाएं।

सवाल- टूटी मूर्ति या पुरानी तस्वीर का क्या करें?
जवाब- CPCB के दिशानिर्देश जहां संभव हो वहां कृत्रिम या अस्थायी कुंड में मूर्ति विसर्जन की बात करते हैं, ताकि नदी-तालाब साफ रहें। मिट्टी की छोटी मूर्ति घर पर बाल्टी के पानी में घोलकर वह मिट्टी गमले में डाली जा सकती है।
पूजा सामग्री के सम्मान के तरीके हर परिवार में अलग होते हैं। अपनी परंपरा निभाते हुए नदी, तालाब और गलियों को साफ रखना भी उतना ही जरूरी है।
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1. CPCB के मूर्ति विसर्जन दिशानिर्देश किस साल के हैं?
सही जवाब- 2020, 12 मई को जारी।
2. दिशानिर्देशों के अनुसार इस्तेमाल किए फूलों का क्या करना चाहिए?
सही जवाब- अलग करके खाद बनानी चाहिए।
3. दिवाली पूजा का आखिरी चरण क्या है?
सही जवाब- विसर्जन, यानी प्रार्थना के साथ समापन।
4. दीये का बचा तेल कहां नहीं डालना चाहिए?
सही जवाब- नाली या सिंक में।
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WhatsApp पर शेयर करेंयह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और CPCB के दिशानिर्देशों पर आधारित है। अपने शहर के नगर निगम की कचरा व्यवस्था की जानकारी भी जरूर लें।
कुछ कॉमन सवाल जवाब
पूजा के फूल कहां डालें?
नदी में नहीं, गमले, कम्पोस्ट या नगर निगम के गीले कचरे में।
पुराने दीयों का क्या करें?
साबुत हों तो धोकर दोबारा इस्तेमाल करें, टूटे हों तो मिट्टी में मिला दें।
क्या पूजा सामग्री जलाना ठीक है?
नहीं, CPCB के दिशानिर्देश इस्तेमाल किए फूल, कपड़े और सजावट जलाने के खिलाफ हैं।
पूजा स्थान कब हटाएं?
यह परिवार की परंपरा पर है।
स्रोत, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, Revised Guidelines for Idol Immersion, 12 मई 2020, पंचांग गणना के स्रोत (Drik Panchang, दिवाली पूजा विधि पेज)। मुख्य फोटो साभार Wikimedia Commons / Kritzolina, CC BY-SA 4.0।
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