पूर्णिमा का चांद, प्रतीकात्मक फोटो फोटो साभार Wikimedia Commons / Annatsach, CC BY 4.0
आश्विन मास की पूर्णिमा यानी शरद पूर्णिमा आज रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को है। पंचांग गणना के मुताबिक पूर्णिमा तिथि आज सुबह करीब 11.56 बजे शुरू हुई है और सोमवार, 26 अक्टूबर की सुबह करीब 9.41 बजे खत्म होगी।
भोपाल में आज शाम करीब 5.01 बजे चंद्रोदय होगा, यानी सूर्यास्त से पहले ही चांद पूर्व दिशा में दिखने लगेगा। रात भर पूर्णिमा तिथि रहने से चांदनी में खीर रखने, चंद्र दर्शन और कोजागरी लक्ष्मी पूजा का दिन आज ही माना गया है।
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA की मून फेज टेबल के अनुसार खगोलीय पूर्ण चंद्रमा 26 अक्टूबर को 04.12 UT पर है, जो भारतीय समय से सुबह करीब 9.42 बजे बैठता है। यह पंचांग में दिए पूर्णिमा समाप्ति के समय से मेल खाता है।
दो पंचांग गणनाओं में एक ही तारीख
StateNews ने 2 अलग पंचांग गणनाओं से तिथि का मिलान किया। दोनों में शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर को ही दी गई है और तिथि शुरू होने के समय में केवल 1 मिनट का अंतर है।
| विवरण | पहली पंचांग गणना | दूसरी पंचांग गणना |
|---|---|---|
| शरद पूर्णिमा | 25 अक्टूबर 2026, रविवार | 25 अक्टूबर 2026, रविवार |
| पूर्णिमा तिथि शुरू | 25 अक्टूबर, सुबह 11.55 बजे | 25 अक्टूबर, सुबह 11.56 बजे |
| पूर्णिमा तिथि समाप्त | 26 अक्टूबर, सुबह 9.41 बजे | 26 अक्टूबर, सुबह करीब 9.42 बजे |
| चंद्रोदय | शाम 5.00 बजे (नई दिल्ली) | शाम करीब 5.01 बजे (भोपाल) |
कुछ कैलेंडर उदया तिथि के आधार पर 26 अक्टूबर भी लिख रहे हैं, लेकिन 26 अक्टूबर की शाम को पूर्णिमा नहीं रहेगी। शरद पूर्णिमा का व्रत, चंद्र पूजा और रात्रि जागरण उसी दिन होता है जिस रात पूर्णिमा हो, इसलिए पंचांग गणना 25 अक्टूबर को सही दिन बताती है। 26 अक्टूबर की सुबह स्नान और दान के लिए पूर्णिमा तिथि रहेगी।
ग्राफिक से समझिए, भोपाल के लिए आज का पूरा समय…

16 कलाओं वाला चांद और खीर की परंपरा
मान्यता है कि साल भर में केवल शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से पूर्ण होता है। लोक मान्यता यह भी है कि इस रात चांदनी में अमृत जैसा गुण होता है, इसलिए घरों और मंदिरों में दूध, चावल और शक्कर से बनी खीर खुले आसमान के नीचे रखी जाती है।
परंपरा में खीर को पतले सूती कपड़े या जाली से ढककर छत या आंगन में रखा जाता है और अगली सुबह प्रसाद के रूप में बांटा जाता है।
परंपरा के मुताबिक आज की रात…
- खीर, शाम को बनाकर चांदनी में ढककर रखी जाती है
- चंद्र दर्शन, चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है
- व्रत, कई परिवार दिन भर व्रत रखकर रात में पूजा करते हैं
- जागरण, कोजागरी पूजा में रात भर जागने की मान्यता है
- प्रसाद, अगली सुबह खीर प्रसाद के रूप में ली जाती है
कोजागरी लक्ष्मी पूजा, निशीथ काल में आराधना
शरद पूर्णिमा को कोजागरी या कोजागर पूर्णिमा भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस रात देवी लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और पूछती हैं, को जागर्ति, यानी कौन जाग रहा है। जो भक्त जागकर उनकी पूजा करते हैं, उन पर कृपा होने की मान्यता है।
कोजागरी पूजा निशीथ काल यानी आधी रात के आसपास के मुहूर्त में की जाती है। भोपाल के सूर्यास्त और अगले दिन के सूर्योदय के आधार पर पंचांग गणना से निशीथ काल रात करीब 11.39 बजे से 12.30 बजे तक बैठता है। यह पूजा खास तौर पर बंगाल, ओडिशा, असम और मिथिला क्षेत्र में बड़े पैमाने पर होती है, जबकि मध्य प्रदेश में भी कई परिवार इस रात लक्ष्मी पूजा करते हैं।
रास पूर्णिमा और वाल्मीकि जयंती भी आज
ब्रज परंपरा में शरद पूर्णिमा को रास पूर्णिमा कहा जाता है। मान्यता है कि इसी रात भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों के साथ महारास किया था, इसलिए कृष्ण मंदिरों में इस रात विशेष शृंगार और रास उत्सव होते हैं।
आश्विन पूर्णिमा पर महर्षि वाल्मीकि की जयंती भी मनाई जाती है। इस पूर्णिमा को कौमुदी पूर्णिमा नाम से भी जाना जाता है।
भोपाल में आज रात आसमान कैसा रहेगा
पंचांग गणना के मुताबिक भोपाल में आज सूर्यास्त शाम करीब 5.47 बजे होगा, जबकि चांद इससे करीब 45 मिनट पहले उग जाएगा। शाम ढलते ही पूर्व दिशा में लगभग पूरा गोल चांद दिखेगा और यह रात भर आसमान में रहेगा। 26 अक्टूबर की सुबह करीब 6.18 बजे पश्चिम दिशा में चंद्रास्त होगा। सभी समय भोपाल के लिए हैं, दूसरे शहरों में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।
कुल मिलाकर, शरद पूर्णिमा की खीर, चंद्र पूजा और कोजागरी लक्ष्मी पूजा आज 25 अक्टूबर की रात होगी, जबकि पूर्णिमा का स्नान और दान 26 अक्टूबर की सुबह 9.41 बजे से पहले किया जा सकता है। यहां दी गई धार्मिक बातें मान्यताओं पर आधारित हैं, StateNews इनकी पुष्टि नहीं करता।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
शरद पूर्णिमा 2026 कब है?
पंचांग गणना के अनुसार शरद पूर्णिमा रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को है।
शरद पूर्णिमा 2026 पर पूर्णिमा तिथि कब से कब तक है?
पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर सुबह करीब 11.56 बजे शुरू होकर 26 अक्टूबर सुबह करीब 9.41 बजे खत्म होगी।
भोपाल में शरद पूर्णिमा पर चांद कितने बजे निकलेगा?
भोपाल में 25 अक्टूबर को चंद्रोदय शाम करीब 5.01 बजे होगा।
कोजागरी लक्ष्मी पूजा का समय क्या है?
भोपाल के लिए निशीथ काल रात करीब 11.39 बजे से 12.30 बजे तक है, इसी में पूजा की परंपरा है।
शरद पूर्णिमा पर खीर क्यों रखी जाती है?
मान्यता है कि इस रात चंद्रमा 16 कलाओं से पूर्ण होता है और उसकी चांदनी में अमृत जैसा गुण होता है, इसलिए खीर चांदनी में रखकर अगली सुबह प्रसाद के रूप में ली जाती है।
स्रोत पंचांग गणना, पंचांग गणना, NASA
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