विश्व अहिंसा दिवस: आचार्य विमलसागर जी का स्मरण

 

अहिंसा, तप और साधना के प्रतीक आचार्य विमलसागर जी महाराज को नमन; महात्मा गांधी के आदर्शों का किया स्मरण

 

व्यापक विहार से जन-जन तक पहुँचाया जैन धर्म का संदेश, सम्मेद शिखर जी की पावन भूमि पर प्राप्त किया समाधिमरण

 

नेमी नगर जैन कॉलोनी, इंदौर। (संवाददाता मुकेश कुमार जैन)।

 

अहिंसा, सत्य, संयम और आत्मसाधना भारतीय संस्कृति के ऐसे शाश्वत मूल्य हैं, जो मानवता को शांति और सद्भाव का मार्ग दिखाते हैं। विश्व अहिंसा दिवस के अवसर पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के अहिंसात्मक आदर्शों के साथ ही जैन संत आचार्य श्री विमलसागर जी महाराज के तपस्वी एवं प्रेरणादायी जीवन का स्मरण किया गया। भगवान महावीर स्वामी द्वारा प्रतिपादित अहिंसा के सिद्धांतों को महात्मा गांधी ने अपने जीवन और स्वतंत्रता आंदोलन में अपनाकर समाज के सामने अहिंसा की शक्ति का प्रभावी उदाहरण प्रस्तुत किया।

 

आचार्य श्री विमलसागर जी महाराज की जन्मतिथि पर उनके विलक्षण व्यक्तित्व, कठोर तपस्या और धर्मप्रभावना से ओतप्रोत जीवन को भी श्रद्धापूर्वक याद किया गया। उनके जीवन से जुड़ा एक चर्चित कथन है—“सागर में से तो बहुत-सी कटोरियाँ भर जाती हैं, लेकिन विमलसागर एक ऐसे अद्भुत संत थे, जो कटोरी से निकले।” उनकी माता का नाम कठोरी बाई था। यह प्रसंग उनके व्यक्तित्व की विशिष्टता को दर्शाता है।

 

धर्मप्रभावना के लिए किया व्यापक विहार

 

आचार्य श्री विमलसागर जी महाराज ने अपना संपूर्ण जीवन धर्म, तप, त्याग, संयम और आत्मकल्याण के लिए समर्पित कर दिया। वे अपने व्यापक विहार और जनजागरण के लिए विशेष रूप से स्मरण किए जाते हैं। उनके विहार के माध्यम से देश के विभिन्न क्षेत्रों में जैन धर्म, अहिंसा, संयम और आध्यात्मिक चेतना का संदेश पहुँचा। उनका जीवन इस बात का उदाहरण रहा कि सच्चा धर्म केवल उपदेशों में नहीं, बल्कि आचरण, अनुशासन और आत्मसंयम में दिखाई देता है।

 

उनकी साधना और त्यागमय जीवन ने श्रावक समाज को धर्ममार्ग पर चलने, आत्मचिंतन करने तथा जीवन में संयम और सदाचार अपनाने की प्रेरणा दी। उनका व्यक्तित्व आज भी धर्मप्रेमियों के लिए श्रद्धा और प्रेरणा का केंद्र है।

 

सम्मेद शिखर जी में प्राप्त किया समाधिमरण

 

जीवन की अंतिम अवस्था में आचार्य श्री विमलसागर जी महाराज ने जैन समाज के परम पवित्र तीर्थ सम्मेद शिखर जी की भूमि पर समाधिमरण प्राप्त किया। उनका संपूर्ण जीवन धर्मसाधना, आत्मकल्याण और जिनशासन की प्रभावना के प्रति समर्पण का संदेश देता है।

 

विश्व अहिंसा दिवस पर महात्मा गांधी के सत्य एवं अहिंसा के आदर्शों और आचार्य श्री विमलसागर जी महाराज की तप-त्यागमयी साधना का स्मरण करते हुए उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा ली गई।

 

आचार्य श्री विमलसागर जी महाराज की जन्मतिथि पर उनके पावन चरणों में विनम्र श्रद्धांजलि एवं शत-शत नमन।

 

 अहिंसा की जय हो! तप की जय हो! त्याग और संयम की जय हो!