बुंदेलखंड में दिवाली के बाद गोवर्धन पूजा का दिन अलग ही रंग लेकर आता है। ढोलक और नगड़िया की थाप पर हाथ में मोर पंख और लाठी लिए ग्वालों की टोलियां गांव-गांव नाचती हैं। इसे दिवारी नृत्य कहते हैं।

इन्हीं टोलियों के साथ मौनिया चलते हैं, जो पूरे दिन मौन रहते हैं। पंचांग गणना के अनुसार इस साल भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में गोवर्धन पूजा 10 नवंबर को है।

आज जानेंगे कि-

  • दिवारी नृत्य क्या है और इसकी कथा क्या है?
  • मौनिया कौन होते हैं और मौन क्यों रखते हैं?
  • 2026 में यह परंपरा कब और कहां देख सकते हैं?
टीकमगढ़ का कुंडेश्वर धाम, जहां मौनिया नृत्य उत्सव होता है
टीकमगढ़ का कुंडेश्वर धाम, जहां मौनिया नृत्य उत्सव होता है फोटो साभार Wikimedia Commons / Pnkjkushwaha, CC BY 3.0

सवाल- दिवारी नृत्य क्या है?

जवाब- MP टूरिज्म की जानकारी पर आधारित Incredible India पोर्टल के अनुसार यह बुंदेलखंड का लोक नृत्य है, जो हर साल दीपावली पर, अक्टूबर के आखिर या नवंबर के पहले हफ्ते में होता है। मुख्य नर्तक हाथ में मोर पंखों का गुच्छा रखता है और बाकी नर्तक मोर पंख अपनी आधी पैंट में खोंसते हैं। ढोलक और नगड़िया इसके मुख्य वाद्य हैं। नर्तक लंबी लाठियों से मार्शल आर्ट जैसे दांव दिखाते हैं।

सवाल- इस नृत्य के पीछे कथा क्या है?

जवाब- पर्यटन मंत्रालय के उत्सव पोर्टल के अनुसार जब भगवान कृष्ण ने गोकुल के लोगों और उनके पशुओं को मूसलाधार बारिश से बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत उंगली पर उठाया, तब ग्वालों ने खुशी में नाचना-गाना किया। माना जाता है कि यहीं से यह नृत्य शुरू हुआ।

दिवारी नृत्य की पहचान
मोर पंख + लाठी
ढोलक और नगड़िया की थाप पर ग्वालों की टोलियां
बुंदेलखंड की लोक नृत्य परंपरा, चंदेरी में राई नृत्य की प्रस्तुति
बुंदेलखंड की लोक नृत्य परंपरा, चंदेरी में राई नृत्य की प्रस्तुति फोटो साभार Wikimedia Commons / Avantikac98, CC BY-SA 4.0

सवाल- मौनिया कौन होते हैं?

जवाब- मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार गोवर्धन पूजा के दिन, जिसे बुंदेलखंड में मौन परमा भी कहा जाता है, ग्वाले के वेश में युवकों की टोलियां मौन व्रत लेती हैं। टोली के मुखिया को बरेदी कहा जाता है। मौनिया दिन भर चुप रहकर, उपवास करते हुए कई किमी पैदल चलते हैं।

सवाल- मौनिया 12 गांव क्यों घूमते हैं?

जवाब- मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार परंपरा है कि हर टोली 12 गांवों में जाकर करीब 12 घंटे नृत्य करती है और आखिर में मंदिर में दर्शन करके व्रत पूरा करती है। कई जगह यह परंपरा लगातार 12 साल निभाने की बात भी कही जाती है।

सवाल- मौन क्यों रखा जाता है?

जवाब- इसकी कई लोककथाएं हैं। एक लोककथा के अनुसार यमुना किनारे गायें खो जाने पर कृष्ण मौन हो गए थे और जब ग्वाल-बालों ने गायें ढूंढकर लौटाईं, तब उन्होंने मौन तोड़ा। इसी याद में मौन परमा पर मौन रखकर नृत्य होता है। कुछ कथाएं इसे राजा बलि और वामन अवतार से जोड़ती हैं।

गोवर्धन पूजा पर गोबर से बनाया गया गोवर्धन
गोवर्धन पूजा पर गोबर से बनाया गया गोवर्धन फोटो साभार Wikimedia Commons / Bijay chaurasia, CC BY-SA 4.0

सवाल- 2026 में यह परंपरा कब और कहां देखें?

जवाब- पंचांग गणना के अनुसार गोवर्धन पूजा भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में 10 नवंबर को है। प्रतिपदा तिथि 9 नवंबर दोपहर 12:31 बजे से 10 नवंबर दोपहर 2:00 बजे तक है। Incredible India पोर्टल पर टीकमगढ़ के कुंडेश्वर धाम में मौनिया नृत्य उत्सव की तारीख 9 नवंबर 2026 दर्ज है। इसलिए जाने से पहले स्थानीय आयोजकों से तारीख पक्की कर लें।

जगहक्या देख सकते हैंस्रोत
कुंडेश्वर धाम, टीकमगढ़मौनिया नृत्य उत्सव, प्रवेश मुफ्तIncredible India, उत्सव पोर्टल
चित्रकूट, सतनादिवाली के दूसरे दिन दिवारी नृत्य, मौन व्रत और दिवारी नृत्य प्रतियोगिताउत्सव पोर्टल
बुंदेलखंड के गांवगोवर्धन पूजा पर मौनिया टोलियांमीडिया रिपोर्ट्स
दिवाली पर सजाई गई गायें
दिवाली पर सजाई गई गायें फोटो साभार Wikimedia Commons / Grace from Seattle, USA, CC BY 2.0

सवाल- टीकमगढ़ कैसे पहुंचें?

जवाब- उत्सव पोर्टल के मुताबिक कुंडेश्वर धाम के लिए नजदीकी रेलवे स्टेशन टीकमगढ़ करीब 10 किमी और नजदीकी एयरपोर्ट खजुराहो करीब 114 किमी दूर है। नृत्य के घेरे से बच्चों को दूर रखें।

दिवारी और मौनिया की परंपरा हर गांव और टोली में अलग होती है।

दिवारी नृत्य देखने की तैयारी

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क्विज, दिवारी नृत्य को कितना जानते हैं?

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1. दिवारी नृत्य में मुख्य नर्तक हाथ में क्या रखता है?

सही जवाब- मोर पंखों का गुच्छा।

2. इस नृत्य के मुख्य वाद्य कौन से हैं?

सही जवाब- ढोलक और नगड़िया।

3. मौनिया टोली के मुखिया को क्या कहते हैं?

सही जवाब- बरेदी।

4. मौनिया परंपरा में टोली कितने गांव घूमती है?

सही जवाब- 12 गांव।

क्या आपके गांव में भी मौनिया टोली निकलती है? अपना अनुभव बताइए

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यह जानकारी लोक मान्यताओं, पर्यटन पोर्टल, मीडिया रिपोर्ट्स और पंचांग गणना पर आधारित है, StateNews इनकी पुष्टि नहीं करता।

कुछ कॉमन सवाल जवाब

दिवारी नृत्य कब होता है?

दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा पर, इस साल भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में 10 नवंबर को।

मौन परमा क्या है?

बुंदेलखंड में गोवर्धन पूजा के दिन का एक नाम।

दिवारी नृत्य किस कथा से जुड़ा है?

कृष्ण के गोवर्धन पर्वत उठाने की कथा से।

मौनिया नृत्य उत्सव कहां होता है?

टीकमगढ़ के कुंडेश्वर धाम में, Incredible India पोर्टल के अनुसार।

स्रोत, Incredible India (Moniya Dance Festival, स्रोत MP टूरिज्म), उत्सव पोर्टल (utsav.gov.in, Moniya Dance Festival और Deepotsav Parv), Wikipedia (Bundeli Utsav), Zee News और नवभारत लाइव की मौनिया पर रिपोर्ट, पंचांग गणना (Drik Panchang)। मुख्य फोटो साभार Wikimedia Commons / Pnkjkushwaha, CC BY 3.0।