6 नवंबर को धनतेरस है। यह दिन सिर्फ खरीदारी का नहीं, 3 अलग पूजाओं का भी है। पंचांग गणना के अनुसार इसी दिन धन्वंतरि त्रयोदशी, धनत्रयोदशी यानी लक्ष्मी-कुबेर पूजा और यम दीपम, तीनों पड़ रहे हैं।

मान्यता के अनुसार धन्वंतरि पूजा से सेहत, कुबेर पूजा से धन और यम दीपदान से परिवार की रक्षा की कामना की जाती है।

इस खबर में जानेंगे कि-

  • धन्वंतरि पूजा कब और कैसे करें?
  • लक्ष्मी-कुबेर पूजा की विधि क्या है?
  • यम का दीया कब, कहां और कैसे जलाते हैं?
पूजा के लिए सजाया गया कलश
पूजा के लिए सजाया गया कलश फोटो साभार Wikimedia Commons / Abhya2022, CC BY-SA 4.0

सवाल- धन्वंतरि कौन हैं और उनकी पूजा धनतेरस पर क्यों होती है?

जवाब- पंचांग गणना के स्रोतों में धन्वंतरि को आयुर्वेद का जनक, देवताओं का वैद्य और विष्णु का अवतार बताया गया है। मान्यता है कि समुद्र मंथन के समय कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन ही धन्वंतरि अमृत का कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसलिए इस दिन अच्छी सेहत के लिए उनकी पूजा होती है।

धन्वंतरि की प्राचीन मूर्ति, सोमनाथपुर, कर्नाटक
धन्वंतरि की प्राचीन मूर्ति, सोमनाथपुर, कर्नाटक फोटो साभार Wikimedia Commons / prashanthns, CC BY-SA 3.0

सवाल- धन्वंतरि पूजा कब और कैसे करें?

जवाब- पंचांग गणना के अनुसार भोपाल में 6 नवंबर को प्रातःकाल मुहूर्त सुबह 6:28 से 8:43 बजे तक है। स्रोतों में 21 चरणों की विधि है, आसान स्टेप में समझिए…

  • 1. आचमन, संकल्प और आत्म-शोधन करें।
  • 2. घी का दीया जलाकर ध्यान करें, मंत्र की शुरुआत है, चतुर्भुजं पीतवस्त्रं सर्वालंकारशोभितम्।
  • 3. आवाहन करें और 5 फूल रखकर आसन दें।
  • 4. पाद्य, अर्घ्य, चंदन, फूल, धूप, दीप, नैवेद्य, पान-सुपारी और दक्षिणा अर्पित करें।
  • 5. बाएं से दाएं प्रदक्षिणा, साष्टांग प्रणाम और क्षमा प्रार्थना करें।

सवाल- लक्ष्मी-कुबेर पूजा कब करें?

जवाब- पंचांग गणना के स्रोतों के अनुसार धनत्रयोदशी पर लक्ष्मी-कुबेर पूजा सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में होती है। भोपाल में 6 नवंबर को पूजा का मुहूर्त शाम 6:10 से 8:08 बजे तक है।

भोपाल में धनतेरस के 3 समय, 6 नवंबर
सुबह 6:28, शाम 5:39, शाम 6:10
धन्वंतरि पूजा, यम दीपदान और लक्ष्मी-कुबेर पूजा की शुरुआत, पंचांग गणना के अनुसार

सवाल- कुबेर पूजा की विधि क्या है?

जवाब- पंचांग गणना के स्रोतों के अनुसार मूर्ति न हो तो तिजोरी या गहनों के बक्से को कुबेर मानकर पूजा कर सकते हैं…

  • 1. तिजोरी पर सिंदूर से स्वस्तिक बनाएं और मौली बांधें।
  • 2. ध्यान करें, मंत्र की शुरुआत है, मनुजबाह्यविमानस्थितं गरुडरत्ननिभं निधिनायकम्।
  • 3. आवाहन करें, आवाहयामि देव त्वामिहायाहि कृपां कुरु। कोशं वर्द्धय नित्यं त्वं परिरक्ष सुरेश्वर॥
  • 4. 5 फूल रखकर आसन दें।
  • 5. ॐ श्रीकुबेराय नमः बोलते हुए पाद्य, अर्घ्य, गंध-अक्षत, फूल, धूप, दीप, नैवेद्य और तांबूल अर्पित करें।
  • 6. आखिर में बोलें, अनेन पूजनेन श्रीधनाध्यक्षः श्रीकुबेरः प्रीयताम्, नमो नमः।
कुबेर की प्राचीन प्रतिमा, हिंगलाजगढ़, मंदसौर से मिली, भोपाल के राज्य संग्रहालय में रखी है
कुबेर की प्राचीन प्रतिमा, हिंगलाजगढ़, मंदसौर से मिली, भोपाल के राज्य संग्रहालय में रखी है फोटो साभार Wikimedia Commons / SpeakingArch, CC BY-SA 4.0

सवाल- यम दीपदान क्या है?

जवाब- पंचांग गणना के स्रोतों के अनुसार त्रयोदशी की शाम यमराज के लिए घर के बाहर दीया जलाया जाता है। मान्यता है कि इससे यमराज प्रसन्न होते हैं। यह दीया परिवार को अकाल मृत्यु से बचाने की कामना से जलाया जाता है। इसे यमदीप या यम दीपम कहते हैं। भोपाल में 6 नवंबर को सायं संध्या में शाम 5:39 से 6:56 बजे तक इसका समय है।

सवाल- यम का दीया कैसे जलाते हैं?

जवाब- पंचांग गणना के स्रोत बस इतना कहते हैं कि दीया शाम को घर के बाहर जलता है। Wikipedia पर दर्ज लोक परंपरा के अनुसार कई जगह गेहूं के आटे के 13 दीये दक्षिण की ओर मुख करके रखे जाते हैं। संख्या और तरीका परिवार की परंपरा से तय करें।

सवाल- यम दीपदान से कौन सी कथा जुड़ी है?

जवाब- Wikipedia में दर्ज लोककथा के अनुसार राजा हिम के 16 साल के बेटे की कुंडली में शादी के चौथे दिन मृत्यु की बात कही गई थी। उस रात पत्नी ने दरवाजे पर गहनों का ढेर लगाया, दीये जलाए और कहानियां सुनाकर पति को जगाए रखा। मान्यता है कि यमराज चमक से भीतर नहीं जा सके और सुबह लौट गए।

घर के बाहर मुंडेर पर रखा दीया
घर के बाहर मुंडेर पर रखा दीया फोटो साभार Wikimedia Commons / siddarth varanasi, CC BY 2.0

पूजा का तरीका हर परिवार में अलग होता है, अपनी परंपरा के अनुसार ही पूजा करें।

धनतेरस पूजा की तैयारी

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क्विज, धनतेरस की पूजा कितना जानते हैं?

सवाल पढ़िए, जवाब सोचिए, फिर सवाल पर टैप करके सही जवाब देखिए…

1. धन्वंतरि समुद्र मंथन से क्या लेकर निकले थे?

सही जवाब- अमृत का कलश, मान्यता के अनुसार।

2. कुबेर की मूर्ति न हो तो किसकी पूजा करते हैं?

सही जवाब- तिजोरी या गहनों के बक्से की।

3. यम का दीया कहां जलाया जाता है?

सही जवाब- घर के बाहर।

4. भोपाल में लक्ष्मी-कुबेर पूजा का मुहूर्त क्या है?

सही जवाब- 6 नवंबर शाम 6:10 से 8:08 बजे तक।

आपके घर में धनतेरस पर कौन सी पूजा होती है? कमेंट में बताइए

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यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पंचांग गणना पर आधारित है, StateNews इसकी पुष्टि नहीं करता।

कुछ कॉमन सवाल जवाब

धन्वंतरि पूजा कब करें?

6 नवंबर, भोपाल में सुबह 6:28 से 8:43 बजे।

यम दीपदान कब है?

6 नवंबर, भोपाल में शाम 5:39 से 6:56 बजे।

कुबेर का मूल मंत्र क्या है?

ॐ श्रीकुबेराय नमः।

लक्ष्मी-कुबेर पूजा कब है?

6 नवंबर, भोपाल में शाम 6:10 से 8:08 बजे तक।

स्रोत, पंचांग गणना (Drik Panchang, धन्वंतरि त्रयोदशी, धन्वंतरि और कुबेर पूजा विधि, धनतेरस मुहूर्त और यम दीपम पेज, 2026), Wikipedia (Dhanteras)। मुख्य फोटो साभार Wikimedia Commons / Abhya2022, CC BY-SA 4.0।