धार की गढ़ कालिका मंदिर में नवरात्रि की अष्टमी पर श्रद्धालुओं का लगा तांता आपको बता दें कि गढ़कालिका मंदिर में भारी तादाद में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं नवरात्रि में भक्तों को मां काली 3 रूप में दर्शन देती है ।
सुबह बाल्यावस्था में दर्शन देती हैं दोपहर में यौवन अवस्था में दर्शन देती है शाम को वृद्ध के रूप में माता के दर्शन होते हैं ।
गढ़ कालिका मंदिर 1700 साल पुराना है जिसकी स्थापना परमार वंश वर्तमान में पवार वंश के द्वारा की गई धार की माता कालिका 18 कुलो की देवी है इसमें पवार राजघराना सहित उपाध्याय और क्षत्रिय समाज भी शामिल है इन सभी समाज के लोग नवरात्रि में पूजा अर्चना के लिए धार पहुंचते हैं सुबह काकड़ आरती के बाद मंदिर में दिनभर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।
इतिहास विदों की माने तो गढ़ कालिका माता मंदिर का इतिहास काफी पुराना है राजा विक्रमादित्य जब सौराष्ट्र विजय के लिए महाराष्ट्र की ओर जा रहे थे तब उन्होंने उज्जैन में पूजा अर्चना करते हुए मां को साथ चलने का आह्वान किया था विक्रमादित्य तंत्र और मंत्र के ज्ञाता थे ।
मां ने तब राजा के समक्ष यह शर्त रखी थी कि वह साथ चलने को तैयार है लेकिन जब राजा पीछे पलट कर देखेगा तो वह वहीं रुक जाएगी ।
राजा विक्रमादित्य अपनी सेना के साथ धार से गुजर रहे थे तभी तेज बारिश हो रही थी तालाबों का पानी घोड़े की कमर तक पहुंच गया था यह देखने के लिए ही जैसे ही राजा विक्रमादित्य ने अपने मुंह पीछे घुमाया इस समय मां धार के गढ़ कालिका पर ही विराजित हो गई ।
बाद में रानी मेंना देवी ने मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया।