8 नवंबर की शाम दिवाली की लक्ष्मी पूजा होगी। हर साल सवाल यही रहता है कि पूजा किस क्रम में करें।
पंचांग गणना के स्रोतों में पूरी दिवाली पूजा को 15 चरणों में बांटा गया है। यहां उसी क्रम को घर के लिए आसान भाषा में समझिए।
आज जानेंगे कि-
- दिवाली पूजा के 15 चरण कौन से हैं?
- लक्ष्मी जी की षोडशोपचार पूजा में क्या-क्या होता है?
- पूजा के बाद क्या करें?

सवाल- दिवाली की पूजा किस समय करें?
जवाब- पंचांग गणना के अनुसार 8 नवंबर को अमावस्या सुबह 11:27 बजे शुरू होकर 9 नवंबर दोपहर 12:31 बजे तक रहेगी। प्रदोष काल में स्थिर वृषभ लग्न को लक्ष्मी पूजा के लिए सबसे अच्छा माना गया है। पूजा मुहूर्त से थोड़ा पहले शुरू होकर बाद तक चल सकती है।
| भोपाल, 8 नवंबर | समय |
|---|---|
| लक्ष्मी पूजा मुहूर्त | शाम 6:02 से 8:01 बजे |
| प्रदोष काल | शाम 5:38 से 8:13 बजे |
| वृषभ लग्न | शाम 6:02 से 8:01 बजे |
| महानिशीथ काल | रात 11:39 से 12:30 बजे |
| अमावस्या तिथि | 8 नवंबर सुबह 11:27 से 9 नवंबर दोपहर 12:31 बजे तक |
सवाल- पूजा से पहले क्या तैयारी करें?
जवाब- पूजा स्थान साफ करके चौकी सजा लें। पंचांग गणना के स्रोतों में लक्ष्मी-गणेश की नई प्रतिमा की पूजा और अपनी क्षमता के अनुसार निर्जल या फलाहार व्रत की बात है। कई परिवार पुरानी प्रतिमा या तस्वीर की ही पूजा करते हैं। बीमार और बुजुर्ग व्रत से पहले डॉक्टर की सलाह लें।

सवाल- दिवाली पूजा के 15 चरण कौन से हैं?
जवाब- पंचांग गणना के स्रोतों में बताया गया क्रम घर के हिसाब से स्टेप में समझिए…
- 1. आत्म-शोधन, आचमन करके खुद को शुद्ध करें।
- 2. संकल्प, हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर पूजा का संकल्प लें।
- 3. शांति पाठ।
- 4. मंगल पाठ।
- 5. कलश स्थापना, जल भरे कलश में मौली, सुपारी और सिक्का।
- 6. पांच उपचारों से गणपति की संक्षिप्त पूजा।
- 7. नवग्रह पूजा।
- 8. षोडश मातृका पूजा।
- 9. नई गणेश प्रतिमा की षोडशोपचार पूजा।
- 10. नई लक्ष्मी प्रतिमा की षोडशोपचार पूजा।
- 11. महाकाली पूजा, कलम और दवात पर।
- 12. सरस्वती पूजा, बही-खाते पर।
- 13. कुबेर पूजा, तिजोरी या गहनों के बक्से पर।
- 14. दीपमालिका पूजा।
- 15. विसर्जन, प्रार्थना के साथ पूजा का समापन।
सवाल- लक्ष्मी जी की षोडशोपचार पूजा में क्या-क्या होता है?
जवाब- षोडशोपचार का मतलब 16 तरह से सेवा है। शुरुआत ध्यान और आवाहन से होती है, फिर 5 फूल रखकर आसन दिया जाता है। इसके बाद पाद्य और अर्घ्य का जल, फिर स्नान होता है। स्नान में जल, दही, शहद, घी, दूध और शक्कर से बना पंचामृत और आखिर में शुद्ध जल चढ़ाया जाता है।
फिर वस्त्र के रूप में मौली, आभूषण, सिंदूर, कुमकुम, अक्षत, चंदन, फूल, बेलपत्र और तुलसी दल चढ़ाते हैं। इसके बाद धूप, घी का दीपक, नैवेद्य, पान-सुपारी और दक्षिणा अर्पित होती है। आखिर में प्रदक्षिणा, पुष्पांजलि, प्रणाम और क्षमा प्रार्थना।

सवाल- ध्यान और आवाहन में कौन सा श्लोक बोलें?
जवाब- पंचांग गणना के स्रोतों में लक्ष्मी ध्यान की शुरुआत इस पंक्ति से होती है, या सा पद्मासनस्था विपुल-कटि-तटी पद्म-पत्रायताक्षी। आवाहन के लिए दिया गया श्लोक शुरू होता है, आगच्छ देवि देवेशि! तेजोमयि महा-लक्ष्मि!

सवाल- पूजा के बाद क्या करें?
जवाब- क्षमा प्रार्थना में आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम् बोलकर भूल के लिए क्षमा मांगी जाती है। पंचांग गणना के स्रोतों के अनुसार पूजा के समय जलाया गया दीपक रात भर जलता रहना चाहिए। इसके बाद श्रीसूक्त और लक्ष्मी स्तुति के पाठ और हो सके तो जागरण की बात कही गई है। रात भर जलने वाले दीये को परदे और कागज से दूर रखें।

पूजा का तरीका हर परिवार में थोड़ा अलग होता है, अपनी परंपरा के अनुसार ही पूजा करें।
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1. दिवाली पूजा का पहला चरण क्या है?
सही जवाब- आत्म-शोधन।
2. पंचामृत में कौन सी 5 चीजें होती हैं?
सही जवाब- दही, शहद, घी, दूध और शक्कर।
3. बही-खाते पर किस देवी की पूजा होती है?
सही जवाब- मां सरस्वती की।
4. पूजा का आखिरी चरण क्या है?
सही जवाब- विसर्जन।
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कुछ कॉमन सवाल जवाब
दिवाली पर लक्ष्मी पूजा कब है?
8 नवंबर की शाम, भोपाल में शाम 6:02 से 8:01 बजे तक।
षोडशोपचार पूजा क्या है?
16 उपचारों से की जाने वाली पूजा।
क्या नई मूर्ति लेना जरूरी है?
नहीं, कई परिवार पुरानी प्रतिमा या तस्वीर की पूजा करते हैं।
पूजा का दीपक कितनी देर जलाएं?
रात भर, सुरक्षित जगह पर।
स्रोत, पंचांग गणना के स्रोत (Drik Panchang, दिवाली पूजा विधि, लक्ष्मी पूजा विधि और भोपाल के लक्ष्मी पूजा 2026 मुहूर्त पेज)। मुख्य फोटो साभार Wikimedia Commons / humdingor, CC BY-SA 2.0।
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