दिवाली की रात लक्ष्मी पूजा का दीया सुबह तक जलता रखने की परंपरा है। पंचांग गणना के स्रोतों की दिवाली पूजा विधि में लिखा है कि पूजा के समय जलाया गया दीपक पूरी रात जलता रहना चाहिए। कई घरों में इसे अखंड दीपक कहते हैं।
दीपोत्सव में 2 शाम यमराज के लिए घर के बाहर दीया रखा जाता है, 6 नवंबर को धनतेरस पर यम दीपम और 8 नवंबर को नरक चतुर्दशी की शाम 4 बत्ती वाला दीया।
आज जानेंगे कि-
- दिवाली पूजा का दीया पूरी रात क्यों जलाया जाता है?
- रात भर दीया सुरक्षित तरीके से कैसे जलाएं?
- यम का दीया कब, कहां और कैसे रखें?

सवाल- पूजा का दीया पूरी रात क्यों जलाते हैं?
जवाब- दीपमालिका पूजा के मंत्र में दीये को अंधकार मिटाने वाला ब्रह्म रूप कहा गया है, भो दीप ब्रह्मरूपस्त्वं ह्यन्धकारविनाशकः। मान्यता है कि अमावस्या की अंधेरी रात में घर में रोशनी बनी रहने से लक्ष्मी का स्वागत होता है।
सवाल- धनतेरस की कथा में भी रात भर दीये का जिक्र है?
जवाब- हां। पंचांग गणना के स्रोतों में दी गई कथा के अनुसार लक्ष्मी ने एक किसान को हर साल कृष्ण त्रयोदशी की रात आने का वचन दिया था। किसान हर साल घर साफ करके रात भर घी के दीये जलाता था। मान्यता है कि यहीं से यह परंपरा चली।
सवाल- रात भर दीया जलाने के लिए क्या तैयारी करें?
जवाब- स्टेप में समझिए…
- 1. बड़ा दीया चुनें, जिसमें ज्यादा घी या तेल आ सके।
- 2. मोटी बत्ती लगाएं, पतली बत्ती जल्दी जल जाती है।
- 3. पास में घी या तेल की कटोरी रखें, रात में एक बार देख लें।
- 4. दीया खिड़की और पंखे के सीधे सामने न रखें।
- 5. नीचे थाली या स्टैंड रखें।
- 6. तय कर लें कि रात में कौन दीया देखेगा।

सवाल- अगर रात में दीया बुझ जाए तो क्या करें?
जवाब- घबराएं नहीं। पंचांग गणना के स्रोतों में दीया बुझने को लेकर कोई डर वाली बात नहीं लिखी है। कई परिवार शांत मन से प्रणाम करके दीया दोबारा जला देते हैं।
सवाल- धनतेरस पर यम का दीया कब और कहां रखें?
जवाब- पंचांग गणना के अनुसार 6 नवंबर को त्रयोदशी की शाम यम दीपम है, भोपाल में शाम 5:39 से 6:56 बजे तक। दीया घर के बाहर जलता है और मान्यता है कि यह परिवार को अकाल मृत्यु से बचाने की कामना से जलाया जाता है।
सवाल- नरक चतुर्दशी पर यम का दीया कैसा होता है?
जवाब- पंचांग गणना के स्रोतों में दी गई नरक चतुर्दशी विधि के अनुसार शाम को घर के बाहर यम के लिए 4 बत्ती वाला दीया जलता है। चारों बत्तियां धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्रतीक मानी जाती हैं। फिर रसोई, स्नानघर और पेड़ों के नीचे भी दीये रखते हैं। इस बार नरक चतुर्दशी 8 नवंबर को लक्ष्मी पूजा के दिन ही है।
| दीया | तारीख | कहां | समय, भोपाल (पंचांग गणना) |
|---|---|---|---|
| यम दीपम | 6 नवंबर, शुक्रवार | घर के बाहर | शाम 5:39 से 6:56 बजे |
| यम का 4 बत्ती वाला दीया | 8 नवंबर, रविवार | घर के बाहर | शाम को, सूर्यास्त के बाद |
| लक्ष्मी पूजा का दीपक | 8 नवंबर, रविवार | पूजा स्थान पर | पूजा शाम 6:02 से 8:01 बजे, फिर रात भर |

सवाल- घर के बाहर दीया रखते समय क्या ध्यान रखें?
जवाब- दीया पर्दे, तोरण और सूखे पत्तों से दूर, बच्चों और पालतू जानवरों की पहुंच से बाहर रखें। पटाखे चलाने की जगह से दीये दूर रखें और पास में पानी की बाल्टी रखें।

दीया जलाने का तरीका हर परिवार में अलग है, अपनी परंपरा के अनुसार ही दीये जलाएं।
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1. दिवाली पूजा का दीपक कब तक जलना चाहिए?
सही जवाब- पूरी रात।
2. धनतेरस पर यम का दीया कहां रखते हैं?
सही जवाब- घर के बाहर।
3. नरक चतुर्दशी पर यम के दीये में कितनी बत्तियां होती हैं?
सही जवाब- 4।
4. इस बार नरक चतुर्दशी किस तारीख को है?
सही जवाब- 8 नवंबर, लक्ष्मी पूजा के दिन ही।
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WhatsApp पर शेयर करेंयह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पंचांग गणना पर आधारित है, StateNews इसकी पुष्टि नहीं करता।
कुछ कॉमन सवाल जवाब
अखंड दीपक क्या है?
दिवाली पूजा का वह दीपक जो रात भर जलता है।
यम दीपम 2026 कब है?
6 नवंबर को, भोपाल में शाम 5:39 से 6:56 बजे तक।
यम का दीया किस दिशा में रखें?
Wikipedia में दर्ज लोक परंपरा के अनुसार कई जगह आटे के 13 दीये दक्षिण की ओर मुख करके रखे जाते हैं।
यम का 4 बत्ती वाला दीया कब है?
8 नवंबर, नरक चतुर्दशी की शाम।
स्रोत, पंचांग गणना (Drik Panchang, दिवाली और दीपमालिका पूजा विधि, धनतेरस कथा, यम दीपम, नरक चतुर्दशी पूजा विधि और लक्ष्मी पूजा मुहूर्त पेज, 2026), Wikipedia (Dhanteras)। मुख्य फोटो साभार Wikimedia Commons / Subharnab Majumdar, CC BY 2.0।
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