दिवाली से पहले घर की सफाई में अक्सर पूजा स्थान से टूटी मूर्ति, पुराने कैलेंडर, फीकी पड़ चुकी तस्वीरें और सूखे फूल निकलते हैं। ज्यादातर लोग उलझन में रहते हैं कि इन्हें फेंकें या रखें।
परंपरा में इन चीजों को सम्मान से विदा करने की बात कही जाती है। वहीं केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के दिशानिर्देश बताते हैं कि नदी-तालाब को गंदा किए बिना यह कैसे करें।
आज जानेंगे कि-
- टूटी हुई मिट्टी या धातु की मूर्ति का क्या करें?
- देवी-देवताओं वाली पुरानी तस्वीरें और कैलेंडर कहां दें?
- पुराने फूल, कपड़े और दीयों का सही निपटारा क्या है?
सवाल- खंडित मूर्ति को घर में रख सकते हैं?
जवाब- मान्यता के अनुसार खंडित यानी टूटी हुई मूर्ति की पूजा नहीं की जाती। इसलिए सफाई में ऐसी मूर्ति निकले तो उसे पूजा स्थान से हटाकर सम्मान से विदा करने की परंपरा है। कई परिवारों में मामूली दरार वाली धातु की मूर्ति की मरम्मत करवाकर दोबारा रखने का चलन भी है। यह नियम हर परिवार और इलाके में अलग हो सकता है।

सवाल- मिट्टी की टूटी मूर्ति का विसर्जन कैसे करें?
जवाब- CPCB के मई 2020 के संशोधित दिशानिर्देशों में कहा गया है कि छोटी मूर्तियों को घर पर पानी से भरी बाल्टी में विसर्जित करें और तब तक डूबा रहने दें, जब तक वह पूरी तरह घुल न जाए। इससे नदी, तालाब और झील प्रदूषण से बचते हैं। पूरा तरीका स्टेप में समझिए…
- 1. मूर्ति से फूल, कपड़ा, माला और सजावट का सामान अलग कर लें।
- 2. एक बाल्टी या बड़े बर्तन में साफ पानी भरें।
- 3. मान्यता के अनुसार मूर्ति को प्रणाम कर पूजा में हुई भूल के लिए क्षमा प्रार्थना करते हैं।
- 4. मूर्ति को पानी में रखें और पूरी तरह घुलने तक छोड़ दें, इसमें 1 से 2 दिन लग सकते हैं।
- 5. कई परिवार घुली हुई मिट्टी और पानी को घर के गमले या बगीचे में डाल देते हैं।

सवाल- नदी या तालाब में मूर्ति क्यों नहीं डालनी चाहिए?
जवाब- CPCB के दिशानिर्देश जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाने के लिए हैं। इनमें घरों और मोहल्लों को अस्थायी कुंड या टैंक बनाने के लिए प्रोत्साहित करने की बात है। केंद्र सरकार ने 29 नवंबर 2019 को लोकसभा में बताया था कि 2010 के दिशानिर्देश प्राकृतिक मिट्टी की मूर्तियों को बढ़ावा देने और रासायनिक रंगों से बचने को कहते हैं।

सवाल- इस बार नई लक्ष्मी-गणेश मूर्ति कैसी लें?
जवाब- CPCB के 2020 के दिशानिर्देशों में प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP) की मूर्तियों पर रोक की बात है और सिर्फ प्राकृतिक, जैविक रूप से घुलने वाली सामग्री से बनी मूर्तियों को सही माना गया है। इसलिए प्राकृतिक मिट्टी की बिना रासायनिक रंग वाली मूर्ति लेना बेहतर है। अगले साल उसका विसर्जन भी घर पर आसानी से हो सकेगा।
सवाल- देवी-देवताओं वाली पुरानी तस्वीरें और कैलेंडर का क्या करें?
जवाब- मान्यता है कि जिन चीजों पर देवी-देवताओं के चित्र हों, उन्हें सीधे कूड़े में नहीं फेंकना चाहिए। फ्रेम वाली तस्वीर हो तो पहले कांच, लकड़ी या प्लास्टिक का फ्रेम और कागज अलग करें। कागज वाला हिस्सा सम्मान से समेटकर रद्दी या रीसाइक्लिंग में दें। कई शहरों में मंदिरों में पुरानी पूजा सामग्री जमा करने की जगह होती है, उसकी जानकारी स्थानीय मंदिर से लें।
परिवार की पुरानी तस्वीरें फेंकने से पहले उन्हें स्कैन या मोबाइल से फोटो खींचकर डिजिटल रूप में सहेज लें।

सवाल- पुराने फूल, पत्ते और पूजा के कपड़े कहां दें?
जवाब- CPCB के दिशानिर्देश कहते हैं कि फूल, पत्ते और कपड़े जैसी पूजा सामग्री अलग की जाए। फूल-पत्ते जैसे घुलने वाले कचरे से खाद बनाई जाए और न घुलने वाला कचरा अलग से निपटाया जाए। 2010 के दिशानिर्देशों में कपड़े अनाथालयों को दान करने की बात भी है। घर पर फूल-पत्तों को गमले की मिट्टी में दबाकर खाद बनाई जा सकती है। नीचे देखिए…
सफाई में निकले सामान का क्या करें…
| सामान | क्या करें |
|---|---|
| मिट्टी की खंडित मूर्ति | घर पर बाल्टी के पानी में पूरी तरह घुलने दें |
| धातु की मूर्ति | मरम्मत करवाएं या परंपरा के अनुसार मंदिर में दें |
| पुराने फूल और पत्ते | खाद बनाएं या गीले कचरे में दें |
| पूजा के पुराने कपड़े | धोकर दान करें |
| देवी-देवता वाली पुरानी तस्वीरें | कांच, फ्रेम, कागज अलग करें, कागज रीसाइक्लिंग में |
सवाल- टूटे दीयों और पुराने पूजा के बर्तनों का क्या करें?
जवाब- बिना रंग वाले टूटे मिट्टी के दीये मिट्टी में मिल जाते हैं, इन्हें बगीचे या गमले में डाल सकते हैं। साबुत दीये धोकर दोबारा इस्तेमाल करें। पीतल, तांबे या स्टील के पुराने बर्तन साफ करवाकर फिर से काम में लिए जा सकते हैं।
सफाई में ये गलतियां न करें
जल्दबाजी में लोग कुछ ऐसे काम कर देते हैं, जिनसे पर्यावरण को नुकसान होता है। नीचे देखिए…
| ये गलती न करें | क्यों |
|---|---|
| नदी-तालाब में मूर्ति या फूल न डालें | पानी प्रदूषित होता है |
| कूड़े में सीधे न फेंकें | पहले सूखा, गीला और कांच अलग करें |
| PoP की मूर्ति न खरीदें | CPCB के 2020 दिशानिर्देश में PoP मूर्तियों पर रोक की बात है |
| पेड़ के नीचे ढेर न लगाएं | प्लास्टिक और कांच वहीं पड़ा रह जाता है |
विसर्जन और पुरानी पूजा सामग्री से जुड़े नियम हर परिवार और समाज में कुछ अलग होते हैं। अपने परिवार की परंपरा के हिसाब से ही फैसला लें।
जो काम हो गया, उस पर टिक कीजिए। देखिए 7 में से कितने काम पूरे हुए…
सवाल पढ़िए, अपना जवाब सोचिए, फिर सवाल पर टैप करके सही जवाब देखिए…
1. छोटी मिट्टी की मूर्ति घर पर बाल्टी के पानी में विसर्जित की जा सकती है।
सही जवाब- सही। CPCB के 2020 दिशानिर्देश यही सुझाते हैं।
2. PoP की मूर्ति पानी में जल्दी घुल जाती है, इसलिए वह बेहतर है।
सही जवाब- गलत। CPCB के 2020 दिशानिर्देशों में PoP मूर्तियों पर रोक की बात है।
3. पूजा के पुराने फूल-पत्तों से खाद बनाई जा सकती है।
सही जवाब- सही। दिशानिर्देश घुलने वाले कचरे से खाद बनाने को कहते हैं।
4. पूजा के पुराने कपड़े भी नदी में बहा देने चाहिए।
सही जवाब- गलत। 2010 के दिशानिर्देशों में कपड़े दान करने की बात है।
अपना जवाब नीचे कमेंट में लिखिए। यह जानकारी परिवार के WhatsApp ग्रुप में भी भेजिए, ताकि सबको सही तरीका पता रहे।
WhatsApp पर शेयर करेंयह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और CPCB दिशानिर्देशों पर आधारित है, StateNews इसकी पुष्टि नहीं करता।
कुछ कॉमन सवाल जवाब
खंडित मूर्ति का क्या करें?
मिट्टी की हो तो घर पर बाल्टी के पानी में घोलें, धातु की हो तो मरम्मत करवाएं या परंपरा के अनुसार मंदिर में दें।
क्या मूर्ति नदी में विसर्जित कर सकते हैं?
CPCB के दिशानिर्देश जल स्रोतों को बचाने के लिए घर या अस्थायी कुंड में विसर्जन को बढ़ावा देते हैं।
पुराने कैलेंडर और तस्वीरें कहां दें?
फ्रेम और कागज अलग करके कागज सम्मान से रीसाइक्लिंग में दें, कूड़े में सीधे न फेंकें।
दिवाली पर कैसी मूर्ति खरीदें?
प्राकृतिक मिट्टी की, बिना रासायनिक रंग वाली मूर्ति। CPCB के 2020 दिशानिर्देश PoP मूर्तियों के खिलाफ हैं।
स्रोत, CPCB संशोधित दिशानिर्देश (मई 2020), लोकसभा प्रश्न 167 (29 नवंबर 2019)। मुख्य फोटो साभार Wikimedia Commons / Anushka10patel, CC BY 4.0। AI वाली तस्वीरें प्रतीकात्मक हैं।
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