दिवाली पर पटाखे और फुलझड़ी से हाथ, चेहरा या कपड़े जलने के मामले हर साल सामने आते हैं। घबराहट में लोग जले हिस्से पर बर्फ, टूथपेस्ट या घी लगा देते हैं।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय ने 2025 में जलने के इलाज की स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट गाइडलाइन जारी की है। इसमें अस्पताल पहुंचने से पहले की फर्स्ट एड भी बताई गई है।
आज जानेंगे कि-
- जलने पर सबसे पहले क्या करें?
- जले हिस्से पर क्या नहीं लगाना चाहिए?
- किस तरह की जलन में तुरंत अस्पताल जाना जरूरी है?

सवाल- कपड़ों में आग लग जाए तो क्या करें?
जवाब- गाइडलाइन के मुताबिक रुकें, लेटें और लुढ़कें यानी STOP, DROP and ROLL का तरीका अपनाएं। व्यक्ति को भागने न दें, क्योंकि भागने से आग और भड़कती है। उसे जमीन पर लिटाएं, जलता हिस्सा ऊपर रहे, और कंबल जैसे मोटे सूती कपड़े से आग बुझाएं। आग बुझते ही वह कपड़ा हटा दें, क्योंकि उसमें गर्मी बनी रहती है।
सवाल- जलने पर सबसे पहले क्या करें?
जवाब- गाइडलाइन में बताई गई फर्स्ट एड को स्टेप में समझिए…
- 1. जले हिस्से पर नल का सामान्य ठंडा पानी डालें, पहले 10 मिनट लगातार। इससे गर्मी निकलती है और दर्द कम होता है।
- 2. बर्फ या बर्फ जैसा ठंडा पानी न लगाएं, इससे टिशू को और नुकसान हो सकता है।
- 3. जले हुए कपड़े, बेल्ट, मोजे और जूते उतार दें।
- 4. अंगूठी, चूड़ी और दूसरे गहने तुरंत उतारें, क्योंकि सूजन बढ़ने पर ये खून का बहाव रोक सकते हैं।
- 5. जले हिस्से को साफ और सूखी चादर या कपड़े से ढक दें।
- 6. मदद के लिए तुरंत फोन करें और अस्पताल ले जाएं।

सवाल- जले हिस्से पर क्या नहीं लगाना चाहिए?
जवाब- गाइडलाइन साफ कहती है कि जले हिस्से पर अपने आप कोई दवा न लगाएं। मलहम, क्रीम, लोशन, पाउडर, ग्रीस, घी, जेंशियन वायलेट, कैलामाइन लोशन, टूथपेस्ट और मक्खन लगाने से मना किया गया है। छाले भी न फोड़ें।
सवाल- बच्चों के साथ क्या ध्यान रखें?
जवाब- गाइडलाइन के मुताबिक बहुत देर तक पानी डालने से शरीर का तापमान खतरनाक रूप से गिर सकता है, खासकर छोटे बच्चों में और ज्यादा हिस्सा जलने पर। छोटे बच्चों और शरीर का 25 फीसदी से ज्यादा हिस्सा जलने वालों को पानी में डुबोना नहीं चाहिए।

सवाल- किस तरह की जलन में तुरंत अस्पताल जाएं?
जवाब- गाइडलाइन के मुताबिक इन हालात में मरीज को बड़े अस्पताल भेजना जरूरी है…
- 1. हाथ, पैर, चेहरा, जननांग या किसी जोड़ पर जलन।
- 2. गहरी जलन, जिसमें चमड़ी की पूरी परत जल गई हो, किसी भी उम्र में।
- 3. धुआं सांस में जाने से हुई चोट।
- 4. 10 साल से छोटे बच्चे या 50 साल से ज्यादा उम्र वाले का 5 फीसदी से ज्यादा हिस्सा जलना, बाकी लोगों में 10 फीसदी से ज्यादा।
जले हिस्से का अंदाजा लगाने के लिए गाइडलाइन एक आसान तरीका बताती है। मरीज की अपनी हथेली, उंगलियां सटाकर, शरीर के करीब 1 फीसदी हिस्से के बराबर मानी जाती है।

| क्या करें | क्या न करें |
|---|---|
| 10 मिनट नल का ठंडा पानी | बर्फ या बर्फीला पानी |
| गहने और जले कपड़े उतारें | टूथपेस्ट, घी, मक्खन, मलहम |
| साफ सूखे कपड़े से ढकें | छाले फोड़ना |
| आग लगे तो रुकें, लेटें, लुढ़कें | जलते कपड़ों में भागना |
सवाल- आंख में बारूद या केमिकल चला जाए तो?
जवाब- गाइडलाइन में केमिकल से आंख की चोट पर तुरंत खूब सारे साफ पानी या नॉर्मल सलाइन से आंख धोने को कहा गया है। अस्पताल ले जाते समय भी धोना जारी रखें और जल्द आंख के डॉक्टर को दिखाएं।
एम्बुलेंस के लिए 108 डायल करें। आग लगने की सूचना और पुलिस मदद के लिए MP के सभी 55 जिलों में डायल 112 सेवा है।
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सवाल पढ़िए, जवाब सोचिए, फिर सवाल पर टैप करके सही जवाब देखिए…
1. जले हिस्से को कितनी देर ठंडे पानी से ठंडा करें?
सही जवाब- पहले 10 मिनट लगातार, नल के सामान्य ठंडे पानी से।
2. क्या जलने पर बर्फ लगा सकते हैं?
सही जवाब- नहीं, बर्फ से टिशू को और नुकसान हो सकता है।
3. कपड़ों में आग लगे तो क्या करें?
सही जवाब- रुकें, लेटें और लुढ़कें, कंबल से आग बुझाएं।
4. शरीर का कितना हिस्सा अपनी एक हथेली के बराबर माना जाता है?
सही जवाब- करीब 1 फीसदी।
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WhatsApp पर शेयर करेंयह जानकारी सिर्फ प्राथमिक उपचार के लिए है, डॉक्टर की सलाह और इलाज का विकल्प नहीं है। जलने पर जल्द से जल्द नजदीकी अस्पताल या डॉक्टर से संपर्क करें।
कुछ कॉमन सवाल जवाब
पटाखे से जलने पर सबसे पहले क्या करें?
जले हिस्से पर 10 मिनट तक नल का सामान्य ठंडा पानी डालें।
क्या जले हिस्से पर टूथपेस्ट लगा सकते हैं?
नहीं, स्वास्थ्य मंत्रालय की गाइडलाइन में टूथपेस्ट, घी, मक्खन और मलहम लगाने से मना किया गया है।
चेहरा या हाथ जले तो?
ऐसी जलन में तुरंत अस्पताल जाएं।
छाले पड़ जाएं तो?
छाले न फोड़ें, डॉक्टर को दिखाएं।
स्रोत, Standard Treatment Guidelines for Management of Burns 2025, ट्रॉमा एंड बर्न डिवीजन, स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (dghs.mohfw.gov.in), MP पुलिस डायल 112 पोर्टल, बड़वानी जिला स्वास्थ्य पेज (108 एम्बुलेंस)। मुख्य फोटो साभार Wikimedia Commons / Framedtwinkles, CC0।
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