8 नवंबर की शाम लक्ष्मी पूजा के बाद ज्यादातर घरों में आरती होती है और फिर मंत्र जप या स्तुति का पाठ। पंचांग गणना के स्रोतों में पूजा के बाद लक्ष्मी स्तुति के पाठ और हो सके तो रात भर जागरण की बात कही गई है।
इसी रात पूजा का दीपक रात भर जलाने की परंपरा भी है। इसलिए आरती और मंत्र के साथ यह जानना भी जरूरी है कि पूजा के बाद किन बातों से बचें।
आज जानेंगे कि-
- लक्ष्मी पूजा के बाद कौन सी आरती गाई जाती है?
- लक्ष्मी के कौन से मंत्र प्रचलित हैं?
- पूजा के बाद परंपरा और सुरक्षा के हिसाब से क्या न करें?

सवाल- लक्ष्मी पूजा के बाद कौन सी आरती गाई जाती है?
जवाब- उत्तर और मध्य भारत के ज्यादातर घरों में पहले गणेश जी की और फिर लक्ष्मी जी की आरती गाई जाती है। पंचांग गणना के स्रोतों के अनुसार लक्ष्मी माता की आरती लक्ष्मी से जुड़े लगभग हर मौके पर गाई जाती है। लक्ष्मी आरती की शुरुआत इन पंक्तियों से होती है…
गणेश आरती की शुरुआत होती है, जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥ पूरी आरती ज्यादातर घरों की पूजा की किताब में होती है। महाराष्ट्र में जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी आरती भी प्रचलित है।

सवाल- लक्ष्मी के कौन से मंत्र प्रचलित हैं?
जवाब- पंचांग गणना के स्रोतों में लक्ष्मी के ये मंत्र दिए गए हैं…
- 1. महालक्ष्मी मंत्र, ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।
- 2. कमला मंत्र, ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद।
- 3. महालक्ष्मी गायत्री, ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि, तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ।
- 4. कुबेर मंत्र, ॐ श्रीकुबेराय नमः।
- 5. दीप प्रार्थना, शुभं करोतु कल्याणमारोग्यं सुख-सम्पदम्।
जप के लिए कोई तय संख्या जरूरी नहीं है। कई परिवार 108 बार माला से जप करते हैं, कई सिर्फ 11 बार। भोपाल में 8 नवंबर को महानिशीथ काल रात 11:39 से 12:30 बजे तक है, कई परिवार इसी समय जप करते हैं।
सवाल- पूजा के आखिर में क्षमा प्रार्थना क्यों?
जवाब- पंचांग गणना के स्रोतों में लक्ष्मी पूजा का आखिरी चरण क्षमा प्रार्थना है। इसकी पंक्ति है, आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्। भाव यह है कि मुझे न आवाहन का सही तरीका पता है, न विसर्जन का, पूजा में जो भूल हुई उसे क्षमा करें।

सवाल- पूजा के बाद परंपरा के हिसाब से क्या न करें?
जवाब- कई परिवारों में ये मान्यताएं प्रचलित हैं, हर घर में एक जैसी नहीं…
- 1. पूजा का दीपक बुझने न दें, पंचांग गणना के स्रोतों में इसे रात भर जलाने की बात है।
- 2. कई परिवार पूजा स्थान से लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा और चौकी उसी रात नहीं हटाते।
- 3. प्रसाद और पूजा की सामग्री को पैरों में या कूड़े में न डालें।

सवाल- सुरक्षा के हिसाब से क्या न करें?
जवाब- रात भर जलने वाला दीया और पटाखे साथ हों तो सावधानी जरूरी है। इन बातों का ध्यान रखें…
- 1. जलते दीये को परदे, कागज, सूखे फूलों की माला और कपड़ों के पास न रखें।
- 2. अखंड दीये के नीचे थाली या स्टैंड रखें, सीधे लकड़ी की चौकी पर न रखें।
- 3. आरती करते वक्त ढीले दुपट्टे और सिंथेटिक कपड़ों का ध्यान रखें।
- 4. पूजा स्थान के पास पटाखे न जलाएं और बच्चों को अकेले पटाखे न चलाने दें।
- 5. पास में पानी या रेत की बाल्टी रखें, आग लगने पर 101 या 112 पर फोन करें।

आरती, मंत्र और पूजा के नियम हर परिवार में थोड़े अलग होते हैं। अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार ही पूजा करें।
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जो तैयारी हो गई, उस पर टिक कीजिए…
सवाल पढ़िए, जवाब सोचिए, फिर सवाल पर टैप करके सही जवाब देखिए…
1. लक्ष्मी आरती की पहली पंक्ति क्या है?
सही जवाब- ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
2. महालक्ष्मी गायत्री में लक्ष्मी को किसकी पत्नी कहा गया है?
सही जवाब- भगवान विष्णु की।
3. लक्ष्मी पूजा का आखिरी चरण क्या है?
सही जवाब- क्षमा प्रार्थना।
4. भोपाल में 8 नवंबर को महानिशीथ काल कब है?
सही जवाब- रात 11:39 से 12:30 बजे तक।
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WhatsApp पर शेयर करेंयह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पंचांग गणना पर आधारित है, StateNews इसकी पुष्टि नहीं करता।
कुछ कॉमन सवाल जवाब
लक्ष्मी पूजा के बाद पहले किसकी आरती करें?
ज्यादातर घरों में पहले गणेश जी की, फिर लक्ष्मी जी की।
लक्ष्मी का प्रमुख मंत्र कौन सा है?
महालक्ष्मी मंत्र, ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।
मंत्र जप कब करें?
पूजा के बाद, कई परिवार महानिशीथ काल रात 11:39 से 12:30 में जप करते हैं।
अखंड दीया कहां रखें?
पूजा स्थान पर, थाली में, परदे और कागज से दूर।
स्रोत, पंचांग गणना के स्रोत (Drik Panchang, लक्ष्मी मंत्र, लक्ष्मी माता आरती, लक्ष्मी पूजा विधि, दिवाली पूजा विधि और दीपमालिका पूजा पेज)। आरती की पंक्तियां पारंपरिक भक्ति पाठ से। मुख्य फोटो साभार Wikimedia Commons / Vikramdeep Sidhu, CC BY 2.0।
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