दिवाली पर घर का मुख्य द्वार सबसे पहले सजाया जाता है। मान्यता है कि लक्ष्मी इसी रास्ते से घर में प्रवेश करती हैं, इसलिए दरवाजे पर तोरण, स्वस्तिक, रंगोली और लक्ष्मी के चरण बनाने की परंपरा है।

पंचांग गणना के स्रोतों में भी लक्ष्मी पूजा के दिन घर को गेंदे के फूल और आम, अशोक व केले के पत्तों से सजाने की बात कही गई है।

आज जानेंगे कि-

  • मुख्य द्वार पर तोरण किस चीज का और कब लगाएं?
  • स्वस्तिक और लक्ष्मी पद कहां और कैसे बनाते हैं?
  • सजावट में किन सावधानियों का ध्यान रखें?
दिवाली पर रोशनी से सजा एक घर
दिवाली पर रोशनी से सजा एक घर फोटो साभार Wikimedia Commons / Aarav Rahtole, CC BY-SA 4.0

सवाल- मुख्य द्वार पर तोरण किस चीज का लगाते हैं?

जवाब- परंपरा में आम या अशोक के पत्तों और गेंदे के फूलों का तोरण, जिसे बंदनवार भी कहते हैं, दरवाजे के ऊपर लगाया जाता है। पंचांग गणना के स्रोतों के अनुसार लक्ष्मी पूजा के दिन ज्यादातर हिंदू परिवार घर और दफ्तर को गेंदे के फूल और आम, अशोक व केले के पत्तों से सजाते हैं। ताजे पत्ते और फूल बाद में खाद में बदल जाते हैं, प्लास्टिक के तोरण के मुकाबले यह पर्यावरण के लिए भी बेहतर है।

गेंदे के फूलों की माला
गेंदे के फूलों की माला फोटो साभार Wikimedia Commons / SnapMeUp, CC BY 4.0

सवाल- दरवाजे के दोनों ओर कलश क्यों रखते हैं?

जवाब- पंचांग गणना के स्रोतों में मुख्य द्वार के दोनों ओर छिलके वाले नारियल से ढका मंगल कलश रखना शुभ बताया गया है। कई घरों में कलश की जगह दीये या फूलों से भरा पात्र रखा जाता है। यह परिवार की परंपरा पर निर्भर है।

सवाल- स्वस्तिक कहां और कैसे बनाते हैं?

जवाब- कई परिवारों में दरवाजे के दोनों ओर या चौखट के ऊपर रोली, कुमकुम या हल्दी से स्वस्तिक बनाया जाता है। कुछ जगह इसके साथ शुभ और लाभ भी लिखा जाता है। स्वस्तिक को मंगल का प्रतीक माना जाता है। इसका रूप और जगह हर इलाके में कुछ अलग होती है।

रंगोली में बना स्वस्तिक
रंगोली में बना स्वस्तिक फोटो साभार Wikimedia Commons / Ujjwal Mahendrabhai Suthar, CC BY-SA 4.0

सवाल- लक्ष्मी पद यानी लक्ष्मी के चरण कैसे बनाएं?

जवाब- परंपरा में चावल के आटे, रंगोली या कुमकुम से छोटे पैरों के निशान बनाए जाते हैं, जिनकी उंगलियां घर के अंदर पूजा स्थान की ओर होती हैं। मान्यता है कि इससे लक्ष्मी के घर में आने का भाव बनता है। बाजार में तैयार स्टिकर भी मिलते हैं, पर कई परिवार हाथ से बनाना पसंद करते हैं।

सवाल- मुख्य द्वार की सजावट कब करें?

जवाब- ज्यादातर घरों में सजावट धनतेरस यानी 6 नवंबर से शुरू हो जाती है और लक्ष्मी पूजा 8 नवंबर की शाम से पहले पूरी कर ली जाती है। तोरण भाई दूज 11 नवंबर तक लगा रहने दिया जाता है। स्टेप में समझिए…

  • 1. दरवाजा, चौखट और देहरी साफ पानी से धोएं।
  • 2. चौखट के ऊपर आम या अशोक के पत्तों और गेंदे का तोरण बांधें।
  • 3. दरवाजे के दोनों ओर स्वस्तिक बनाएं, चाहें तो शुभ-लाभ लिखें।
  • 4. देहरी के बाहर रंगोली बनाएं और दोनों ओर दीये या कलश रखें।
  • 5. देहरी से पूजा स्थान तक लक्ष्मी के चरण बनाएं, उंगलियां अंदर की ओर।

सवाल- सजावट में किन सावधानियों का ध्यान रखें?

जवाब- दीये और मोमबत्ती को कपड़े, कागज या सूखे पत्तों वाले तोरण से दूर रखें। बिजली की झालर के तार कटे-फटे न हों और एक ही सॉकेट पर ज्यादा लोड न डालें। रंगोली ऐसी जगह न बनाएं जहां फिसलन हो। प्लास्टिक की जगह प्राकृतिक पत्ते और फूल चुनें।

दिवाली के लिए सजाया गया एक दफ्तर
दिवाली के लिए सजाया गया एक दफ्तर फोटो साभार Wikimedia Commons / Rakesh Krishna Kumar, CC BY-SA 2.0

सजावट के ये तरीके हर परिवार और इलाके में कुछ अलग होते हैं। अपनी परंपरा के हिसाब से ही सजावट करें।

मुख्य द्वार सजावट चेकलिस्ट

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1. तोरण आमतौर पर किन पत्तों का बनाया जाता है?

सही जवाब- आम या अशोक के पत्तों का, साथ में गेंदे के फूल।

2. मुख्य द्वार के दोनों ओर क्या रखना शुभ बताया गया है?

सही जवाब- नारियल से ढका मंगल कलश।

3. लक्ष्मी के चरणों की उंगलियां किस ओर रखते हैं?

सही जवाब- घर के अंदर, पूजा स्थान की ओर।

4. दीयों को किन चीजों से दूर रखना चाहिए?

सही जवाब- कपड़े, कागज और सूखे पत्तों वाली सजावट से।

आपके घर में मुख्य द्वार कैसे सजाया जाता है? अपनी परंपरा बताइए

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यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पंचांग गणना पर आधारित है, StateNews इसकी पुष्टि नहीं करता।

कुछ कॉमन सवाल जवाब

दिवाली पर तोरण कब लगाएं?

ज्यादातर घरों में धनतेरस से लगाया जाता है और भाई दूज तक रहता है।

स्वस्तिक किससे बनाएं?

रोली, कुमकुम या हल्दी से, परिवार की परंपरा के अनुसार।

लक्ष्मी पद कहां बनाते हैं?

देहरी से पूजा स्थान तक, उंगलियां अंदर की ओर।

क्या प्लास्टिक का तोरण लगा सकते हैं?

लगा सकते हैं, पर प्राकृतिक पत्ते और फूल पर्यावरण के लिए बेहतर हैं।

स्रोत, पंचांग गणना के स्रोत (Drik Panchang, लक्ष्मी पूजा 2026 पेज, सजावट और मंगल कलश की परंपरा)। बाकी परंपराएं प्रचलित मान्यताओं के रूप में। मुख्य फोटो साभार Wikimedia Commons / Aarav Rahtole, CC BY-SA 4.0।