दिवाली की रात लक्ष्मी-गणेश के साथ घर की तिजोरी, गहनों के बक्से और दुकान के गल्ले की भी पूजा होती है। पंचांग गणना के स्रोतों में इसे तिजोरी-बक्से पर श्रीकुबेर पूजा कहा गया है।
मान्यता है कि कुबेर संसार के धन के रक्षक और खजांची हैं। इसलिए लक्ष्मी पूजा के साथ उनकी पूजा करके धन की रक्षा और बढ़ोतरी की कामना की जाती है।
आज जानेंगे कि-
- तिजोरी को कुबेर का रूप मानकर पूजा क्यों होती है?
- तिजोरी पर स्वस्तिक और मौली का क्या अर्थ है?
- पूजा के कलश में सिक्का और सुपारी क्यों डालते हैं?

सवाल- दिवाली पूजा में कुबेर पूजा का स्थान क्या है?
जवाब- पंचांग गणना के स्रोतों के अनुसार पूरी दिवाली पूजा में आत्म-शोधन, संकल्प, कलश स्थापना, गणेश पूजा, नवग्रह पूजा, लक्ष्मी पूजा, लेखनी-दवात पर महाकाली पूजा, बही-खाते पर सरस्वती पूजा और तिजोरी पर कुबेर पूजा शामिल है। आखिर में दीपमालिका पूजा और विसर्जन होता है। कुबेर की पूजा धनतेरस यानी 6 नवंबर को भी की जाती है।
सवाल- तिजोरी को कुबेर का रूप क्यों मानते हैं?
जवाब- पंचांग गणना के स्रोत कहते हैं कि अगर घर में कुबेर की मूर्ति नहीं है तो तिजोरी या गहनों के बक्से को ही कुबेर का प्रतीक मानकर पूजा की जा सकती है। मान्यता है कि जहां धन रखा जाता है, वहीं धन के रक्षक का आह्वान करना चाहिए।
सवाल- तिजोरी पर स्वस्तिक और मौली क्यों?
जवाब- पूजा शुरू करने से पहले तिजोरी पर सिंदूर से स्वस्तिक बनाने और उस पर मौली यानी कलावा बांधने की बात कही गई है। स्वस्तिक मंगल का प्रतीक माना जाता है और मौली रक्षा सूत्र। कई परिवार हल्दी या रोली से भी स्वस्तिक बनाते हैं।

सवाल- कुबेर पूजा की विधि क्या है?
जवाब- पंचांग गणना के स्रोतों में बताई गई विधि को स्टेप में समझिए…
- 1. तिजोरी साफ करके उस पर सिंदूर से स्वस्तिक बनाएं और मौली बांधें।
- 2. हाथ जोड़कर कुबेर का ध्यान करें।
- 3. आवाहन मुद्रा में कुबेर को आमंत्रित करें।
- 4. तिजोरी के सामने 5 फूल रखकर आसन अर्पित करें।
- 5. चंदन, अक्षत, फूल, धूप, दीप और नैवेद्य से पूजा करें।
- 6. आखिर में गंध, अक्षत और फूल तिजोरी पर चढ़ाकर प्रणाम करें।
पंचांग गणना के स्रोतों में आवाहन के लिए यह श्लोक दिया गया है, आवाहयामि देव! त्वामिहायाहि कृपां कुरु। कोशं वर्द्धय नित्यं त्वं परि-रक्ष सुरेश्वर॥ पूजा पूरी होने पर ॐ श्रीकुबेराय नमः बोलकर प्रणाम किया जाता है।
सवाल- पूजा के कलश में सिक्का और सुपारी क्यों डालते हैं?
जवाब- दिवाली पूजा की शुरुआत कलश स्थापना से होती है। पंचांग गणना के स्रोतों में बताई गई कलश स्थापना में कलश में जल भरा जाता है, गले में लाल कपड़ा या मौली लपेटी जाती है, फिर सुपारी और एक रुपए का सिक्का डाला जाता है। हर चरण का अलग मंत्र है। मान्यता है कि कलश में सभी देवताओं का वास होता है।

सवाल- क्या तिजोरी में पूजा के बाद कुछ रखा जाता है?
जवाब- यह हर परिवार में अलग है। कई घरों में पूजा के सिक्के, हल्दी की गांठ या अक्षत तिजोरी में रख दिए जाते हैं। यह आस्था और पारिवारिक परंपरा की बात है, इससे धन बढ़ने की कोई गारंटी नहीं होती।
सवाल- व्यापारी बही-खाते की पूजा कैसे करते हैं?
जवाब- पंचांग गणना के स्रोतों के अनुसार दिवाली पर बही-खाते पर सरस्वती और कलम-दवात पर महाकाली की पूजा होती है। गुजरात में इसे चोपड़ा पूजन कहते हैं। इसी दिन से कई व्यापारी नए खाते शुरू करते हैं।

पूजा का तरीका हर समाज और परिवार में थोड़ा अलग होता है। अपनी परंपरा के अनुसार ही पूजा करें।
MP के 5 शहरों में दिवाली के मुहूर्त अलग, इंदौर-उज्जैन में गोवर्धन पूजा 9 नवंबर को ही
दिवाली 2026 कब है, 8 या 9 नवंबर, धनतेरस से भाई दूज तक 6 दिन का पूरा कैलेंडर
जो तैयारी हो गई, उस पर टिक कीजिए…
सवाल पढ़िए, जवाब सोचिए, फिर सवाल पर टैप करके सही जवाब देखिए…
1. कुबेर की मूर्ति न हो तो किसकी पूजा की जाती है?
सही जवाब- तिजोरी या गहनों के बक्से की, उसे कुबेर का प्रतीक मानकर।
2. तिजोरी पर स्वस्तिक किससे बनाने की बात कही गई है?
सही जवाब- सिंदूर से।
3. कुबेर को आसन देने के लिए कितने फूल रखते हैं?
सही जवाब- 5 फूल।
4. बही-खाते पर किस देवी की पूजा होती है?
सही जवाब- मां सरस्वती की।
अपना जवाब नीचे कमेंट में लिखिए और यह जानकारी परिवार के WhatsApp ग्रुप में भेजिए।
WhatsApp पर शेयर करेंयह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पंचांग गणना पर आधारित है, StateNews इसकी पुष्टि नहीं करता।
कुछ कॉमन सवाल जवाब
दिवाली पर तिजोरी की पूजा कब करें?
लक्ष्मी पूजा के साथ, 8 नवंबर की शाम। भोपाल में मुहूर्त शाम 6:02 से 8:01 बजे तक है।
क्या धनतेरस पर भी कुबेर पूजा होती है?
हां, धनतेरस यानी 6 नवंबर को लक्ष्मी के साथ कुबेर की पूजा की जाती है।
तिजोरी पर स्वस्तिक किससे बनाएं?
पंचांग गणना के स्रोतों में सिंदूर से, कई परिवार रोली या हल्दी भी इस्तेमाल करते हैं।
कुबेर का मंत्र क्या है?
ॐ श्रीकुबेराय नमः।
स्रोत, पंचांग गणना के स्रोत (Drik Panchang, दिवाली पूजा विधि, कुबेर पूजा विधि और कलश स्थापना विधि पेज)। मुख्य फोटो साभार Wikimedia Commons / Abhya2022, CC BY-SA 4.0।
Continue With Google