16 दिन का निर्जल उपवास, मुनि श्री वीरगुप्त जी महाराज की अद्भुत तपस्या फलटण नगरी मे पूर्ण हुई कठिन साधना :
फलटण नगरी में पूर्ण हुई कठिन साधना; अशक्त अवस्था में भी गुरु चरणों में प्रतिक्रमण, आचार्य गुप्तिनंदी जी महाराज कर रहे वात्सल्यपूर्वक सेवा
फलटण। (संवाददाता मुकेश कुमार जैन )आचार्य श्री गुप्तिनंदी जी महाराज के शिष्य मुनि श्री वीरगुप्त जी महाराज ने 16 दिनों तक अन्न एवं जल का पूर्ण त्याग कर निर्जल उपवास की कठिन साधना पूर्ण की। उनकी यह तपस्या संयम, आत्मबल, धैर्य और आध्यात्मिक साधना का प्रेरणादायी उदाहरण बनी है।
मुनि श्री वीरगुप्त जी महाराज इंदौर नगर के कालानी नगर स्थित त्रिमूर्ति दिगंबर जैन मंदिर से भी लंबे समय तक जुड़े रहे हैं, जहां उन्होंने मंत्री पद पर अपनी सेवाएं प्रदान कीं। उनके तप और साधना के समाचार से इंदौर सहित विभिन्न क्षेत्रों के श्रद्धालुओं में श्रद्धा एवं भक्ति का भाव देखने को मिल रहा है।
16 दिवसीय निर्जल उपवास पूर्ण करने के बाद मुनि श्री अत्यंत अशक्त अवस्था में भी गुरु चरणों में प्रतिक्रमण कर रहे हैं। इस दौरान आचार्य श्री गुप्तिनंदी जी महाराज अपने शिष्य के प्रति वात्सल्य भाव रखते हुए स्वयं उनकी सेवा एवं देखभाल कर रहे हैं। साथ ही मुनि श्री विमलगुप्त जी महाराज भी अपने लघु गुरु भाई की सेवा में समर्पित भाव से लगे हुए हैं।
मुनि श्री की तपस्या के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए श्रद्धालुओं ने सभी धर्मप्रेमी बंधुओं से आह्वान किया कि उनके निरंतराय पारणा, उत्तम स्वास्थ्य एवं आध्यात्मिक साधना के लिए नमोकार मंत्र का जाप करें और उनके तप की अनुमोदना करें।
तप की जय हो। 🙏
संयम की जय हो। 🙏
नमोकार मंत्र की जय हो। 🙏
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