गंगेव बाजार स्थिति बाबूलाल गुप्ता जी के यहाँ चल श्रीमद्भागवत कथा चल रही है कथा व्यास लोकप्रिय कथावाचक आनंद भूषण जी महाराज ने आज चतुर्थ दिवस की कथा का विस्तार से वर्णन करते हुऐ समुद्रमंथन की कथा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि समुद्र से चौदह रत्न प्राप्त हुए श्रीमणि, रम्भा, वारुणी अमिय,शंख,गजराज कल्पद्रुम धनु धेनु धन धन्वंतरि विष वज्र समुद्रमंथन के दौरान प्राप्त हुए विष का भगवान भोले ने रसपान किया इसलिए उनका नाम नीलकंठ हो गया लक्ष्मी जी को नारायण को प्रदान किया।कथा के क्रम को बढ़ाते हुए महाराज श्री के द्वारा श्री गज और ग्रह की कथा का विस्तार बताते हुए वामन चरित्र, रामचरित्र के साथ साथ श्री कृष्ण जन्मोत्सव की कथा का विस्तार से वर्णन किया विप्र धेनु सुर सन्त लीन्ह मनुज अवतार जब इस धरा धाम पर अत्याचार अनाचार पापाचार दुराचार बढ़ जाता है तो सनातन धर्म की स्थापना होती है गीता गंगा च गायत्री गौ गोविंद इति स्मृतः येशु पंच गकारेषु सनातन धर्मों 

कथा के दौरान काफी ज्यादा संख्या मे जन समुदाय एकत्रित हो रहा है भगवान के बालरूप की दिव्य मनमोहक झांकी निकाली गयी और सभी का पूजन किया गया व्यास जी ने बताया कि प्रभु के जन्म मात्र से मिथिला नगरी प्रकाशमय हो गई और दुष्टों का सर्वनाश होना आरम्भ हो गया। इस समूचे कार्यक्रम रंजन जी ने अपनी संगीत की टीम संग मिलकर भजनों के माध्यम से लोगो को मन्त्रमुग्ध कर दिया।