बुंदेलखंड की माटी में होली और भाई-दूज का उल्लासमय उत्सव

केसली (सागर): बुंदेलखंड की माटी में इस वर्ष होली और भाई-दूज का पर्व अपार उत्साह और पारंपरिक गरिमा के साथ मनाया गया। केसली नगर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में गुलाल की लालिमा और फागों की गूंज ने भाईचारे का संदेश जन-जन तक पहुँचाया।

परंपरा और संवेदना का अनूठा मेल

होली के इस पावन अवसर पर केसली में एक अनूठी परंपरा देखने को मिली। यहाँ युवाओं की टोलियों ने एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाकर गले लगाया और सामाजिक सद्भाव की अद्वितीय मिसाल पेश की।

  • अनरय (शोक) वाले घरों में दस्तक: गांव के बुजुर्गों और युवाओं ने टोलियों में फाग गाते हुए उन घरों का रुख किया, जहाँ पिछले वर्ष किसी परिजन का निधन हुआ था। वहाँ गुलाल लगाकर शोक संवेदना व्यक्त की गई और परिवार को सांत्वना दी गई।
  • बुजुर्गों का आशीर्वाद: युवाओं ने बड़े-बुजुर्गों के चरणों में गुलाल अर्पित कर उनका आशीर्वाद लिया।

भाई-दूज पर बहनों का स्नेह

धुरेंडी के अगले दिन भाई-दूज का पर्व विशेष उत्साह के साथ मनाया गया। इस दौरान केसली क्षेत्र में बहनों ने अपने भाइयों को प्रेम का प्रतीक गुलाल लगाया और माथे पर तिलक कर उनके लंबी उम्र की कामना की।

"होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि रिश्तों की कड़वाहट भुलाकर एक होने का पर्व है। फाग और टीका की यह परंपरा हमारी संस्कृति की असली पहचान है।" — स्थानीय निवासी

सुरक्षा और उल्लास के बीच बीता उत्सव

पूरे उत्सव के दौरान शांति व्यवस्था बनी रही। लोग टोलियों में निकलकर ढोल-मजीरों की थाप पर बुंदेली फाग गाते नजर आए। शाम होते ही इष्ट-मित्रों के घर पहुँचकर शुभकामनाओं के आदान-प्रदान का सिलसिला देर रात तक चलता रहा।

इस प्रकार, केसली में होली और भाई-दूज का पर्व पारंपरिक गरिमा और सामाजिक सद्भाव के साथ संपन्न हुआ।