राजस्थान और मारवाड़ी परिवारों में दिवाली पूजा की अपनी रीत है। कई घरों में लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति के साथ कागज पर छपा लक्ष्मी जी का चित्र भी पूजा जाता है, जिसे पाना कहते हैं। कुछ परिवारों में हटड़ी पूजन का भी चलन है।
इन दोनों की कोई तय लिखित विधि भरोसेमंद स्रोतों में नहीं मिलती। इसलिए यहां वही बता रहे हैं जो पंचांग गणना के स्रोतों में लिखा है, बाकी परिवार की परंपरा के तौर पर।
आज जानेंगे कि-
- लक्ष्मी जी का पाना क्या है और नई प्रतिमा का क्या नियम है?
- पाने पर दिखने वाले लक्ष्मी रूप का अर्थ क्या है?
- हटड़ी पूजन के बारे में पक्की जानकारी कितनी है?

सवाल- लक्ष्मी जी का पाना क्या होता है?
जवाब- मारवाड़ी परिवारों में दिवाली पूजा के लिए कागज पर छपे लक्ष्मी जी के चित्र को पाना कहा जाता है। इसे कहां लगाएं और कितने समय रखें, यह हर घर की अपनी रीत है, कोई एक नियम नहीं।
सवाल- क्या दिवाली पूजा में नई प्रतिमा का नियम है?
जवाब- पंचांग गणना के स्रोतों के अनुसार दिवाली पर अमावस्या तिथि में गणेश और लक्ष्मी की नवीन प्रतिमाओं की पूजा होती है। लक्ष्मी पूजा विधि में कहा गया है कि दिवाली पूजा के लिए महालक्ष्मी की नई प्रतिमा खरीदनी चाहिए। कुछ परिवार इसी भाव से हर साल नया पाना लाते हैं।
सवाल- छपे हुए देवी-देवताओं के चित्र कब से बन रहे हैं?
जवाब- चित्रकार राजा रवि वर्मा ने 1894 में मुंबई के घाटकोपर में लिथोग्राफिक प्रेस शुरू की थी, जो 1899 में लोनावला के पास मालवली चली गई। यहां छपे देवी-देवताओं के ओलियोग्राफ बहुत लोकप्रिय हुए।

सवाल- पाने पर लक्ष्मी जी का कौन सा रूप होता है?
जवाब- कई चित्रों में लक्ष्मी जी कमल पर दिखती हैं। पंचांग गणना के स्रोतों में दिए ध्यान मंत्र में भी यही रूप है। मंत्र की शुरुआत है, या सा पद्मासनस्था और अंत है, सा नित्यं पद्महस्ता मम वसतु गृहे। भाव यह है कि कमल पर बैठी और हाथ में कमल लिए लक्ष्मी हमेशा मेरे घर में वास करें।
सवाल- हाथियों के साथ लक्ष्मी का क्या अर्थ है?
जवाब- जिस चित्र में लक्ष्मी के दोनों ओर हाथी जल डालते दिखें, उसे गजलक्ष्मी रूप कहते हैं। यह समृद्धि और उर्वरता का प्रतीक माना जाता है, क्योंकि हाथियों को बादल और बारिश से जोड़ा गया है। भरहुत स्तूप की रेलिंग पर करीब 125 से 100 ईसा पूर्व का गजलक्ष्मी अंकन मिलता है।

सवाल- हटड़ी पूजन के बारे में क्या पता है?
जवाब- हटड़ी या हटरी पूजन कुछ परिवारों और क्षेत्रों में प्रचलित परंपरा है। इसमें क्या रखा जाता है और पूजा किस क्रम में होती है, यह हर परिवार में अलग है। किसी भरोसेमंद स्रोत में हमें इसकी तय विधि नहीं मिली, इसलिए हम कोई नियम नहीं बता रहे। घर के बड़ों से पूछकर ही यह पूजा करें।
सवाल- दिवाली पूजा का पूरा क्रम क्या है?
जवाब- पाना हो या मूर्ति, पंचांग गणना के स्रोतों में पूजा का क्रम कुछ ऐसा है…
| क्रम | पूजा | किस पर या किसकी |
|---|---|---|
| 1 | आत्म-शोधन, संकल्प और कलश स्थापना | कलश |
| 2 | गणेश, नवग्रह और षोडश मातृका पूजा | संक्षिप्त पूजा |
| 3 | नई गणेश और लक्ष्मी प्रतिमा की पूजा | प्रतिमा |
| 4 | महाकाली पूजा | लेखनी-दवात |
| 5 | सरस्वती पूजा | बही-खाता |
| 6 | कुबेर पूजा | तिजोरी या बक्सा |
| 7 | दीपमालिका पूजा और विसर्जन | दीये |
सवाल- पूजा कब करें?
जवाब- पंचांग गणना के अनुसार भोपाल में 8 नवंबर को लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त शाम 6:02 से 8:01 बजे तक है। प्रदोष काल शाम 5:38 से रात 8:13 बजे तक रहेगा। पूजा का दीपक रात भर जलता रहे, ऐसा कहा गया है।
पिछले साल का पाना या पुरानी देव तस्वीरें कूड़े में न फेंकें, परंपरा उन्हें सम्मान से विदा करने की है। मारवाड़ी परिवारों में पूजा की रीत गांव और घर के हिसाब से बदलती है, इसलिए अपने घर की परंपरा ही अपनाएं।
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1. दिवाली पर किनकी नई प्रतिमाओं की पूजा की बात है?
सही जवाब- गणेश और लक्ष्मी की।
2. ध्यान मंत्र में लक्ष्मी किस आसन पर हैं?
सही जवाब- कमल के आसन पर।
3. राजा रवि वर्मा की प्रेस किस साल शुरू हुई?
सही जवाब- 1894 में।
4. दोनों ओर हाथियों वाले लक्ष्मी रूप को क्या कहते हैं?
सही जवाब- गजलक्ष्मी।
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WhatsApp पर शेयर करेंयह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पंचांग गणना पर आधारित है, StateNews इसकी पुष्टि नहीं करता।
कुछ कॉमन सवाल जवाब
लक्ष्मी जी का पाना क्या है?
पूजा के लिए कागज पर छपा लक्ष्मी जी का चित्र।
क्या हटड़ी पूजन की तय विधि है?
भरोसेमंद लिखित स्रोत में तय विधि नहीं मिली, यह पारिवारिक परंपरा है।
2026 में लक्ष्मी पूजा कब है?
8 नवंबर, रविवार को।
गजलक्ष्मी किसका प्रतीक है?
समृद्धि और उर्वरता का।
स्रोत, पंचांग गणना के स्रोत (Drik Panchang, दिवाली पूजा विधि, लक्ष्मी पूजा विधि, भोपाल लक्ष्मी पूजा मुहूर्त), Wikipedia (Ravi Varma Press, Gaja Lakshmi)। पाना और हटड़ी पूजन पारिवारिक परंपरा के रूप में। मुख्य फोटो साभार Wikimedia Commons / Benjamin Vander Steen, CC BY 2.0।
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