1 नवंबर को रवि पुष्य योग है। इसी पुष्य नक्षत्र से ओरछा के रामराजा की एक मान्यता जुड़ी है। कहा जाता है कि भगवान राम अयोध्या से ओरछा सिर्फ पुष्य नक्षत्र में ही चलकर आए थे।
निवाड़ी जिले का ओरछा देश की इकलौती जगह मानी जाती है जहां राम को भगवान के साथ राजा के रूप में पूजा जाता है। यहां रोज पुलिस के जवान उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर देते हैं।
आज जानेंगे कि-
- राम ओरछा के राजा कैसे बने?
- रामराजा को रोज सलामी क्यों दी जाती है?
- दिवाली पर ओरछा जाना हो तो कैसे पहुंचें?

सवाल- राम ओरछा कैसे आए?
जवाब- MP टूरिज्म के मुताबिक ओरछा के राजा मधुकर शाह कृष्ण के भक्त थे और रानी गणेश कुंवरि राम की। राजा ने रानी से ब्रज यानी मथुरा चलने को कहा, पर रानी अयोध्या जाना चाहती थीं। इस पर राजा ने कहा कि लौटो तो राम को साथ लेकर आना। मान्यता है कि अयोध्या में लंबी तपस्या के बाद राम बाल रूप में रानी की गोद में प्रकट हुए।
सवाल- राम ने ओरछा आने की कौन सी 3 शर्तें रखी थीं?
जवाब- मान्यता के अनुसार राम ने 3 शर्तें रखीं। नीचे देखिए…
- 1. वे सिर्फ पुष्य नक्षत्र में ही यात्रा करेंगे।
- 2. ओरछा में वे राजा होंगे।
- 3. जहां पहली बार बैठा दिए जाएंगे, वहीं हमेशा रहेंगे।
स्थानीय कथाओं के अनुसार पैदल यात्रा में करीब 8 महीने 27 दिन लगे। ओरछा पहुंचकर रानी ने राम को अपने महल में बैठा दिया। शर्त के मुताबिक राम वहीं विराजमान हो गए और रानी महल ही मंदिर बन गया।

सवाल- रामराजा को गार्ड ऑफ ऑनर क्यों मिलता है?
जवाब- राम को ओरछा का राजा माना जाता है, इसलिए उन्हें राजकीय सम्मान दिया जाता है। केंद्र सरकार के Incredible India पोर्टल के मुताबिक यह देश का इकलौता मंदिर है जहां भगवान को आधिकारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाता है। शाम की आरती के समय जवान बंदूक से सलामी देते हैं।
सवाल- यहां प्रसाद में क्या मिलता है?
जवाब- MP टूरिज्म के अनुसार यहां खास मेहमानों का स्वागत मीठे प्रसाद की जगह पान और इत्र से किया जाता है, जैसे राजदरबार में होता था।
सवाल- दिवाली पर ओरछा में क्या खास होता है?
जवाब- MP टूरिज्म और Incredible India दोनों के मुताबिक दिवाली पर रामराजा मंदिर रोशनी और दीयों से सजाया जाता है। बेतवा किनारे की छतरियां और किला भी शाम को देखने लायक होते हैं। यहां विवाह पंचमी पर राम विवाह उत्सव भी बड़े स्तर पर मनाया जाता है।

सवाल- ओरछा कैसे पहुंचें?
जवाब- ओरछा बेतवा नदी के किनारे बसा है और झांसी से करीब 18 किमी दूर है। नजदीकी बड़ा रेलवे स्टेशन वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी है। हवाई रास्ते से ग्वालियर या खजुराहो एयरपोर्ट तक पहुंचकर सड़क से ओरछा जा सकते हैं। दर्शन का समय त्योहार पर बदल सकता है, इसलिए जाने से पहले मंदिर प्रबंधन या स्थानीय प्रशासन से पता कर लें।

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1. रामराजा को ओरछा कौन लेकर आया?
सही जवाब- रानी गणेश कुंवरि, मान्यता के अनुसार।
2. राम किस नक्षत्र में ही यात्रा करते थे?
सही जवाब- पुष्य नक्षत्र।
3. रामराजा को रोज कौन सा सम्मान मिलता है?
सही जवाब- गार्ड ऑफ ऑनर, शाम की आरती में सलामी।
4. ओरछा किस नदी के किनारे है?
सही जवाब- बेतवा नदी।
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WhatsApp पर शेयर करेंमंदिर से जुड़ी कथाएं मान्यताओं और स्थानीय परंपरा पर आधारित हैं, StateNews इनकी पुष्टि नहीं करता।
कुछ कॉमन सवाल जवाब
ओरछा का रामराजा मंदिर कहां है?
मध्यप्रदेश के निवाड़ी जिले में, झांसी से करीब 18 किमी दूर।
रामराजा को सलामी कब दी जाती है?
शाम की आरती के समय।
रामराजा मंदिर किसने बनवाया?
मंदिर रानी गणेश कुंवरि का महल था, राजा मधुकर शाह के समय राम यहीं विराजे।
दिवाली पर मंदिर कैसा सजता है?
रोशनी और दीयों से।
स्रोत, MP टूरिज्म (mptourism.com), Incredible India पोर्टल (पर्यटन मंत्रालय), Wikipedia (Ram Raja Temple, Orchha)। मुख्य फोटो साभार Wikimedia Commons / PRATYUSHMAURYA.ECOHUMAN, CC BY-SA 4.0।
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