दिवाली पर ज्यादातर मंदिरों में फूल, दीये और रोशनी से सजावट होती है। रतलाम के महालक्ष्मी मंदिर में श्रृंगार भक्तों के अपने नोटों और गहनों से होता है।
आकाशवाणी ने 2024 में इसे देश का एकमात्र ऐसा मंदिर बताया था, जहां दीपावली पर आम लोगों से मिली नकदी और आभूषणों से सजावट की जाती है। उस साल यह सजावट करीब 4 करोड़ 75 लाख रुपए की थी।
आज जानेंगे कि-
- यह परंपरा क्या है और कब से चल रही है?
- भक्तों के नोट और गहने वापस कैसे मिलते हैं?
- इस बार दीपोत्सव कब से कब तक है?
सवाल- रतलाम के महालक्ष्मी मंदिर की परंपरा क्या है?
जवाब- दीपोत्सव के दौरान शहर और बाहर से आए श्रद्धालु अपने नोट और सोने-चांदी के आभूषण मंदिर में श्रृंगार के लिए देते हैं। इन्हीं से गर्भगृह और मंदिर परिसर को सजाया जाता है। आकाशवाणी के मुताबिक श्रद्धालु देशी-विदेशी मुद्रा और आभूषण लेकर माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
मान्यता है कि दीपावली पर माता के श्रृंगार में शामिल हुआ धन घर में सुख और समृद्धि लाता है। यह आस्था की बात है, इसकी कोई गारंटी नहीं होती।

सवाल- 2024 में कितने रुपए से सजा था मंदिर?
जवाब- आकाशवाणी की 29 अक्टूबर 2024 की खबर के अनुसार मंदिर करीब पौने पांच करोड़ रुपए से सजाया गया था। इसमें करीब 1 करोड़ 47 लाख रुपए के नोट और 3 करोड़ रुपए से ज्यादा के सोने-चांदी के आभूषण थे। नीचे देखिए…
| सजावट में | राशि (2024) |
|---|---|
| नोट, देशी-विदेशी मुद्रा | करीब ₹1.47 करोड़ |
| सोने-चांदी के आभूषण | ₹3 करोड़ से ज्यादा |
स्रोत, आकाशवाणी समाचार, 29 और 30 अक्टूबर 2024
सवाल- यह परंपरा कब से चल रही है?
जवाब- आकाशवाणी के मुताबिक बताया जाता है कि रियासत काल में माता के श्रृंगार के लिए आभूषण दिए जाते थे, जो दीपावली के बाद ही वापस लिए जाते थे। यही परंपरा आज भी निभाई जा रही है। रतलाम पहले एक रियासत थी और शहर का घंटाघर उसी दौर की पहचान माना जाता है।
सवाल- क्या भक्तों का धन वापस मिलता है?
जवाब- हां। परंपरा के मुताबिक दीपोत्सव पूरा होने के बाद श्रृंगार में लगे नोट और आभूषण उन्हीं श्रद्धालुओं को लौटाए जाते हैं, जिन्होंने उन्हें दिया था। धन जमा करने और वापस लेने की व्यवस्था मंदिर प्रबंधन तय करता है, इसलिए धन देने से पहले वहीं से पूरी जानकारी और रसीद लें।
सवाल- प्रसाद में कुबेर पोटली की बात क्या है?
जवाब- मंदिर से जुड़ी एक परंपरा के रूप में बताया जाता है कि दीपोत्सव पर श्रद्धालुओं को प्रसाद के तौर पर कुबेर पोटली दी जाती है। मान्यता है कि इसे घर की तिजोरी या पूजा स्थान में रखा जाता है। पोटली में क्या रहता है और यह किसे और कब मिलती है, इसकी पुष्टि मंदिर प्रबंधन से ही करें।

सवाल- इस बार दीपोत्सव कब से कब तक है?
जवाब- पंचांग गणना के अनुसार इस साल धनतेरस 6 नवंबर को, लक्ष्मी पूजा 8 नवंबर को और भाई दूज 11 नवंबर को है। मंदिर में श्रृंगार और दर्शन का कार्यक्रम दीपोत्सव के इन्हीं दिनों में रहता है। 2026 में सजावट कब शुरू होगी और कितनी राशि की होगी, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
सवाल- रतलाम कैसे पहुंचें?
जवाब- रतलाम जंक्शन पश्चिम रेलवे का बड़ा स्टेशन है और दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग पर पड़ता है। देश के कई हिस्सों से यहां सीधी ट्रेनें आती हैं। स्टेशन से मंदिर शहर के पुराने हिस्से में है, जहां स्थानीय साधन आसानी से मिल जाते हैं।

दर्शन के लिए जाएं तो 5 बातें याद रखें
- 1. धनतेरस और दिवाली के दिन भीड़ सबसे ज्यादा रहती है, सुबह जल्दी पहुंचें।
- 2. नोट या आभूषण देने हों तो मंदिर प्रबंधन से ही रसीद या टोकन लें।
- 3. कीमती सामान अपने पास संभालकर रखें और भीड़ में बच्चों का ध्यान रखें।
- 4. पुलिस और प्रशासन के बताए रास्तों और पार्किंग का ही इस्तेमाल करें।
- 5. दर्शन का समय और व्यवस्था बदल सकती है, जाने से पहले स्थानीय सूचना देख लें।
पूजा और श्रृंगार की परंपराएं मंदिर प्रबंधन और स्थानीय रीति के अनुसार अलग हो सकती हैं।
सवाल पढ़िए, अपना जवाब सोचिए, फिर सवाल पर टैप करके सही जवाब देखिए…
1. 2024 के दीपोत्सव में मंदिर करीब कितने रुपए की नकदी और आभूषणों से सजा था?
सही जवाब- करीब ₹4.75 करोड़, आकाशवाणी के मुताबिक।
2. श्रृंगार के लिए आभूषण देने की परंपरा किस दौर से चली आ रही है?
सही जवाब- रियासत काल से।
3. श्रृंगार में दिए गए नोट और गहने क्या भक्तों को वापस मिलते हैं?
सही जवाब- हां, परंपरा के मुताबिक दीपावली के बाद लौटा दिए जाते हैं।
4. इस साल धनतेरस किस तारीख को है?
सही जवाब- 6 नवंबर 2026, शुक्रवार।
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WhatsApp पर शेयर करेंयह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और उपलब्ध सरकारी समाचार स्रोतों पर आधारित है, StateNews इसकी पुष्टि नहीं करता।
कुछ कॉमन सवाल जवाब
रतलाम महालक्ष्मी मंदिर क्यों प्रसिद्ध है?
दीपावली पर यहां भक्तों से मिले नोटों और आभूषणों से माता का श्रृंगार किया जाता है।
2024 में मंदिर कितने रुपए से सजा था?
आकाशवाणी के मुताबिक करीब 4 करोड़ 75 लाख रुपए की नकदी और आभूषणों से।
क्या श्रृंगार में दिया धन वापस मिलता है?
हां, परंपरा के अनुसार दीपावली के बाद धन और आभूषण लौटा दिए जाते हैं। रसीद मंदिर प्रबंधन से लें।
2026 में दीपोत्सव कब है?
पंचांग गणना के अनुसार 6 नवंबर धनतेरस से 11 नवंबर भाई दूज तक।
स्रोत, आकाशवाणी समाचार (2024), पंचांग गणना (भोपाल)। मुख्य फोटो साभार Wikimedia Commons / Jairajsingh123, CC0। AI वाली तस्वीरें प्रतीकात्मक हैं।
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