मन, वचन और काय से किसी भी जीव को दुख न देना ही सच्चा धर्म : आचार्य श्री सुंदरसागर जी

 

निवाई। (संवाददाता मुकेश जैन)। दिव्य तपस्वी आचार्य श्री 108 सुंदरसागर जी महाराज ने धर्म और अहिंसा का संदेश देते हुए कहा कि मन, वचन और काय से किसी भी जीव को दुख नहीं देना ही सच्चा धर्म है। धर्म केवल पूजा-पाठ और धार्मिक क्रियाओं तक सीमित नहीं, बल्कि हमारे विचार, वाणी और व्यवहार में अहिंसा एवं करुणा का भाव होना चाहिए।

 

आचार्यश्री ने कहा कि मन में किसी के प्रति बुरा विचार रखना, वाणी से कटु शब्द बोलना अथवा अपने आचरण से किसी जीव को कष्ट पहुंचाना धर्म की भावना के विपरीत है। सच्चा धार्मिक वही है, जिसके मन में सभी जीवों के प्रति मैत्री, करुणा और सम्मान का भाव हो।

 

उन्होंने श्रद्धालुओं को प्रेरित करते हुए कहा कि जीवन में अहिंसा को अपनाकर ही आत्मिक शांति और वास्तविक धर्म की अनुभूति की जा सकती है। मन, वचन और कर्म की पवित्रता ही मनुष्य के जीवन को सार्थक बनाती है।