उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर से जुड़ी मान्यता है कि देश में हर बड़ा त्योहार सबसे पहले बाबा महाकाल के दरबार में मनाया जाता है। दिवाली पर भी रूप चतुर्दशी की सुबह बाबा को उबटन लगाकर पर्व की शुरुआत होती है।
मंदिर से जुड़ी यह परंपरा बहुत पुरानी मानी जाती है। पंचांग गणना के अनुसार उज्जैन में नरक चतुर्दशी का अभ्यंग स्नान 8 नवंबर की सुबह 5:39 से 6:36 बजे तक है और इसी दिन शाम को लक्ष्मी पूजा है।
आज जानेंगे कि-
- महाकाल में त्योहार सबसे पहले क्यों मनाए जाते हैं?
- रूप चतुर्दशी और दिवाली पर मंदिर में क्या होता है?
- 2026 में दर्शन के लिए जाएं तो क्या ध्यान रखें?

सवाल- महाकाल में त्योहार सबसे पहले क्यों मनाए जाते हैं?
जवाब- पत्रिका की 2025 की एक रिपोर्ट में मंदिर समिति के हवाले से कहा गया है कि हिंदू परंपरा में सभी मुख्य त्योहारों की शुरुआत बाबा महाकाल के दरबार से ही होती है। इसी परंपरा में रक्षाबंधन पर पहली राखी पुजारी परिवार की महिलाएं बाबा को बांधती हैं और दिवाली पर पहला उबटन भी बाबा को ही लगता है। अमर उजाला की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार मंदिर में पर्व ग्वालियर पंचांग के अनुसार मनाए जाते हैं। MP टूरिज्म के अनुसार महाकालेश्वर 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है।
सवाल- रूप चतुर्दशी पर बाबा का उबटन कैसे होता है?
जवाब- अमर उजाला और फ्री प्रेस की रिपोर्ट्स के आधार पर परंपरा का क्रम समझिए…
- 1. रूप चतुर्दशी की सुबह करीब 4 बजे पुजारी परिवार की महिलाएं बाबा को केसर-चंदन का सुगंधित उबटन लगाती हैं।
- 2. इसके बाद बाबा को गर्म जल से स्नान कराया जाता है।
- 3. फिर नए वस्त्र और आभूषण पहनाकर शृंगार होता है।
- 4. पुजारी परिवार की महिलाएं कपूर आरती करती हैं।
- 5. इसी दिन से गर्मी आने तक बाबा का गर्म जल से स्नान होता है।

सवाल- दिवाली के दिन मंदिर में क्या होता है?
जवाब- अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार दिवाली के दिन गर्भगृह में बाबा को अन्नकूट का भोग लगता है और फुलझड़ी से आरती होती है। शाम को कोटितीर्थ कुंड के आसपास दीप जलाए जाते हैं और पूरे परिसर में रोशनी होती है। ANI के मुताबिक 2022 में दिवाली पर मंदिर में 1,11,000 दीये जले थे।
सवाल- फुलझड़ी पर पाबंदी क्यों है?
जवाब- 25 मार्च 2024 को होली पर भस्म आरती के दौरान गर्भगृह में आग लग गई थी, जिसमें पुजारियों समेत 14 लोग झुलस गए थे। The Week की रिपोर्ट के अनुसार अधिकारियों का मानना था कि उड़ाया गया गुलाल पूजा की थाली में जलते कपूर पर गिरा था। इसके बाद मंदिर समिति ने दिवाली पर हर आरती में सिर्फ 1 प्रतीकात्मक फुलझड़ी की इजाजत दी है। पत्रिका की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार पूरे परिसर में पटाखे और ज्वलनशील सामान मना है।

सवाल- 2026 में उज्जैन में दिवाली कब है?
जवाब- पंचांग गणना के अनुसार उज्जैन के मुहूर्त नीचे हैं। मंदिर अपनी परंपरा के पंचांग से कार्यक्रम तय करता है, इसलिए मंदिर समिति की घोषणा जरूर देखें।
| तारीख | पर्व | उज्जैन का समय, पंचांग गणना |
|---|---|---|
| 6 नवंबर | धनतेरस | शाम 6:17 से 8:15 बजे |
| 8 नवंबर | नरक चतुर्दशी, अभ्यंग स्नान | सुबह 5:39 से 6:36 बजे |
| 8 नवंबर | लक्ष्मी पूजा | शाम का प्रदोष काल |
| 9 नवंबर | गोवर्धन पूजा | दोपहर 3:31 से 5:45 बजे |
सवाल- दर्शन के लिए जाएं तो क्या ध्यान रखें?
जवाब- Wikipedia के अनुसार सबसे नजदीकी एयरपोर्ट इंदौर करीब 58 किमी और उज्जैन जंक्शन मंदिर से करीब 2 किमी दूर है। भस्म आरती की बुकिंग और दर्शन व्यवस्था की जानकारी मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट से लें।
घर पर पूजा अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार ही करें।
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रतलाम महालक्ष्मी मंदिर दिवाली
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1. रूप चतुर्दशी पर बाबा को उबटन कौन लगाता है?
सही जवाब- पुजारी परिवार की महिलाएं।
2. दिवाली की आरती में कितनी फुलझड़ी की इजाजत है?
सही जवाब- सिर्फ 1 प्रतीकात्मक फुलझड़ी।
3. दिवाली के दिन बाबा को किसका भोग लगता है?
सही जवाब- अन्नकूट का।
4. मंदिर में गर्भगृह में आग कब लगी थी?
सही जवाब- 25 मार्च 2024, होली पर।
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WhatsApp पर शेयर करेंयह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पंचांग गणना पर आधारित है, StateNews इसकी पुष्टि नहीं करता।
कुछ कॉमन सवाल जवाब
महाकाल में दिवाली सबसे पहले क्यों मनाई जाती है?
मंदिर की परंपरा के अनुसार सभी मुख्य त्योहारों की शुरुआत बाबा महाकाल के दरबार से होती है।
रूप चतुर्दशी पर महाकाल में क्या होता है?
पुजारी परिवार की महिलाएं केसर-चंदन का उबटन लगाती हैं।
क्या महाकाल मंदिर में पटाखे ले जा सकते हैं?
नहीं, मंदिर समिति की 2025 की गाइडलाइन में यह मना है।
2026 में उज्जैन में अभ्यंग स्नान कब है?
8 नवंबर सुबह 5:39 से 6:36 बजे तक।
स्रोत, MP टूरिज्म (mptourism.com, Mahakaleshwar Temple), Wikipedia (Mahakaleshwar Jyotirlinga), अमर उजाला 30 अक्टूबर 2024, पत्रिका 9 अगस्त 2025 और 16 अक्टूबर 2025, फ्री प्रेस जर्नल 5 नवंबर 2021, Business Standard में ANI रिपोर्ट 25 अक्टूबर 2022, The Week 25 मार्च 2024, पंचांग गणना (Drik Panchang)। मुख्य फोटो साभार Wikimedia Commons / Ashverse, CC BY-SA 4.0।
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