पशुपालकों का दुगना हो रहा व्यापार, कुर्बानी के लिए 75 हजार तक के बिक रहे बकरे,
पाबंदियों के साथ अंजुमन इस्लामिया कमेटी ने जारी की एडवाइजरी
,बालाघाट।अल्लाह के पैगंबर हजरत इब्राहिम और हजरत इस्माइल अलैह सलाम की याद में मनाया जाने वाला ईद उल अजहा का पर्व गुरुवार 28 मई को बालाघाट जिले सहित संपूर्ण देश में मुस्लिम धर्मावलंबियों द्वारा पूर्ण अकीदत के साथ मनाया जायेगा।कुर्बानी के इस ख़ास पर्व ईद उल अजहा को लेकर नगर मुख्यालय सहित पूरे जिले में मुस्लिम धर्मालंबियों द्वारा पर्व विशेष की तैयारिया पुर्ण कर ली गई है।जहा इस पर्व पर घर- घर बकरों की कुर्बानी की जायेगी।जिसके गोश्त को गरीबो रिश्तेदारो में बाटा जाएगा। इस पर्व पर अदा की जाने वाली विशेष नमाज, पुलिस लाइन स्थित ईदगाह में सुबहा 7 बजे सामुहिक रूप से अदा की जाएगी।तो वही बुजुर्गों के लिए वार्ड नं 10 रजा नगर स्थित जामिया नूरिया मदरसे में 7 :45 बजे नमाज होंगी। जिसको लेकर अंजुमन इस्लामिया कमेटी द्वारा टाईम टेबल के साथ ही एडवाइजरी भी जारी की गई है।इस पर्व को लेकर मुस्लिम बहुल इलाकों में तमाम तैयारियां पूर्ण कर ली गई है वहीं ईद पर्व को लेकर प्रशासनिक निर्देशों के तहत जरूरी एहतिहात बरतने की अपील शहर काजी मौलाना अब्दुल हबीब नूरी, अंजुमन इस्लामिया कमेटी सदर हाजी फारुख शेख, के साथ ही अंजुमन इस्लामिया कमेटी के अन्य पदाधिकारियों सदस्यों द्वारा की गई है।
पशुपालकों की रोजाना हो रही ईद, 75000 तक के बिक रहे बकरे
मुस्लिम समाज द्वारा मनाए जाने वाले इस ईद उल अजहा के त्यौहार में अभी 6 दिन शेष है, लेकिन इस त्यौहार के पूर्व ही पशुपालक किसानों की ईद रोजाना हो रही है।जहां इस पर्व से सबसे ज्यादा फायदा पशु पालक किसानों को रहा है।जिनकी आय में पर्व विशेष के चलते चौगुनी वृद्धि देखी जा रही है।अमूमन जिन बकरों की कीमत 10 से 15 हजार रु के बीच होती है वही बकरे ईद उल अजहा के मौके पर चौगुनी कीमत में पशुपालक किसान बेच रहे हैं और ईद के इस खास मौके पर खरीदार भी कीमत की परवाह किए बगैर ही उन्हें बढ़ी हुई कीमतों पर खरीद रहे हैं।जिसका एक नजारा इन दिनों बैहर रोड़ स्थित वार्ड नं 10 रजा नगर में रोजाना ही देखने को मिल रहा है। जहां ग्रामीण क्षेत्र के किसान रोजाना कुर्बानी के लिए बकरा बकरी लाकर बढ़ी हुई कीमतों पर उसे बेच रहे हैं।जहां न्यूनतम 20 हजार रु से अधिकतम 75 हजार रुपए तक के बकरों की खरीदारी मुस्लिम धर्मावलंबियों द्वारा की जा रही है।जिसका सीधा फायदा किसानों को मिल रहा है।तो वही पर्व विशेष पर कुर्बानी के लिए लोग ग्रामीण अंचलों में जाकर भी कुर्बानी के लिए बकरों की खरीदी करते नजर आ रहे हैं।
इसलिए दी जाती है कुर्बानी
धार्मिक मान्यतानुसार के अनुसार ईद उल अजहा का पर्व अल्लाह के पैगंबर हजरत इब्राहिम और हजरत इस्माईल की याद में मनाया जाता है। नबी इब्राहिम का पूरा जीवन अल्लाह की परीक्षा में ही गुजरा, काफी लंबे समय से अल्लाह के नबी इब्राहिम को एक पुत्र की प्राप्ति हुई थी। जिसका उन्होंने प्यार से नाम इस्माईल रखा था। जिससे वह अल्लाह के बाद बेपनाह प्यार करते थे ।अल्लाह के नबी इब्राहिम जानते थे कि अल्लाह के बाद उनकी सबकी कीमती चीज उनका पुत्र इस्माईल है, जो अल्लाह के कहे अनुसार अपने पुत्र को अल्लाह की राह में कुर्बान करने तैयार हो गये और ईदुल अजहा के दिन अल्लाह के नबी इब्राहिम अपने अजीज पुत्र इस्माईल को कुर्बान करने कुर्बानी स्थल मीना ले गये। जहां उन्होंने अपने बेटे की कुर्बानी देने के लिए उसकी आंख और अपनी आंख में पट्टी बांध दी, ताकि कुर्बानी का यह दृश्य देखकर दोनो का ईरादा न बदले। जैसे ही हजरत इब्राहिम ने अपने पुत्र के गले पर छुरी चलाई और जब अपनी आंख से पट्टी खोली तो देखा कि कुर्बानी स्थल पर एक दुंबा( भेड़) पड़ा था और पुत्र इस्माईल पास ही खड़े मुस्करा रहे थे। जिसे याद करने के लिए प्रतिवर्ष मुस्लिम धर्मावलंबी ईदुल अजहा पर्व पर अपनी हैसियत के हिसाब से अल्लाह की राह में, अल्लाह की रजा के लिए कुर्बानी पेश करते है।यह सिलसिला 3 दिनों तक चलता है।जिसमे कुर्बानी का गोश्त रिस्तेदारो सहित खास तौर पर गरीबो, यतीमो व बेसहारा लोगो मे तक़सीम किया जाता है ताकि वो भी आज के दिन ईद की इस खुशियो में शामिल हो सके।
सोशल मीडिया पर बधाई का दौर जारी
ईद उल अज़हा के इस पर्व को लेकर पिछले चार-पांच दिनों से सोशल मीडिया पर बधाई देने का दौर बदस्तूर जारी है जहां लोग अपने रिश्तेदार सगे संबंधी दोस्तों सहित जान पहचान वालों को ईद उल अजहा की मुबारकबाद प्रेषित कर रहे हैं। इस पर्व विशेष को लेकर सोशल मीडिया के व्हाट्सएप प्लेटफार्म का सबसे ज्यादा उपयोग किया जा रहा है वही व्हाट्सएप के अलावा फेसबुक, टि्वटर, इंस्टाग्राम, जीमेल, ईमेल, टेक्स्ट मैसेज सहित अन्य प्रकार के प्लेटफार्म का उपयोग कर लोग ईद उल अजहा से जुड़े फोटो, वीडियो, हदीस ,टैक्स मैसेज सहित पर्व से जुड़ी विभिन्न जानकारियां एक दूसरे के साथ साझा कर रहे हैं।वहीं इस पर्व कि एक दूसरे को बधाई दे रहे हैं साथ ही सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक मैसेज फोटो वीडियो टैक्स आदि ना भेजने की जानकारी भी जमकर फारवर्ड की जा रही है। कुल मिलाकर कहा जाए तो इस पर्व को मनाने के लिए लोगों में खासा उत्साह देखा जा रहा है।
मुस्लिम बहुल इलाकों की बढ़ी रौनके
ईद उल अजहा के इस प्रमुख पर्व को लेकर मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में इन दिनों खासी रौनक देखी जा रही है। जहां घरो-घर कुर्बानी को लेकर तैयारियां पूर्ण कर ली गई है। जहां घरों की साफ-सफाई कर रंग रोगन लगाकर विशेष रुप से घरों को सजाने का कार्य पूर्ण कर लिया गया है।वही कुर्बानी को लेकर तमाम तरह की तैयारियां देखी जा रही है। इस पर्व को लेकर सबसे ज्यादा उत्साह छोटे बच्चों में देखा जा रहा है जो ईद उल अजहा के खास मौके पर फर्ज और वाजिब नमाज अदा करने, कुर्बानी का गोश्त गरीबों में तक्सीम करने, नए कपड़े पहनने और तरह-तरह के पकवानों का सेवन कर विभिन्न धार्मिक व मनोरंजक जगहों में जाकर सैर सपाटा करने को लेकर उत्साहित नजर आ रहे हैं।जिसकी योजना भी बच्चों ने अपने परिवार के साथ मिलकर बना ली है। अब पूरे मुस्लिम समाज को गुरुवार की सुबह का इंतजार है। क्योंकि सुबह होते ही ईद उल अज़हा का पर्व शुरू हो जाएगा जो तीन दिनों तक जारी रहेगा।
अंजुमन इस्लामिया कमेटी ने जारी की एडवाइजरी, दिए दिशा-निर्देश
आगामी ईद-उल-अजहा (बकरीद) पर्व को शांतिपूर्ण, स्वच्छ और सौहार्दपूर्ण वातावरण में मनाने के उद्देश्य से अंजुमन इस्लामिया कमेटी बालाघाट द्वारा शहर के मुस्लिम समाज के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश एवं नमाज के समय की आधिकारिक सूचना जारी की गई है। जामा मस्जिद बालाघाट में शहर के सभी सदर एवं इमाम हजरात की बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया।जारी एडवाइजरी के अनुसार 28 मई गुरुवार को ईद-उल-अजहा की नमाज शहर में दो स्थानों पर अदा की जाएगी। पहली नमाज ईदगाह (पुलिस लाइन ग्राउंड) में सुबह 7 बजे अदा होगी, जबकि दूसरी नमाज मस्जिद आला हजरत जामेआ नूरिया में सुबह 7:45 बजे आयोजित की जाएगी। अंजुमन कमेटी ने समाजजनों से तय समय पर नमाज स्थल पहुंचने की अपील की है।इसके साथ ही कमेटी ने कुर्बानी को लेकर विशेष सावधानी और सामाजिक जिम्मेदारी निभाने का आग्रह किया है। जारी दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि कुर्बानी अपने बंद आंगन में की जाए तथा गैर मुस्लिम क्षेत्रों की सड़कों या सार्वजनिक स्थानों पर कुर्बानी से बचा जाए। इसके अलावा कुर्बानी के वीडियो, फोटो और ऑडियो सोशल मीडिया पर साझा न करने की भी अपील की गई है, ताकि किसी प्रकार की सामाजिक असहजता उत्पन्न न हो।कमेटी ने साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने की सलाह देते हुए कुर्बानी के बाद पशु अवशेषों का उचित निस्तारण करने, अनुपयोगी वस्तुओं को सुरक्षित दफनाने की व्यवस्था अपनाने को कहा गया है।वही उन्होंने कुर्बानी की खाल 28 मई से 30 मई तक सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक अंजुमन शादी हॉल में जमा कराकर रसीद लेने को कहा है।कमेटी ने सभी नागरिकों से आपसी भाईचारे, अनुशासन और सामाजिक सद्भाव बनाए रखते हुए ईद-उल-अजहा पर्व मनाने की अपील की है।

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