आलोट (रतलाम)। प्रदेश सरकार जहां पारंपरिक जल स्रोतों को बचाने और पुनर्जीवित करने के लिए लगातार अभियान चला रही है, वहीं आलोट नगर के सबसे व्यस्त राजेंद्र चौक में स्थित वर्षों पुरानी शासकीय सार्वजनिक कुई को लेकर गंभीर विवाद सामने आया है।

एक नागरिक ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया है कि सार्वजनिक उपयोग की इस कुई को मुरम, पत्थर और मलबा डालकर भर दिया गया है तथा अब उस पर सीमेंट-कंक्रीट निर्माण कर स्थायी कब्जा करने की तैयारी की जा रही है। शिकायत के बाद मामला प्रशासन तक पहुंच गया है।

आलोट निवासी दिनेश कुवाड़िया ने 17 जुलाई को एसडीएम को दिए आवेदन में कहा है कि राजेंद्र चौक स्थित यह कुई वर्षों से सार्वजनिक जल स्रोत एवं शासकीय भूमि का हिस्सा रही है।

आरोप है कि उक्त स्थल को योजनाबद्ध तरीके से भरकर उसका स्वरूप समाप्त करने का प्रयास किया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो सार्वजनिक संपत्ति पर अतिक्रमण की ऐसी घटनाएं भविष्य में भी बढ़ सकती हैं।

आवेदन में राजस्व विभाग एवं नगर परिषद की संयुक्त टीम से तत्काल मौके का निरीक्षण कराने की मांग की गई है। साथ ही अनुरोध किया गया है कि जांच पूरी होने तक किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य पर रोक लगाई जाए।

शिकायतकर्ता ने यह भी मांग की है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्ति से ही मुरम, पत्थर एवं मलबा हटवाकर शासकीय कुई की दोबारा खुदाई कर उसे उसके मूल स्वरूप में पुनर्जीवित कराया जाए और सार्वजनिक उपयोग के लिए सुरक्षित रखा जाए।

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि प्रदेश सरकार जल संरक्षण को लेकर कुई, कुओं और बावड़ियों के संरक्षण तथा पुनर्जीवन पर विशेष बल दे रही है। ऐसे में यदि नगर के बीचों-बीच स्थित किसी सार्वजनिक जल स्रोत को समाप्त कर उस पर निर्माण किया जाता है, तो यह केवल अतिक्रमण का मामला नहीं बल्कि जल संरक्षण, सार्वजनिक धरोहर और शासकीय संपत्ति की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय भी है।

मामले की शिकायत की प्रतिलिपि मुख्य नगर पालिका अधिकारी, नगर परिषद आलोट को भी भेजी गई है। अब लोगों की निगाहें प्रशासन पर हैं कि वह मौके का निरीक्षण कर शिकायत की निष्पक्ष जांच कराता है या नहीं। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह कार्रवाई केवल एक अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि एक ऐतिहासिक सार्वजनिक जल स्रोत को पुनर्जीवित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आवेदन में लगाए गए आरोपों की पुष्टि प्रशासनिक जांच के बाद ही हो सकेगी।