पत्रकार पर हमला-लूट के आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं, जम्प ने जताया आक्रोश

एसपी के नाम एएसपी को सौंपा ज्ञापन, बोले- पत्रकारों को धमकाने वालों पर हो सख्त कार्रवाई, एएसपी ने कोतवाली पुलिस को दिए गिरफ्तारी के निर्देश

टीकमगढ़। पत्रकारों के साथ मारपीट, लूट और धमकियों के मामलों में पुलिस कार्रवाई की गति पर सवाल उठाते हुए मंगलवार को जर्नलिस्ट यूनियन ऑफ मध्यप्रदेश (जम्प) संगठन ने पुलिस अधीक्षक के नाम अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा। संगठन ने साफ शब्दों में कहा कि यदि पत्रकारों पर हमला करने और उन्हें दबाव में लेकर समझौता कराने की कोशिश करने वालों के खिलाफ समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो इससे अपराधियों के हौसले बढ़ेंगे और पत्रकारों में असुरक्षा की भावना पैदा होगी। ज्ञापन में पत्रकार साथी लोकेन्द्र सिंह परमार के साथ हुई कथित मारपीट, लूट और धमकी के मामले को प्रमुखता से उठाया गया। संगठन के अनुसार इस मामले में ऋषि जड़िया, शिवम जड़िया, साहिल हरदसानी आदि के खिलाफ शहर कोतवाली में एफआईआर क्रमांक 471, दिनांक 03 अगस्त 2026 दर्ज की गई थी। संगठन का आरोप है कि एफआईआर दर्ज होने के बावजूद अब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है। वहीं पत्रकार और उसके परिजनों पर लगातार राजीनामा करने के लिए दबाव और धमकी दिए जाने की बात भी ज्ञापन में कही गई है। जम्प पदाधिकारियों ने कहा कि किसी पत्रकार के साथ आपराधिक घटना होने के बाद यदि आरोपियों की गिरफ्तारी में लगातार देरी होती है और पीड़ित पक्ष पर समझौते का दबाव बनाया जाता है तो यह कानून व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। संगठन ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोपियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाए तथा पत्रकार को सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।

दूसरे मामले में भी कार्रवाई की मांग

ज्ञापन में पत्रकार शेख हनीफ, निवासी बम्हौरी कलां से जुड़े मामले को भी उठाया गया। संगठन के मुताबिक शेख हनीफ के परिजनों के साथ अंकुश अहिरवार पिता कमलेश अहिरवार द्वारा कथित रूप से गाली-गलौज की गई थी। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि पूर्व में अंकुश अहिरवार द्वारा कथित चिटफंड कंपनी में शेख हनीफ से राशि जमा कराई गई थी, जिसकी वापसी को लेकर विवाद सामने आया। इस संबंध में बम्हौरी कलां थाने में शिकायत किए जाने के बाद संगठन ने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया के माध्यम से पत्रकार को गलत प्रकरण में फंसाने की कथित साजिश की जा रही है और इसके लिए अन्य लोगों का सहयोग लिया जा रहा है। संगठन ने पुलिस से पूरे मामले की जांच कर सोशल मीडिया के माध्यम से धमकी, बदनाम करने या झूठे प्रकरण में फंसाने के प्रयास की भी जांच कराने की मांग की।

एएसपी ने मामले को गंभीर माना
ज्ञापन लेने के बाद अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संगठन के प्रतिनिधियों को आश्वासन दिया कि शहर कोतवाली थाना प्रभारी को आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि लूट के मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस को निर्देशित किया जा रहा है और जल्द कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। वहीं दूसरे मामले में चिटफंड कंपनी के कथित एजेंट के खिलाफ मामला दर्ज करने के निर्देश दिए जाने की बात भी संगठन को बताई गई।

अभय मौर्य बोले- पत्रकारों को दबाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं

जम्प के जिलाध्यक्ष अभय मौर्य ने कहा कि पत्रकार समाज में होने वाली घटनाओं को सामने लाने का काम करते हैं, लेकिन यदि पत्रकारों के साथ ही मारपीट, लूट, धमकी और दबाव की घटनाएं होंगी तो यह बेहद गंभीर स्थिति है। उन्होंने कहा कि पत्रकार लोकेन्द्र सिंह परमार के मामले में एफआईआर दर्ज होने के बावजूद गिरफ्तारी नहीं होना और उसके बाद राजीनामे के लिए कथित दबाव बनाया जाना चिंता का विषय है। मौर्य ने कहा कि “पत्रकारों को डराकर, धमकाकर या दबाव बनाकर उनकी आवाज दबाने की कोशिश किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी। पुलिस को निष्पक्षता के साथ कार्रवाई करते हुए दोषियों के खिलाफ कानून के मुताबिक सख्त कदम उठाना चाहिए। पत्रकारों की सुरक्षा केवल पत्रकारों का नहीं, बल्कि लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का भी सवाल है। जम्प ने चेतावनी दी कि यदि दोनों मामलों में शीघ्र और प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन आगे वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष मामला उठाने के साथ आंदोलनात्मक कदम उठाने पर भी विचार करेगा। ज्ञापन सौंपने वालों में जिला अध्यक्ष अभय मोर्य, सत्तार खान बाबा, पुष्पेंद्र सिंह, समीर खान, अनुराग दीक्षित, जमील खान, विकास राय, शेख हनीफ, मोहसिन अहमद, उवेश खान, सोनू विश्वकर्मा, पुष्पेंद्र द्विवेदी,  सहित संगठन के अन्य पदाधिकारी एवं पत्रकार मौजूद रहे।