आमला। देशभर में स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए चलाए जा रहे Swachh Bharat Mission के तहत नगर पालिकाओं को हर साल करोड़ों रुपये का बजट आवंटित किया जाता है। इसका उद्देश्य शहरों और वार्डों को साफ-सुथरा, स्वच्छ और स्वस्थ बनाना है। लेकिन आमला नगर पालिका के वार्ड क्रमांक 1 में जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है।

वार्ड क्रमांक 1 स्थित मंगल भवन के पास पिछले कई दिनों से कचरे का विशाल ढेर जमा है। यहां न तो नियमित सफाई हो रही है और न ही कचरे का समय पर उठाव किया जा रहा है। हालत यह है कि कचरे का यह ढेर अब “मिनी डंपिंग जोन” का रूप ले चुका है।

*स्थानीय लोगों की परेशानी बढ़ी*

क्षेत्र के रहवासियों का कहना है कि इस गंदगी के कारण आसपास बदबू फैली रहती है, जिससे सांस लेना तक मुश्किल हो जाता है। मच्छर, मक्खियों और आवारा जानवरों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर इसका सीधा असर पड़ रहा है।

*शिकायतें बेअसर, जिम्मेदार बेपरवाह*

स्थानीय नागरिकों ने कई बार नगर पालिका में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इससे यह साफ जाहिर होता है कि जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर समस्या को नजरअंदाज कर रहे हैं।

*करोड़ों का बजट आखिर जा कहां रहा है?*

जब सरकार स्वच्छता के नाम पर भारी बजट खर्च कर रही है, तो ऐसे हालात कई गंभीर सवाल खड़े करते हैं—

क्या सफाई व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित है?

क्या बजट का सही उपयोग हो रहा है?

या फिर जिम्मेदारों की लापरवाही से योजनाएं दम तोड़ रही हैं?

*जनता की मांग*

क्षेत्रवासियों ने नगर पालिका प्रशासन से तत्काल कचरे का उठाव कराने, नियमित सफाई व्यवस्था लागू करने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।