आमला। नगर की आंगनबाड़ियों की बदहाल स्थिति को लेकर अब जनप्रतिनिधियों ने भी आवाज उठानी शुरू कर दी है। वार्ड क्रमांक 9 की पार्षद एवं युवक कांग्रेस जिला महासचिव कुमारी खुशबू विजय अतुलकर ने अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) शैलेन्द्र बड़ोनिया से नगर की समस्त आंगनबाड़ियों का निरीक्षण कर उनके कायाकल्प की मांग की है।

पार्षद अतुलकर ने व्हाट्सएप के माध्यम से एसडीएम को संदेश भेजते हुए उनके द्वारा किए जा रहे सराहनीय कार्यों के लिए धन्यवाद भी दिया, साथ ही नगर की आंगनबाड़ियों की जमीनी हकीकत से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों से आंगनबाड़ियों की स्थिति सुधारने के लिए लगातार शिकायतें की जा रही हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

उन्होंने विशेष रूप से वार्ड क्रमांक 9 की आंगनबाड़ी का उल्लेख करते हुए बताया कि भवन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है। बारिश के दौरान छत से पानी टपकता है, जिससे बच्चे बैठ नहीं पाते और आंगनबाड़ी सहायिका को भी काम करने में भारी परेशानी होती है। दीवारों और छत का प्लास्टर लगातार गिर रहा है, जिससे कभी भी दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

पार्षद ने यह भी बताया कि आंगनबाड़ी में बिजली मीटर तो लगा है, लेकिन अब तक कनेक्शन नहीं दिया गया है। पीने के पानी की भी कोई व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण सहायिका को रोजाना आसपास के घरों से पानी लाना पड़ता है। यह स्थिति बच्चों और स्टाफ दोनों के लिए बेहद असुविधाजनक बनी हुई है।

उन्होंने एसडीएम से मांग की है कि नगर की सभी आंगनबाड़ियों में बिजली एवं नल कनेक्शन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही प्रत्येक केंद्र में सिंटेक्स टंकी लगाकर पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। इसके अलावा लाइट, आरओ, कूलर, पंखे जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने और अभिभावकों के बैठने की व्यवस्था करने की भी मांग रखी गई है।

पार्षद अतुलकर ने आंगनबाड़ियों की रंगाई-पुताई करवाने और उन्हें आकर्षक एवं सुरक्षित बनाने का भी सुझाव दिया। साथ ही उन्होंने यह भी प्रस्ताव रखा कि 15 अगस्त और 26 जनवरी जैसे राष्ट्रीय पर्वों पर प्रत्येक आंगनबाड़ी में ध्वजारोहण कर बच्चों को देशभक्ति और तिरंगे के प्रति जागरूक किया जाए।

नगर में आंगनबाड़ियों की इस स्थिति को लेकर आम नागरिकों में भी चिंता बनी हुई है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मांग पर कितना जल्दी संज्ञान लेकर सुधारात्मक कदम उठाता है।

— आंगनबाड़ियों का कायाकल्प न केवल बच्चों के बेहतर भविष्य से जुड़ा है, बल्कि यह समाज के समग्र विकास की भी आधारशिला है।