बालाघाट स्थित कृषि महाविद्यालय में पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए एक विशेष पौधरोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दो दिवसीय अभियान का मुख्य उद्देश्य न केवल पर्यावरण का संरक्षण करना है, बल्कि औषधीय पौधों के संवर्धन को बढ़ावा देना भी है। कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय के उत्साही छात्र-छात्राओं ने परिसर में 100 से अधिक 'सदाबहार' (कैथरेंथस रोजियस) के औषधीय पौधों का रोपण कर प्रकृति के प्रति अपना समर्पण व्यक्त किया।

कार्यक्रम में गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति

यह पौधरोपण कार्यक्रम महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. घनश्याम देशमुख के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक और विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में डॉ. एन.के. बिसेन, डॉ. शरद बिसेन, डॉ. सुनील रजक, डॉ. पूजा गोस्वामी, डॉ. रमेश अमूले, डॉ. अमिता शर्मा, डॉ. प्रतिभा बिसेन और श्री कमलेश्वर गौतम ने विशेष रूप से शिरकत की। इन सभी ने विद्यार्थियों के साथ मिलकर पौधों का रोपण किया और उनके उचित संरक्षण का संकल्प लिया।

अधिष्ठाता का आह्वान: पर्यावरण और स्वास्थ्य का संगम

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अधिष्ठाता डॉ. घनश्याम देशमुख ने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने उपस्थित विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे इस वर्षा ऋतु में अधिक से अधिक पौधरोपण करें। डॉ. देशमुख ने औषधीय पौधों की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा:

  • औषधीय पौधों का संरक्षण मानव स्वास्थ्य की दृष्टि से अनिवार्य है।

  • ये पौधे जैव विविधता को संतुलित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

  • विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना इस आयोजन का मुख्य लक्ष्य है।

अभियान की सफलता में विशेष भूमिका

इस पौधारोपण अभियान को सफल बनाने में डॉ. सुनील रजक एवं डॉ. पूजा गोस्वामी की विशेष भूमिका रही। उन्होंने न केवल कार्यक्रम का सफल संचालन किया, बल्कि विद्यार्थियों को इन औषधीय पौधों के औषधीय गुणों और उनकी देखभाल करने की वैज्ञानिक विधियों के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को यह भी समझाया गया कि कैसे सदाबहार जैसे औषधीय पौधे हमारे दैनिक जीवन में स्वास्थ्य लाभ के साथ-साथ पर्यावरण को शुद्ध रखने में मददगार हो सकते हैं।

यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना, जहाँ उन्होंने सीखा कि शिक्षा के साथ-साथ प्रकृति के प्रति हमारा जुड़ाव और जिम्मेदारी कितनी महत्वपूर्ण है। इस प्रकार के आयोजन न केवल परिसर को हरा-भरा बनाएंगे, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ और सुरक्षित पर्यावरण की नींव भी रखेंगे।

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