आमला/बैतूल। विकास के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च कर बनाई गई बैतूल से बासखापा तक लगभग 72 किलोमीटर लंबी और करीब 125 करोड़ रुपए लागत की सीसी सड़क पहली ही बारिश में सवालों के घेरे में आ गई है। बरसाली के समीप नवनिर्मित पुलिया के दोनों ओर किया गया अर्थवर्क (मिट्टी भराव) तेज बारिश के बाद बह गया। करोड़ों रुपए की इस परियोजना में पहली ही बारिश के दौरान सामने आई खामियों ने निर्माण एजेंसी, तकनीकी अधिकारियों और गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण के दौरान ही गुणवत्ता को लेकर कई बार आपत्तियां उठाई गई थीं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने इन शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया। अब पहली ही बारिश में पुलिया के आसपास की मिट्टी बहने से लोगों की आशंकाएं सही साबित होती दिखाई दे रही हैं।
*विवादों में घिरा रहा निर्माण, जल्दबाजी में पूरा किया गया काम*
ग्रामीणों के अनुसार बरसाली क्षेत्र में भूमि विवाद के कारण सड़क निर्माण लंबे समय तक अटका रहा। दो स्थानों पर महीनों तक कार्य बंद पड़ा रहा। विवाद समाप्त होने के बाद निर्माण एजेंसी ने तेजी से काम पूरा किया, लेकिन इस जल्दबाजी में गुणवत्ता की अनदेखी की गई। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार परत-दर-परत मिट्टी का भराव और पर्याप्त कम्पेक्शन नहीं किया गया, जिसके कारण पहली ही बारिश में अर्थवर्क बह गया।
*पहली बारिश में खुली गुणवत्ता की पोल*
बरसाली के पास पुलिया के दोनों ओर और नीचे किया गया मिट्टी भराव तेज बारिश के पानी का दबाव भी नहीं झेल पाया। देखते ही देखते बड़ी मात्रा में मिट्टी बह गई, जिससे पुलिया के किनारों पर कटाव दिखाई देने लगा। ग्रामीणों का कहना है कि यदि अभी से यह स्थिति है तो लगातार बारिश के दौरान पुलिया की नींव और सड़क दोनों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।
*दुर्घटना का भी बढ़ा खतरा*
ग्रामीणों का कहना है कि पुलिया के दोनों ओर मिट्टी बहने से सड़क के किनारे कमजोर हो गए हैं। यदि समय रहते मरम्मत नहीं की गई तो भारी वाहन गुजरने के दौरान सड़क धंस सकती है या पुलिया के एप्रोच हिस्से को नुकसान पहुंच सकता है। इससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। लोगों ने प्रशासन से तत्काल सुरक्षा के इंतजाम करने और स्थायी मरम्मत कराने की मांग की है।
*ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप*
ग्रामीण गिरधर यादव, साहबलाल उड्के और नरेंद्र बचले का कहना है कि करोड़ों रुपए की लागत से बनी सड़क का यह हाल पहली ही बारिश में हो जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उनका आरोप है कि यदि निर्माण कार्य पूरी गुणवत्ता और तकनीकी मानकों के अनुरूप किया गया होता तो पहली बारिश में इस प्रकार अर्थवर्क नहीं बहता। उन्होंने पूरे निर्माण कार्य की स्वतंत्र तकनीकी जांच कर दोषी अधिकारियों, इंजीनियरों और ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि केवल बरसाली ही नहीं, बल्कि पूरे बैतूल–बासखापा मार्ग का तकनीकी परीक्षण कराया जाना चाहिए ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे से बचा जा सके। उनका कहना है कि करोड़ों रुपए जनता के टैक्स के हैं, इसलिए निर्माण की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता।
*करोड़ों की परियोजना पर उठे जवाबदेही के सवाल*
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब सड़क निर्माण के दौरान विभागीय इंजीनियरों द्वारा लगातार निरीक्षण किए जाने का दावा किया जाता है, तब पहली ही बारिश में ऐसी स्थिति आखिर कैसे बन गई? यदि निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप हुआ था तो अर्थवर्क बहने की नौबत क्यों आई? ग्रामीणों ने मांग की है कि निर्माण कार्य की थर्ड पार्टी तकनीकी जांच कराई जाए और यदि लापरवाही सामने आए तो संबंधित अधिकारियों और निर्माण एजेंसी पर सख्त कार्रवाई की जाए।
*प्रशासन ने दिए जांच के निर्देश*
एसडीएम आमला शैलेंद्र बड़ोनिया ने कहा कि बरसाली के समीप सड़क और पुलिया निर्माण कार्य की शिकायत प्राप्त हुई है। संबंधित विभाग को जांच के निर्देश दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
वहीं एसडीओ मुलताई सुनील सोलंकी ने बताया कि बासखापा से हसलपुर तक का सड़क निर्माण कार्य आमला अनुभाग के अंतर्गत आता है, जबकि बरसाली क्षेत्र दूसरे डिवीजन के अधिकार क्षेत्र में है। इसलिए संबंधित डिवीजन द्वारा मामले की जांच एवं आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
*ग्रामीणों की प्रमुख मांगें*
पूरे 72 किलोमीटर सड़क निर्माण की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए।
पुलिया और सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्से की तत्काल मरम्मत कराई जाए।
निर्माण एजेंसी, ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
भविष्य में ऐसी लापरवाही रोकने के लिए थर्ड पार्टी गुणवत्ता परीक्षण अनिवार्य किया जाए।
बरसात के दौरान दुर्घटना रोकने के लिए प्रभावित स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
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