आमला। नगर के वन विभाग कार्यालय के समीप वर्षों से संचालित छोटी-छोटी दुकानों पर नगर पालिका की प्रस्तावित कार्रवाई ने गरीब व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है। नगर पालिका द्वारा इन दुकानों को हटाने की तैयारी की जा रही है, जिसके विरोध में दुकानदार खुलकर सामने आ गए हैं। उनका कहना है कि यदि बिना वैकल्पिक व्यवस्था के दुकानें हटाई गईं तो दर्जनों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।

दुकानदारों का कहना है कि वे वर्षों से इसी स्थान पर छोटे-छोटे व्यवसाय के माध्यम से अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। इन दुकानों से होने वाली आय ही उनके परिवार की जीविका का एकमात्र साधन है। ऐसे में बिना पुनर्वास के दुकानें हटाना गरीब और मेहनतकश परिवारों के साथ अन्याय होगा।

व्यापारियों ने आरोप लगाया कि नगर पालिका अध्यक्ष एवं मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) द्वारा दुकानें हटाने की तैयारी तो की जा रही है, लेकिन प्रभावित दुकानदारों के पुनर्वास अथवा वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने को लेकर कोई ठोस योजना सामने नहीं आई है। उनका कहना है कि कई बार इस संबंध में मांग रखने के बावजूद अब तक कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया।

दुकानदारों ने कहा कि वे शहर के विकास और सौंदर्यीकरण के विरोधी नहीं हैं, बल्कि चाहते हैं कि नगर का विकास योजनाबद्ध तरीके से हो। लेकिन विकास के नाम पर गरीबों की रोजी-रोटी छीनना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। उनका कहना है कि यदि नगर पालिका वास्तव में शहर को व्यवस्थित करना चाहती है तो पहले सभी प्रभावित व्यापारियों को वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराए, उसके बाद ही कार्रवाई करे।

व्यापारियों ने नगर पालिका प्रशासन से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग करते हुए कहा कि अध्यक्ष, सीएमओ और जनप्रतिनिधि सभी प्रभावित दुकानदारों के साथ बैठक कर ऐसा समाधान निकालें जिससे शहर का विकास भी प्रभावित न हो और किसी गरीब परिवार की आजीविका भी न छिने।

दुकानदारों ने चेतावनी दी है कि यदि बिना पुनर्वास के दुकानें हटाने की कार्रवाई की गई तो सभी व्यापारी एकजुट होकर लोकतांत्रिक तरीके से धरना-प्रदर्शन, ज्ञापन और आंदोलन करेंगे। उनका कहना है कि वे अपने रोजगार और परिवारों के भविष्य की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करने को तैयार हैं। उन्होंने प्रशासन से संवेदनशीलता दिखाते हुए गरीब व्यापारियों के हितों का संरक्षण करने की अपील की है।

*प्रशासन का पक्ष जानने का किया गया प्रयास*

समाचार प्रकाशित करने से पूर्व नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) नितिन बिंजवे का पक्ष जानने के लिए उनके मोबाइल नंबर पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। इस कारण इस मामले में उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका।

स्थानीय पत्रकारों का यह भी कहना है कि जनहित के मुद्दों पर जानकारी लेने के लिए संपर्क किए जाने पर अक्सर सीएमओ फोन रिसीव नहीं करते, जिससे प्रशासन का पक्ष समय पर सामने नहीं आ पाता। यदि इस संबंध में नगर पालिका प्रशासन या सीएमओ की कोई प्रतिक्रिया प्राप्त होती है, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।