आमला/बोरदेही। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत गरीब और पात्र हितग्राहियों को मिलने वाले सरकारी राशन में कथित गड़बड़ी और 10 लाख 30 हजार रुपये से अधिक मूल्य के खाद्यान्न के गबन के मामले में बोरदेही पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सेल्समैन गोवर्धन पवार को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। न्यायालय ने आरोपी को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया है। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में पीडीएस व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।
मिली जानकारी के अनुसार बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति छिपन्या पिपरिया में पदस्थ सेल्समैन गोवर्धन पवार के जिम्मे ग्राम नरेरा और छिपन्या पिपरिया की शासकीय उचित मूल्य दुकानों का संचालन था। पिछले कुछ समय से ग्रामीणों द्वारा राशन वितरण में अनियमितता, निर्धारित मात्रा से कम राशन देने तथा रिकॉर्ड में गड़बड़ी की शिकायतें लगातार की जा रही थीं। शिकायतों के आधार पर खाद्य विभाग ने विस्तृत जांच शुरू की।
जांच के दौरान स्टॉक रजिस्टर, वितरण पंजी तथा अन्य अभिलेखों का मिलान किया गया। जांच में लगभग 10 लाख 30 हजार रुपये मूल्य के खाद्यान्न के गबन की पुष्टि होने पर कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी धर्मदास दिवान ने बोरदेही थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत के आधार पर बोरदेही पुलिस ने आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 एवं भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 316(4) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू की। जांच में पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद सोमवार को आरोपी गोवर्धन पवार को गिरफ्तार कर लिया गया।
बोरदेही थाना प्रभारी राधेश्याम बट्टी ने बताया कि आरोपी को मंगलवार को आमला न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। उन्होंने बताया कि मामले की जांच अभी जारी है और यदि जांच में अन्य किसी व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
*गरीबों के अधिकारों से जुड़ा मामला*
सार्वजनिक वितरण प्रणाली सरकार की ऐसी व्यवस्था है, जिसके माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को रियायती दर पर खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है। ऐसे में राशन वितरण में किसी भी प्रकार की अनियमितता या गबन सीधे गरीब हितग्राहियों के अधिकारों पर चोट मानी जाती है। इस कारण खाद्य विभाग और पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई की।
*बचाव पक्ष ने अपील की बात कही*
आरोपी की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता राजेन्द्र उपाध्याय ने बताया कि न्यायालय के आदेश के विरुद्ध उच्च न्यायालय में अपील की जाएगी। उनका कहना है कि मामले के सभी तथ्यों को विधिक प्रक्रिया के तहत न्यायालय के समक्ष रखा जाएगा।
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