शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता और समानता लाने के उद्देश्य से बैतूल जिले में एक बेहद सराहनीय और अनूठी पहल की शुरुआत की गई है। 'शिक्षा संजीवनी अभियान' के माध्यम से जिले के दूरस्थ अंचलों में स्थित शासकीय प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं को पूरी तरह से सुदृढ़ करने की एक व्यापक मुहिम का श्रीगणेश किया गया है। इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें केवल सरकारी मशीनरी ही नहीं, बल्कि अशासकीय (प्राइवेट) विद्यालयों के सक्रिय सहयोग से शासकीय विद्यालयों के पुनरुत्थान की दिशा में ठोस कार्य किए जाएंगे।

इस महत्वपूर्ण योजना की रूपरेखा और इसके उद्देश्यों को स्पष्ट करते हुए बैतूल जिले के कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे ने रविवार को कलेक्ट्रेट सभा कक्ष में एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में जिले भर से आए अशासकीय विद्यालयों के प्राचार्य विशेष रूप से उपस्थित रहे, जिन्हें संबोधित करते हुए कलेक्टर ने शिक्षा के स्तर को सुधारने और संसाधनों की कमी को दूर करने के लिए सहयोगात्मक रुख अपनाने का आह्वान किया।

बेहतर और सुविधाजनक शैक्षणिक वातावरण का लक्ष्य

कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे ने बैठक को संबोधित करते हुए इस बात पर विशेष जोर दिया कि 'शिक्षा संजीवनी अभियान' का मूल उद्देश्य अशासकीय विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों की तर्ज पर ही शासकीय विद्यालयों के बच्चों को भी बेहतर, आधुनिक और सुविधाजनक शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना है। उन्होंने प्रशासनिक अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि बैतूल जिले के कई सुदूर और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में आज भी बुनियादी संसाधनों की भारी कमी बनी हुई है।

पर्याप्त संसाधनों के अभाव में ग्रामीण क्षेत्रों के इन नौनिहालों को वह शैक्षणिक माहौल नहीं मिल पाता, जिसके वे वास्तव में अधिकारी हैं। इसी खाई को पाटने और सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदलने के लिए अशासकीय विद्यालयों का सहयोग और सहभागिता अत्यधिक अपेक्षित है। कलेक्टर ने विश्वास जताया कि यदि समाज के सभी वर्ग और शैक्षणिक संस्थान मिलकर प्रयास करें, तो सरकारी स्कूलों की स्थिति में क्रांतिकारी बदलाव लाया जा सकता है।

अशासकीय विद्यालयों के प्राचार्यों से संसाधनों के सहभाजन की अपील

कलेक्टर डॉ. सोनवणे ने बैठक में उपस्थित सभी अशासकीय विद्यालयों के प्राचार्यों से व्यक्तिगत रूप से अनुरोध किया कि वे अपने संस्थानों में उपलब्ध सामान्य संसाधनों और सुविधाओं का आकलन करें। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक निजी संस्थान अपने यहां के अतिरिक्त या उपयोगी संसाधनों में से थोड़ा सा आवश्यक सहयोग इन दूरस्थ शासकीय विद्यालयों तक पहुंचा सके, तो वहां अध्ययनरत बच्चों के लिए बेहद प्रेरणादायक और उन्नत शैक्षणिक वातावरण तैयार किया जा सकता है।

जब सरकारी स्कूलों में बच्चों को बेहतर सामग्रियां, पुस्तकें, खेलकूद का सामान और अन्य बुनियादी सुविधाएं मिलेंगी, तो निश्चित रूप से उनकी शैक्षणिक गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा। कलेक्टर के इस आह्वान का उपस्थित प्राचार्यों पर गहरा प्रभाव पड़ा और उन्होंने इसे एक सामाजिक और नैतिक दायित्व के रूप में स्वीकार करने की सहमति जताई।

प्राचार्यों द्वारा स्वप्रेरित होकर एक-एक शासकीय विद्यालय गोद लेने की घोषणा

बैठक का सबसे प्रेरणादायक और सुखद पहलू यह रहा कि कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे की इस अनूठी पहल से प्रेरित होकर अशासकीय विद्यालयों के प्राचार्यों ने आगे बढ़कर एक ऐतिहासिक निर्णय लिया। प्राचार्यों ने स्वप्रेरित (Self-motivated) होकर यह इच्छा जताई कि वे व्यक्तिगत और संस्थागत रूप से कम से कम एक-एक शासकीय विद्यालय को गोद लेंगे।

प्राचार्यों ने आश्वासन दिया कि वे गोद लिए गए इन विद्यालयों का पूर्ण रूपेण पुनरुत्थान करने के लिए पूरी निष्ठा से प्रयास करेंगे। इसके तहत संबंधित गोद लिए गए विद्यालयों में बिजली, पानी, शिक्षण सामग्री, फर्नीचर और अन्य समस्त आवश्यक संसाधनों की आपूर्ति सुनिश्चित करने में पूरा सहयोग दिया जाएगा। निजी और शासकीय विद्यालयों के बीच इस प्रकार का यह समन्वय बैतूल जिले में शिक्षा के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत का संकेत दे रहा है।

करियर काउंसलिंग के माध्यम से छात्रों को मिलेगी नई दिशा

बैठक के दौरान केवल बुनियादी ढांचे और संसाधनों तक ही चर्चा सीमित नहीं रही, बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य और उनकी बौद्धिक क्षमता को निखारने पर भी विशेष मंथन किया गया। कुछ प्रगतिशील अशासकीय विद्यालयों के प्राचार्यों द्वारा यह प्रस्ताव रखा गया कि वे शासकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों की शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए अपने विद्यालयों के अनुभवी और कुशल शिक्षकों के माध्यम से विशेष करियर काउंसलिंग (Career Counselling) सत्र आयोजित करेंगे।

इस प्रकार की काउंसलिंग से शासकीय विद्यालयों के ग्रामीण और दूरस्थ अंचल के विद्यार्थियों को विभिन्न उच्च शैक्षणिक पाठ्यक्रमों, प्रतियोगी परीक्षाओं और भविष्य के करियर विकल्पों की सही और समय पर जानकारी मिल सकेगी। यह कदम ग्रामीण बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाने और उन्हें अपने जीवन का सही लक्ष्य चुनने में बेहद मददगार साबित होगा।

विकासखंड स्त्रोत समन्वयक (BRC) के माध्यम से सूचीबद्रीकरण की प्रक्रिया

बैठक के अंत में क्रियान्वयन को लेकर प्रशासनिक प्रक्रिया पर चर्चा की गई। कलेक्टर डॉ. सोनवणे ने सभी अशासकीय विद्यालयों के प्राचार्यों से अनुरोध किया कि वे अपने-अपने क्षेत्र के विकासखंड स्त्रोत समन्वयक (Bilingual Resource Coordinator / BRC) से तुरंत संपर्क स्थापित करें। प्राचार्यों से कहा गया कि वे शिक्षा संजीवनी अभियान के अंतर्गत अपने विद्यालय की ओर से जिस भी प्रकार का सहयोग (भौतिक, शैक्षणिक या तकनीकी) देना चाहते हैं, उसके लिए स्वयं को आधिकारिक रूप से सूचीबद्ध (Register) कराएं ताकि पारदर्शिता के साथ समय पर कार्य शुरू किया जा सके।

इस महत्वपूर्ण बैठक में प्रशासन के कई प्रमुख अधिकारी भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराते नजर आए। बैठक में सहायक कलेक्टर श्री पुष्पराज खोज, सहायक आयुक्त वत्सला शिवहरे, जिला शिक्षा अधिकारी पूनम बरकड़े, अन्य पिछड़ा वर्ग के सहायक संचालक श्री नरेन्द्र गौतम सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी एवं जिलेभर के प्रतिष्ठित अशासकीय विद्यालयों के प्राचार्य उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने इस अभियान को सफल बनाने के लिए पूर्ण सहयोग देने का संकल्प लिया।

निष्कर्ष: बैतूल में शिक्षा के समग्र विकास की मजबूत नींव

बैतूल जिले में आरंभ किया गया 'शिक्षा संजीवनी अभियान' महज एक प्रशासनिक योजना नहीं है, बल्कि यह समाज के सभी वर्गों को जोड़कर शिक्षा के अधिकार को सार्थक बनाने का एक महाअभियान है। कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे के नेतृत्व में प्रशासन और अशासकीय विद्यालयों के बीच बना यह सेतु आने वाले समय में जिले के दूरस्थ अंचलों के स्कूलों की कायापलट करने में मील का पत्थर साबित होगा। जब निजी क्षेत्र की दक्षता और सरकारी स्कूलों की पहुंच आपस में मिलेगी, तो निश्चित रूप से ग्रामीण बच्चों का भविष्य उज्जवल होगा और बैतूल जिला शिक्षा के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम करेगा।

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