आमला (बैतूल)। आमला तहसील में एक ही दिन में दो अलग-अलग स्थानों पर आग लगने से किसानों को भारी नुकसान हुआ है। तिरमहू और हसलपुर गांवों में लगी आग से कुल मिलाकर करीब 6 एकड़ में खड़ी फसल जलकर राख हो गई, जिससे लाखों रुपये का नुकसान बताया जा रहा है।

*तिरमहू में शॉर्ट सर्किट से 5 एकड़ फसल जली*

तिरमहू गांव में खेतों के पास से गुजर रही बिजली लाइन में स्पार्किंग के चलते आग लग गई। आग ने तेजी से फैलकर लगभग 5 एकड़ में खड़ी गेहूं और गन्ने की फसल को अपनी चपेट में ले लिया।

इस घटना में किसान किस्मत सारटकर, राजेंद्र सारटकर और जगवत की फसल पूरी तरह नष्ट हो गई। अनुमानित नुकसान करीब 5 लाख रुपये बताया जा रहा है।

*एक घंटे तक नहीं पहुंची फायर ब्रिगेड*

ग्रामीणों के अनुसार, आग लगने के बाद एक घंटे से अधिक समय तक फायर ब्रिगेड मौके पर नहीं पहुंची, जिससे आग और फैल गई।

मजबूरन किसानों और ग्रामीणों ने खुद ही पानी और उपलब्ध संसाधनों से आग बुझाने का प्रयास किया। आग पर काबू पाने के बाद मुलताई से फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची।

*हसलपुर में भी आग, 1 एकड़ फसल राख*

वहीं दूसरी घटना ग्राम पंचायत हसलपुर में सामने आई, जहां किसान शेषराव बेले के खेत में दोपहर करीब 12 बजे आग लग गई।

करीब 2 एकड़ फसल में से 1 एकड़ पूरी तरह जलकर खाक हो गई।

फायर ब्रिगेड को पहुंचने में करीब एक घंटे का समय लगा, जिससे नुकसान बढ़ गया। ग्रामीणों के अनुसार, पास में गन्ने के पांसूद (कचरे) का ढेर रखा था, जिससे आग फैलने का खतरा और अधिक था।

*बिजली विभाग पर गंभीर आरोप*

किसानों ने दोनों घटनाओं के लिए बिजली विभाग की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि—

बिजली लाइनों की नियमित देखरेख नहीं की जाती

बार-बार स्पार्किंग की घटनाएं होती हैं

घटना के समय अधिकारियों ने फोन तक रिसीव नहीं किया

*ग्रामीणों की मांग—स्थायी फायर ब्रिगेड व्यवस्था*

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि—

आमला क्षेत्र में कम से कम दो स्थायी फायर ब्रिगेड वाहन तैनात किए जाएं

पंचायत स्तर पर आग बुझाने के संसाधन उपलब्ध कराए जाएं

*लगातार बढ़ रही आगजनी की घटनाएं*

गौरतलब है कि इन दिनों जिले में आग लगने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिससे किसानों में भय का माहौल है। किसानों का कहना है कि बिजली लोड और सप्लाई व्यवस्था में बदलाव के कारण भी इस तरह की घटनाएं बढ़ रही हैं।

 

आमला तहसील की ये घटनाएं न केवल किसानों के नुकसान की कहानी हैं, बल्कि बिजली व्यवस्था और आपदा प्रबंधन की कमियों को भी उजागर करती हैं। समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो ऐसे हादसे आगे भी बढ़ सकते हैं।