आमला/बोरदेही। डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराधों के बीच लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से पुलिस मुख्यालय मध्यप्रदेश द्वारा संचालित SAFE CLICK–2.0 अभियान के तहत थाना बोरदेही पुलिस ने शासकीय हाई सेकेंडरी स्कूल छिपनिया पिपरिया में एक व्यापक साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में छात्राओं को इंटरनेट और सोशल मीडिया का सुरक्षित उपयोग करने, ऑनलाइन ठगी से बचने तथा साइबर अपराध होने पर तत्काल शिकायत दर्ज कराने के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई।

कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधिकारियों ने कहा कि आज मोबाइल फोन, इंटरनेट बैंकिंग, यूपीआई और सोशल मीडिया का उपयोग तेजी से बढ़ा है। इसके साथ ही साइबर अपराधी भी लोगों को ठगने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा बचाव जागरूकता और सतर्कता है। यदि प्रत्येक व्यक्ति डिजिटल प्लेटफॉर्म का सावधानीपूर्वक उपयोग करे तो अधिकांश साइबर अपराधों को रोका जा सकता है।

पुलिस टीम ने छात्राओं को QR Code Fraud, UPI Fraud, Fake Loan App Fraud, KYC Update Scam, OTP Fraud, Social Media Hacking, Fake Customer Care Number, Screen Sharing App Fraud, Lottery Scam, Investment Scam सहित विभिन्न प्रकार के साइबर अपराधों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। साथ ही वास्तविक उदाहरणों के माध्यम से बताया कि साइबर अपराधी किस प्रकार लोगों को झांसे में लेकर उनकी मेहनत की कमाई हड़प लेते हैं।

कार्यक्रम में छात्राओं को विशेष रूप से समझाया गया कि किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए लिंक पर क्लिक न करें, सोशल मीडिया पर आने वाले संदिग्ध संदेशों पर विश्वास न करें, किसी भी अनजान QR कोड को स्कैन करने से पहले उसकी पूरी जानकारी लें तथा मोबाइल पर आए किसी भी OTP, बैंक खाते की जानकारी, एटीएम कार्ड नंबर, CVV या पासवर्ड जैसी गोपनीय जानकारी किसी भी व्यक्ति के साथ साझा न करें। पुलिस ने यह भी बताया कि कोई भी बैंक, सरकारी संस्था या अधिकृत एजेंसी फोन पर कभी भी OTP या बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी नहीं मांगती।

पुलिस अधिकारियों ने छात्राओं को यह भी जानकारी दी कि कई बार साइबर अपराधी कम ब्याज पर लोन दिलाने, नौकरी लगाने, इनाम जीतने, निवेश पर अधिक मुनाफा दिलाने या KYC अपडेट कराने के नाम पर लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं। ऐसे मामलों में बिना सत्यापन किसी भी लिंक पर क्लिक करना या मोबाइल में कोई संदिग्ध एप डाउनलोड करना आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है।

कार्यक्रम में साइबर हेल्पलाइन 1930 की उपयोगिता भी बताई गई। पुलिस ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी होती है तो वह बिना देर किए तत्काल 1930 साइबर हेल्पलाइन पर कॉल करे या cybercrime.gov.in पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराए। समय पर शिकायत करने से ठगी गई राशि को होल्ड कराने और वापस मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

इस अवसर पर लगभग 100 से 120 छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर साइबर सुरक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों पर जानकारी प्राप्त की। छात्राओं ने पुलिस अधिकारियों से कई प्रश्न भी पूछे, जिनका सरल और व्यावहारिक तरीके से समाधान किया गया। पुलिस टीम ने छात्राओं से अपील की कि वे स्वयं जागरूक बनें और अपने परिवार, रिश्तेदारों तथा आसपास के लोगों को भी साइबर अपराधों से बचाव के उपायों की जानकारी दें, ताकि समाज को डिजिटल अपराधों से सुरक्षित बनाया जा सके।

कार्यक्रम में एएसआई कमल सिंह मेहर, महिला आरक्षक आरती पवार एवं आरक्षक रामकिशन नागोतिया ने छात्राओं को साइबर सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं की जानकारी देते हुए सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाने का संदेश दिया। विद्यालय परिवार ने भी थाना बोरदेही पुलिस की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे जागरूकता कार्यक्रम समय-समय पर आयोजित होते रहना चाहिए, जिससे विद्यार्थी डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रह सकें।

कार्यक्रम के समापन पर पुलिस अधिकारियों ने सभी छात्राओं को साइबर सुरक्षा की शपथ दिलाई और संदेश दिया—

"सोचें • समझें • फिर क्लिक करें।"

थाना बोरदेही द्वारा संचालित SAFE CLICK–2.0 अभियान जिले में लगातार जारी है। इस अभियान के माध्यम से स्कूलों, कॉलेजों, सार्वजनिक संस्थानों और ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचकर नागरिकों को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। पुलिस का मानना है कि तकनीक का सुरक्षित उपयोग और समय पर जागरूकता ही साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने का सबसे मजबूत माध्यम है।