आमला। विकासखंड आमला की ग्राम पंचायत इटावा का मुख्य बस स्टैंड क्षेत्र का प्रमुख परिवहन केंद्र होने के बावजूद आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। प्रतिदिन हजारों यात्रियों की आवाजाही वाले इस बस स्टैंड पर न तो सुलभ शौचालय की व्यवस्था है और न ही यात्रियों के बैठने के लिए कोई प्रतीक्षालय बनाया गया है। परिणामस्वरूप महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों, दिव्यांगों, व्यापारियों और दूर-दराज से आने वाले यात्रियों को प्रतिदिन भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से यह समस्या बनी हुई है, लेकिन जिम्मेदार विभाग और जनप्रतिनिधि अब तक इस ओर गंभीरता से ध्यान नहीं दे रहे हैं।
इटावा मुख्य बस स्टैंड मुलताई, आमला, बैतूल तथा आसपास के कई ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ने वाला प्रमुख यातायात केंद्र है। यहां सुबह लगभग 6 बजे से रात 10 बजे तक लगातार बसों का संचालन होता है और बड़ी संख्या में विद्यार्थी, किसान, मजदूर, व्यापारी, कर्मचारी एवं आम नागरिक अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए इसी बस स्टैंड का उपयोग करते हैं। इसके बावजूद यात्रियों के लिए सबसे आवश्यक सुविधाएं आज भी उपलब्ध नहीं हो सकी हैं।
*महिलाओं और बुजुर्गों की बढ़ी मुश्किलें*
बस स्टैंड पर सार्वजनिक शौचालय नहीं होने के कारण सबसे अधिक परेशानी महिलाओं, बुजुर्गों और छोटे बच्चों को उठानी पड़ती है। लंबी दूरी से आने वाले यात्रियों को मजबूरी में आसपास के सुनसान स्थानों या निजी प्रतिष्ठानों का सहारा लेना पड़ता है, जिससे उन्हें असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है। महिलाओं ने बताया कि कई बार घंटों बस का इंतजार करना पड़ता है, लेकिन शौचालय नहीं होने से उन्हें काफी परेशानी झेलनी पड़ती है।
*बारिश और तेज धूप में खुले आसमान के नीचे इंतजार*
यात्री प्रतीक्षालय नहीं होने के कारण यात्रियों को धूप, बारिश और सर्दी जैसे मौसम की मार झेलते हुए खुले में बसों का इंतजार करना पड़ता है। बरसात के दिनों में लोग भीगते हुए बसों की प्रतीक्षा करते हैं, जबकि गर्मियों में तेज धूप के कारण बुजुर्गों, बच्चों और बीमार यात्रियों की परेशानी और बढ़ जाती है। कई बार यात्री दुकानों के सामने या पेड़ों की छांव में खड़े होकर समय बिताने को मजबूर हो जाते हैं।
*व्यापारियों और स्थानीय लोगों को भी हो रही असुविधा*
बस स्टैंड के आसपास व्यापार करने वाले दुकानदारों का कहना है कि यात्रियों के लिए पर्याप्त सुविधाएं नहीं होने से उन्हें भी रोजाना समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कई यात्री मजबूरी में दुकानों के सामने बैठते हैं या निजी दुकानों के शौचालय का उपयोग करने की अनुमति मांगते हैं। इससे व्यापारियों को भी असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है।
*स्वच्छता अभियान के दावों पर उठ रहे सवाल*
एक ओर शासन द्वारा स्वच्छता, महिला सम्मान और यात्री सुविधाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर इटावा जैसे महत्वपूर्ण बस स्टैंड पर आज तक सार्वजनिक शौचालय तक उपलब्ध नहीं कराया जा सका है। इससे स्वच्छता अभियान और ग्रामीण विकास के दावों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बस स्टैंड पर शौचालय और प्रतीक्षालय जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हों, तो यात्रियों को राहत मिलने के साथ-साथ क्षेत्र की स्वच्छता व्यवस्था भी बेहतर होगी।
*ग्रामीणों ने प्रशासन से की तत्काल कार्रवाई की मांग*
ग्रामीणों, व्यापारियों और जनप्रतिनिधियों ने ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत तथा जिला प्रशासन से मांग की है कि इटावा मुख्य बस स्टैंड पर प्राथमिकता के आधार पर आधुनिक सुलभ शौचालय और पक्का यात्री प्रतीक्षालय बनाया जाए। साथ ही बस स्टैंड पर पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, बैठने के लिए बेंच, साफ-सफाई और कचरा प्रबंधन जैसी आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएं।
ग्रामीणों का कहना है कि इटावा बस स्टैंड से प्रतिदिन हजारों लोग सफर करते हैं। ऐसे में यहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव न केवल यात्रियों के लिए परेशानी का कारण है, बल्कि यह स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही सुविधाओं का निर्माण नहीं कराया गया तो वे संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर जनआंदोलन करने पर भी विचार करेंगे।
अब देखना यह होगा कि वर्षों से चली आ रही इस गंभीर समस्या पर जिम्मेदार अधिकारी कब तक ध्यान देते हैं और इटावा बस स्टैंड पर यात्रियों को उनकी बुनियादी सुविधाएं कब तक उपलब्ध हो पाती हैं।
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