आमला । नगर पालिका आमला के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) के लिए वार्ड क्रमांक-2 में मुख्यमंत्री शहरी अधोसंरचना चतुर्थ चरण योजना के तहत लाखों रुपये की लागत से शासकीय आवास का निर्माण कराया जा रहा है। हालांकि निर्माण कार्य अभी शुरुआती चरण में ही है, लेकिन इसकी गुणवत्ता को लेकर स्थानीय नागरिकों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि निर्माण कार्य में निर्धारित तकनीकी मानकों की अनदेखी की जा रही है और गुणवत्ता परीक्षण की आवश्यक व्यवस्था भी मौके पर दिखाई नहीं दे रही।

स्थानीय लोगों के अनुसार निर्माण कार्य रुद्र कंस्ट्रक्शन द्वारा कराया जा रहा है। वार्डवासियों का कहना है कि निर्माण में जंग लगे सरियों का उपयोग किया जा रहा है तथा प्लिंथ भराव भी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं किया गया। उनका कहना है कि यदि शुरुआती स्तर पर ही गुणवत्ता से समझौता किया गया तो भविष्य में भवन की मजबूती और सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।

*गुणवत्ता परीक्षण व्यवस्था पर उठे सवाल*

वार्डवासियों का कहना है कि किसी भी सरकारी निर्माण कार्य में सीमेंट, कंक्रीट, सरिया एवं अन्य निर्माण सामग्री की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर परीक्षण किया जाना आवश्यक होता है। लेकिन निर्माण स्थल पर ऐसी कोई लैब टेस्टिंग मशीन, उपकरण या परीक्षण व्यवस्था दिखाई नहीं दी। इससे लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की पुष्टि आखिर किस आधार पर की जा रही है।

*वार्डवासियों ने लगाए लापरवाही के आरोप*

स्थानीय निवासी मोंटी और विनीत ने आरोप लगाया कि सरकारी धन से बनने वाले भवनों में उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करना संबंधित एजेंसी और विभागीय अधिकारियों की जिम्मेदारी है। उनका कहना है कि निर्माण एजेंसी मनमाने तरीके से कार्य कर रही है, जबकि गुणवत्ता की निगरानी प्रभावी ढंग से नहीं हो रही।

*निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल*

नागरिकों का कहना है कि यदि नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारी नियमित रूप से निर्माण स्थल का निरीक्षण करते और सामग्री की गुणवत्ता की जांच कराते, तो इस तरह की शिकायतें सामने नहीं आतीं। लोगों का आरोप है कि निगरानी के अभाव में निर्माण एजेंसी पर गुणवत्ता बनाए रखने का अपेक्षित दबाव नहीं है।

*स्वतंत्र जांच और कार्रवाई की मांग*

वार्डवासियों ने जिला प्रशासन एवं संबंधित विभाग से मांग की है कि निर्माण कार्य की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए, निर्माण सामग्री के नमूनों की अधिकृत प्रयोगशाला से जांच कराई जाए तथा यदि गुणवत्ता में कमी या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित एजेंसी एवं जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

*ठेकेदार पर मेहरबानी को लेकर भी उठे सवाल*

स्थानीय नागरिकों के बीच यह चर्चा भी है कि "आखिर ऐसा क्या है कि नगर पालिका इस ठेकेदार पर इतनी मेहरबान नजर आ रही है?" लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर लगातार सवाल उठने के बावजूद यदि समय रहते प्रभावी जांच और कार्रवाई नहीं होती है, तो इससे पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न खड़े होंगे। नागरिकों ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित एजेंसी एवं जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।