डबरा 

डबरा नगर पालिका परिषद की बैठक इस बार पूरी तरह हंगामे और आरोपों के साए में रही। कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच आयोजित इस बैठक में विकास कार्यों को लेकर ऐसा टकराव हुआ कि माहौल कई बार नियंत्रण से बाहर होता नजर आया।

बैठक के दौरान सड़क, सफाई, पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं पर चर्चा कम और एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप ज्यादा देखने को मिले। पार्षदों ने खुलकर नगर पालिका के कामकाज पर सवाल उठाए और कई मामलों में सीधे-सीधे भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। तीखी बहस और नोकझोंक के चलते बैठक का माहौल बार-बार गर्माता रहा।

सबसे बड़ा खुलासा वार्ड 11 के पार्षद हैप्पी जी ने किया। उन्होंने आरोप लगाया कि करीब 50 करोड़ रुपये की नल-जल योजना को पूरी तरह तैयार होने से पहले ही हैंडओवर कर दिया गया। इस गंभीर मामले ने बैठक में तूफान खड़ा कर दिया। मामले की जांच के लिए सर्वसम्मति से एक समिति गठित करनी पड़ी, जो खुद इस बात का संकेत है कि मामला कितना संदिग्ध है।

यहीं नहीं, नगर पालिका की टैक्स वसूली व्यवस्था भी सवालों के घेरे में आ गई। पूर्व आरआई उपेंद्र परमार को भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबित किया जाना इस बात का साफ संकेत देता है कि अंदरखाने गड़बड़ियां लंबे समय से चल रही थीं।

स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एसडीओपी सौरभ कुमार को पुलिस बल के साथ मौके पर तैनात रहना पड़ा। पुलिस की मौजूदगी में किसी तरह बैठक पूरी कराई गई, वरना हालात और बिगड़ सकते थे।

अब बड़ा सवाल यह है कि जब परिषद की बैठक में ही भ्रष्टाचार की परतें खुल रही हैं, तो जमीनी स्तर पर हालात कितने गंभीर होंगे? 

डबरा की जनता के सामने साफ संकेत है—विकास के नाम पर बड़ा खेल चल रहा है, और अब जवाबदेही तय होना बेहद जरूरी है।