सागर में रबी फसलों की कटाई के दौरान 'नरवाई' जलाने पर सख्ती, किसानों को चेतावनी

केसली (सागर) - रबी सीजन की फसलों की कटाई का समय करीब आते ही सागर जिला प्रशासन ने खेतों में फसल अवशेष (नरवाई) जलाने वाले किसानों के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। जिला प्रशासन और कृषि विभाग ने स्पष्ट रूप से नरवाई जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रथा न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरक शक्ति को भी प्रभावित करती है।

प्रतिबंध की वजह: उप-संचालक की राय

सागर के कृषि विभाग के उप-संचालक ने बताया कि आधुनिक समय में किसान हार्वेस्टर से गेहूं की कटाई करते हैं, जिससे अवशेष खेत में रह जाते हैं। पशुओं के लिए भूसा बनाने के बजाय, किसान इन्हें जलाकर अगली फसल की तैयारी में जुट जाते हैं।

नरवाई जलाने के नुकसान:

  • मिट्टी की गुणवत्ता में कमी: आग से मिट्टी में मौजूद मित्र कीट और सूक्ष्म पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं।
  • प्रदूषण: धुएं से वायु प्रदूषण बढ़ता है, जिससे सांस की बीमारियों का खतरा भी रहता है।
  • हादसों का डर: आग बेकाबू होने पर आसपास के गांवों या खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचा सकती है।

जुर्माने का गणित: उल्लंघन पर दंड

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंध के उल्लंघन पर भूमि के आकार के अनुसार जुर्माना लगाया जाएगा:

  • 2 एकड़ से कम भूमि: ₹ 2,500
  • 2 से 5 एकड़ तक भूमि: ₹ 5,000
  • 5 एकड़ से अधिक भूमि: ₹ 15,000

कृषि विभाग की सलाह

कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे नरवाई जलाने के बजाय स्ट्रॉ रीपर का उपयोग करें। इससे न केवल अवशेषों से कीमती भूसा तैयार होगा, जिसे बेचकर अतिरिक्त लाभ कमाया जा सकता है, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता भी बनी रहेगी।

राजस्व विभाग और कृषि विभाग की संयुक्त टीमें ग्रामीण क्षेत्रों में गश्त करेंगी, ताकि आगजनी की घटनाओं पर नजर रखी जा सके।

यह पहल पर्यावरण संरक्षण और कृषि स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे दीर्घकालिक लाभ सुनिश्चित किए जा सकते हैं।