मध्य प्रदेश के कटनी जिले में महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और अटूट दृढ़ संकल्प का एक अत्यंत प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है। कटनी जिले के विकासखंड बड़वारा के अंतर्गत आने वाले ग्राम पिपरिया कला की निवासी श्रीमती संजो पटेल ने अपनी मेहनत और आजीविका मिशन के सहयोग से संघर्षों के दौर को पीछे छोड़कर सफलता की एक नई इबारत लिखी है। आज वे एक सफल शिक्षिका, कुशल व्यवसायी और स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष के रूप में पूरे क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बना चुकी हैं।
आर्थिक तंगी और संघर्ष से भरा शुरुआती जीवन
श्रीमती संजो पटेल शैक्षणिक रूप से डीएड (D.Ed) प्रशिक्षित हैं और पूर्व में एक निजी विद्यालय में शिक्षिका के रूप में कार्य करती थीं। उस दौरान उन्हें अपनी मेहनत के बदले मात्र 1,500 से 2,000 रुपये प्रतिमाह का बहुत ही सीमित वेतन प्राप्त होता था। उनके पति श्री अमित कुमार पटेल मोटर बाइंडिंग का कार्य संभालते थे, जिससे उनके परिवार की कुल मासिक आय लगभग 8,000 से 10,000 रुपये के बीच हुआ करती थी। आय के सीमित साधन होने के कारण उनका परिवार भारी आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रहा था और एक कच्चे मकान में रहकर अपना जीवनयापन करने को विवश था।
स्व-सहायता समूह बना जीवन का टर्निंग पॉइंट
संजो पटेल के जीवन में एक सकारात्मक बदलाव तब आया जब उन्होंने 'मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन' के तहत स्थानीय लक्ष्मी स्व-सहायता समूह की सदस्यता ग्रहण की। समूह में उनकी सक्रिय भागीदारी, कार्यकुशलता और बेहतरीन नेतृत्व क्षमता को देखते हुए अन्य सदस्यों ने उन्हें समूह का अध्यक्ष चुन लिया। इसके पश्चात, आजीविका मिशन के माध्यम से उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने और नया व्यवसाय शुरू करने के लिए 55 हजार रुपये का ऋण (Loan) उपलब्ध कराया गया।
घर से शुरू किया किराना एवं मनिहारी व्यवसाय
स्व-सहायता समूह से प्राप्त 55 हजार रुपये की वित्तीय सहायता का सदुपयोग करते हुए संजो पटेल ने अपने ही घर से किराना और मनिहारी (General Store) की दुकान की शुरुआत की। उनकी यह छोटी सी शुरुआत जल्द ही एक सफल कारोबार में बदल गई। संजो की कड़ी मेहनत, पूरी ईमानदारी और ग्राहकों के साथ उनके मृदुल तथा बेहतर व्यवहार के कारण दुकान ने बहुत कम समय में बाजार में अच्छी साख बना ली। वर्तमान स्थिति यह है कि उनकी इस दुकान से प्रतिदिन लगभग 1,500 से 2,000 रुपये तक का कारोबार आसानी से हो जाता है।
शिक्षिका और उद्यमी के रूप में दोहरी जिम्मेदारी का निर्वहन
आज संजो पटेल एक साथ दोहरी जिम्मेदारियों को बेहद सफलता के साथ निभा रही हैं। वे एक ओर जहां विद्यालय में बच्चों को शिक्षा देकर उनके भविष्य को संवार रही हैं, वहीं दूसरी ओर एक कुशल व्यवसायी के रूप में अपनी दुकान का संचालन भी कर रही हैं। उन्होंने वित्तीय अनुशासन का उत्कृष्ट परिचय देते हुए स्व-सहायता समूह से लिए गए ऋण का नियमित रूप से ब्याज सहित समय पर भुगतान किया है, जो उनकी उच्च वित्तीय समझ को दर्शाता है।
परिवार की आर्थिक स्थिति में आया बड़ा सुधार
व्यवसाय शुरू होने और उसकी सफलता के बाद संजो पटेल के परिवार की वित्तीय स्थिति में अभूतपूर्व सुधार आया है। अब उनके परिवार की संयुक्त मासिक आय बढ़कर लगभग 20 हजार रुपये तक पहुंच चुकी है। इस आर्थिक मजबूती के परिणामस्वरुप:
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परिवार का पुराना कच्चा मकान अब एक पक्के मकान में परिवर्तित हो चुका है।
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बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी सभी आवश्यक जरूरतों को अब बहुत ही बेहतर तरीके से पूरा किया जा रहा है।
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परिवार के समग्र जीवन स्तर (Standard of Living) में उल्लेखनीय और सकारात्मक सुधार दर्ज किया गया है।
गांव की अन्य महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा स्रोत
संजो पटेल आज न केवल अपने परिवार के लिए बल्कि पूरे ग्राम पिपरिया कला और आसपास की महिलाओं के लिए एक मार्गदर्शक और प्रेरणा स्रोत बन चुकी हैं। वे स्कूल में बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ ग्रामीण महिलाओं को भी आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनने, स्व-सहायता समूहों से जुड़ने और स्वरोजगार अपनाने के लिए लगातार प्रेरित कर रही हैं। उनका यह सफर साबित करता है कि यदि सही दिशा में सहयोग मिल जाए, तो कठिन से कठिन परिस्थितियों को भी सफलता में बदला जा सकता है।
image source : https://katni.mpinfo.org
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