मंडला की 'डेथ ट्रैप' सड़क: विकास के नाम पर लापरवाही का खतरनाक खेल

मंडला की नई सड़क, जो विकास की प्रतीक होनी चाहिए थी, आज भ्रष्टाचार और लापरवाही की मिसाल बन गई है। यहां की सड़क पर खड़े बिजली के खंभे अब तक कई हादसों का कारण बन चुके हैं, और यह किसी भी समय जानलेवा साबित हो सकते हैं।

करोड़ों का बजट, नियमों की अनदेखी

यहां नेहरू स्मारक मार्ग पर करोड़ों की लागत से सड़क तो बनाई जा रही है, लेकिन बुनियादी सुरक्षा नियमों को नजरअंदाज कर दिया गया है। कायदे से पहले बिजली के खंभे हटने चाहिए थे, लेकिन अधिकारियों की जल्दबाजी में डामरीकरण पहले कर दिया गया।

स्थानीय लोगों की चिंताएं

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह विकास नहीं, बल्कि 'विनाश' की तैयारी है। रात के अंधेरे में ये खंभे किसी काल से कम नहीं लगते, और कई लोग हादसों का शिकार हो चुके हैं। जनता पूछ रही है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?

प्रशासन की सफाई

जब हमने नगर पालिका से जवाब मांगा, तो उन्होंने बिजली विभाग को पैसे जमा करने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया। सवाल यह उठता है कि अगर पैसे जमा हो चुके थे, तो सड़क बनाने की इतनी जल्दबाजी क्यों थी? क्या ठेकेदार को भुगतान करने के लिए जनता की जान दांव पर लगाना जरूरी था?

निष्कर्ष

मंडला की यह सड़क इस बात का गवाह है कि जब सिस्टम अंधा हो जाता है, तो विकास कैसे 'विनाश' का रूप ले लेता है। अब देखना यह होगा कि इस खबर के बाद प्रशासन जागता है या फिर किसी बेगुनाह की जान जाने का इंतजार किया जा रहा है।

बाईट-1: सुधीर उपाध्याय, स्थानीय नागरिक

बाईट-2: गजानन नफाडे, मुख्य नगर पालिका अधिकारी, मंडला