बैतूल: बैतूल में प्रस्तावित पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल के मेडिकल कॉलेज का विरोध तेज होता जा रहा है। जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) ने इसे आदिवासी बहुल जिले के हितों के खिलाफ बताते हुए कड़ा विरोध जताया है। संगठन का कहना है कि पीपीपी मॉडल से शिक्षा महंगी हो जाएगी, जिससे गरीब और मध्यमवर्गीय छात्र मेडिकल शिक्षा से वंचित रह सकते हैं।

जयस के युवा प्रकोष्ठ जिला अध्यक्ष सोनू धुर्वे के नेतृत्व में संगठन ने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर पूर्ण रूप से शासकीय मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की मांग की है।

पीपीपी मॉडल के खिलाफ विरोध के प्रमुख बिंदु

  • शिक्षा के निजीकरण और महंगी फीस: युवा आदिवासी विकास संगठन के जिला अध्यक्ष जितेंद्र सिंह इवने ने कहा कि पीपीपी मॉडल से निजी संस्थाएं मुनाफे के लिए अपने नियम बनाती हैं, जिससे छात्रों और मरीजों से ज्यादा फीस वसूली जाएगी।
  • नेताओं पर वादाखिलाफी का आरोप: ज्ञापन में बैतूल विधायक हेमंत खण्डेलवाल और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर शासकीय कॉलेज खोलने के वादे से मुकरने का आरोप लगाया गया है।
  • आरक्षण और नियमों पर सवाल: संगठन ने पीपीपी मॉडल में एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग को मिलने वाले आरक्षण के पालन पर भी सवाल उठाए हैं।

ज्ञापन सौंपने वालों में सोनू धुर्वे, दिलीप धुर्वे, जितेंद्र सिंह इवने, अर्जुन धुर्वे समेत अन्य प्रमुख सदस्य मौजूद थे।

ज्ञापन में कहा गया कि वर्तमान सरकार शासकीय शैक्षणिक संस्थानों का निजीकरण कर पूंजीपतियों को लाभ पहुंचा रही है, जो जनता के हित में नहीं है।