गुना : मध्य प्रदेश की धरती पर जल और पर्यावरण के संरक्षण की दिशा में एक नया अध्याय जुड़ गया है। प्रदेश के प्राकृतिक संसाधनों को सहेजने और नदियों के पुनर्जीवन के व्यापक उद्देश्य के साथ 'जल गंगा संवर्धन अभियान 2026' का शंखनाद किया गया है। इसी महत्वपूर्ण पहल के तहत ग्राम कंजा तरावटा स्थित कूनो नदी के उद्गम स्थल पर एक भव्य जागरूकता एवं प्रेरणा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के माध्यम से न केवल जल के महत्व को रेखांकित किया गया, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और हरा-भरा भविष्य सुनिश्चित करने का संकल्प भी लिया गया।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त श्री मोहन नागर की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने मुख्य अतिथि के रूप में दीप प्रज्वलन और विधिवत पूजन-अर्चन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कूनो नदी, जो न केवल मध्य प्रदेश की पारिस्थितिकी बल्कि वन्यजीवों के लिए भी जीवनदायिनी है, उसके उद्गम स्थल पर आयोजित इस कार्यक्रम ने स्थानीय ग्रामीणों और प्रशासन के बीच एक नई ऊर्जा का संचार किया है।

राज्यमंत्री मोहन नागर का संबोधन और विजन

अपने संबोधन में श्री मोहन नागर ने जल की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जल ही जीवन का वास्तविक आधार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि आज हम सचेत नहीं हुए, तो भविष्य में जल संकट एक ऐसी विभीषिका बन जाएगा जिसका सामना करना कठिन होगा। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि जल स्रोतों का संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उनके भाषण के मुख्य बिंदुओं को निम्नलिखित बिंदुओं में समझा जा सकता है:

1. आने वाली पीढ़ियों के लिए उत्तरदायित्व: उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों ने हमें शुद्ध जल और स्वच्छ पर्यावरण विरासत में दिया था, लेकिन आधुनिकता की दौड़ में हमने इसे प्रदूषित किया है। अब यह हमारा कर्तव्य है कि हम आने वाली पीढ़ियों को जल से समृद्ध धरती सौंपें।

2. वर्षा जल संचयन की तकनीक: उन्होंने ग्रामीणों को पारंपरिक और आधुनिक वर्षा जल संचयन विधियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि बारिश की एक-एक बूंद को सहेजना ही भविष्य की सबसे बड़ी पूंजी होगी।

3. नदियों का पुनर्जीवन: कूनो नदी के उद्गम स्थल पर खड़े होकर उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नदियों को सूखने से बचाने के लिए उनके जलग्रहण क्षेत्रों में वृक्षारोपण अनिवार्य है।

4. वृक्षारोपण एवं संकल्प: उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति से कम से कम एक पौधा लगाने और उसकी संतान की तरह देखभाल करने की अपील की। उन्होंने 'एक पेड़ मां के नाम' जैसे अभियानों की प्रासंगिकता को भी साझा किया।

जल गंगा संवर्धन अभियान 2026 का रणनीतिक ढांचा

यह अभियान केवल एक दिन का आयोजन नहीं है, बल्कि यह 2026 तक चलने वाली एक सुव्यवस्थित योजना है। इस अभियान के तहत निम्नलिखित रणनीतियों पर कार्य किया जाएगा:

- तालाबों और कुओं का गहरीकरण: प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूद पुराने जल निकायों को पुनर्जीवित किया जाएगा ताकि उनकी जल धारण क्षमता बढ़ सके।

- सोख्ता गड्ढों का निर्माण: घरों से निकलने वाले पानी और वर्षा जल को भूजल स्तर में सुधार के लिए जमीन के अंदर उतारने की योजना।

- जनजागृति रैलियां: जन अभियान परिषद के माध्यम से गांव-गांव में टोलियां बनाकर लोगों को जल के दुरुपयोग के प्रति सचेत करना।

- जैविक खेती को बढ़ावा: पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए रासायनिक खाद के स्थान पर जैविक खेती को अपनाने पर जोर दिया जा रहा है, जिससे मिट्टी की नमी बनी रहे।

सामुदायिक भागीदारी और प्रशासनिक सहयोग

कार्यक्रम के दौरान यह स्पष्ट दिखा कि जब प्रशासन और समाज हाथ मिलाते हैं, तो बड़े बदलाव संभव हैं। म.प्र. जन अभियान परिषद इस अभियान में एक सेतु का कार्य कर रही है। जिला समन्वयक श्रीमती मंजूषा सोलोमन और ब्लॉक समन्वयक श्री अमित गोयल ने कार्यक्रम के आयोजन में मुख्य भूमिका निभाई।

ग्रामीणों को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि कूनो नदी का उद्गम स्थल हमारे लिए एक पवित्र स्थान है। इसकी स्वच्छता और अखंडता को बनाए रखना हर स्थानीय नागरिक का धर्म है। कार्यक्रम में उपस्थित भाजपा मंडल अध्यक्ष श्री नरेंद्र कुशवाह और ग्राम पंचायत सरपंच श्री दृगपाल सिंह यादव ने विश्वास दिलाया कि ग्राम पंचायत स्तर पर जल संरक्षण की हर योजना को प्राथमिकता दी जाएगी।

पर्यावरण संतुलन के लिए विशेषज्ञों के विचार

परामर्शदाता राम किशोर देवलिया और धर्मेंद्र किरार जैसे जानकारों ने बताया कि वनों की कटाई के कारण वर्षा चक्र प्रभावित हुआ है। उन्होंने वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखते हुए बताया कि कैसे कूनो नदी के आस-पास के वनों को घना बनाकर हम नदी के प्रवाह को बारहमासी बना सकते हैं।

कार्यक्रम का संचालन श्री राजाराम धाकड़ ने अत्यंत प्रभावी ढंग से किया, जिसमें उन्होंने स्थानीय लोक कथाओं और जल से जुड़ी कहावतों के माध्यम से जनसमूह को जोड़े रखा। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित जनों ने हाथ उठाकर जल शपथ ली कि वे न तो जल की बर्बादी करेंगे और न ही किसी को करने देंगे।

निष्कर्ष और भविष्य की राह

मध्य प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान 2026 का यह आगाज़ एक जनआंदोलन की नींव रख चुका है। कूनो नदी के उद्गम से शुरू हुई यह चेतना अब पूरे प्रदेश में फैलने के लिए तैयार है। श्री मोहन नागर का यह दौरा और उनका आह्वान ग्रामीणों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना है।

इस अवसर पर हेमराज बैरागी, राजकुमार बैरागी, विकास सेन, बी.डी. शर्मा सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक और ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। सरकार की इस पहल से उम्मीद जगती है कि मध्य प्रदेश आने वाले वर्षों में जल संरक्षण के क्षेत्र में देश के लिए एक रोल मॉडल बनकर उभरेगा। यदि हम आज जल को बचाते हैं, तो कल जल हमें बचाएगा।

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