आमला, बैतूल। बहुचर्चित रंजिता यादव प्रकरण में पीड़ित पक्ष को न्याय की दिशा में पहली बड़ी सफलता मिली है। आमला के अपर सत्र न्यायाधीश संतोष कुमार चौहान की अदालत ने मामले के तीन आरोपियों द्वारा दायर अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया। न्यायालय के इस फैसले को पीड़ित परिवार ने न्याय की पहली जीत बताते हुए संतोष व्यक्त किया है।

मामले के अनुसार, मृतका रंजिता यादव को कथित रूप से पुत्र की चाह और लड़के-लड़की में भेदभाव को लेकर लगातार मानसिक एवं शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था। आरोप है कि प्रताड़ना के चलते उनकी हत्या कर दी गई और पूरे घटनाक्रम को आत्महत्या का स्वरूप देने का प्रयास किया गया।

इस मामले में सुरेंद्र यादव उर्फ बब्बू, उनकी पत्नी पुष्पा यादव तथा छोटी बहू मुस्कान यादव ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी, जिसे न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए निरस्त कर दिया।

गौरतलब है कि थाना आमला में अपराध क्रमांक 287/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (बी.एन.एस.) की धारा 108(3)(5) में प्रकरण दर्ज किया गया है।

मृतका पक्ष की ओर से पैरवी कर रही विजिता यादव ने न्यायालय के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि उन्हें न्याय व्यवस्था पर पूरा विश्वास है और उम्मीद है कि दोषियों को कानून के अनुसार कड़ी सजा मिलेगी।

मामले में आरोपियों की ओर से अधिवक्ता प्रशांत गर्ग एवं राजेंद्र उपाध्याय ने अग्रिम जमानत के समर्थन में पक्ष रखा, जबकि मृतका पक्ष की ओर से अधिवक्ता महेश प्रजापति ने मामले की गंभीरता, उपलब्ध तथ्यों एवं परिस्थितियों का हवाला देते हुए अग्रिम जमानत का जोरदार विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।

पीड़ित पक्ष का कहना है कि यह निर्णय न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और उन्हें विश्वास है कि आगे की सुनवाई में भी सत्य की जीत होगी तथा दोषियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।