*बड़वानी:-बाड़ी खुलते ही पहुंचे श्रद्धालु, चरण पखार की गणगौर माता की अगुवाई, की ज्वारों को सज्जित रथों में शिरोधार्य कर घर घर अगवानी की।*
बड़वानी:-माता की बाड़ी खुलते ही शनिवार को पूजन-अर्चन के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। अलसुबह 4 बजे से ही माता की बाड़ी का पूजन करने के लिए श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया था। शनिवार को बाड़ी बोने वाले स्थान पर पूजन कर हजारों श्रद्धालु माता के रथों के साथ ज्वारे अपने घर लेकर आए। गणगौर पर्व पर पूरा अंचल माता की अराधना में लीन है। निमाड़ के प्रसिद्ध गणगौर पर्व की पूरे जिले में धूम है। आगामी दो-तीन दिन घर-घर माता के गीत गूजेंगे। इसके बाद माता को विदाई दी जाएगी। *सुबह शुरू हुआ पूजन-अर्चन का दौर दोपहर तक चलता रहा*
यहां श्रद्धालुओं ने बाड़ी का पूजन कर मन्नतें मांगी। वहीं प्रांगण में माताओं के रमने का दौर चलता रहा। श्रद्धालुओं ने इनसे आशीर्वाद लिया। माता के गीत भी गाए।
*रथों को शिरोधार्य कर पूजन के लिए पहुंचे*
माता की बाड़ी खुलते ही श्रद्धालु रथों को शिरोधार्य कर पूजन के लिए पहुंचे। बाड़ी खुलने के स्थान पर पूजन के बाद रणुबाई व धनीयर राजा के रथों को श्रद्धालु अपने घर लेकर पहुंचे। जब श्रद्धालु माता के रथों को निकले तो उनका पाद प्रक्षालन किया गया। जोड़ो को भोजन के आमंत्रित कर भोजना कराया जाएगा। साथ ही माता की सेवा की जाएगी।
*कल माता को पिलाएंगे पानी*
शहर में करीब तीन से चार स्थानों पर माता की बाड़ी है। इन बाड़ी में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ रहेगी। श्रद्धालु रविवार को माता को पानी पिलाने झमरिया गार्डन लेकर पहुंचेंगे। सोमवार को माता की विदाई होगी।
*गणगौर माता के किए दर्शन, पूजन कर ओढ़ाई चुनरी*
गणगौर माता की बाड़ी खुलने के बाद शनिवार को हजारों लोगों ने माता का पूजन किया। सुबह 5 बजे से श्रद्धालु माता की बाडिय़ों में पहुंचे। जहां आरती कर माता को साड़ी, चुनरी, ढाणी सहित नारियल का प्रसाद भेंट किया। इस दौरान बाजार में हजारों भक्तों ने माता के दर्शन किया। दोपहर को माता के रथ बाडिय़ों में पहुंचे। यहां से श्रद्धालु उन्हें गाजे बाजे के साथ अपने घर ले गए कई श्रद्धालु अपने घर रात्रि विश्राम कराकर रविवार को फिर से माता की बाड़ी के समीप लाएंगे। शहर के एमजी रोड़ झण्डा चौक सहित कॉलोनी, व कई क्षेत्रों में युवतियों और महिलाओं ने माता माता का पूजा की। इस दौरान गणगौर पर्व होने से शहर का वातावरण में उत्साह रहा।

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