16 बी सदी का चंदेलकालीन तालाब खतरे में, मंदिरों के साथ पर्यावरण को पहुंचाई जा रही क्षति।

क्षेत्रफल की दृष्टि से जिले का सबसे बड़ा है तालाब

टीकमगढ- जिले के नदनवारा तालाब का इतिहास ओरछा के इतिहास से जुड़ा है जो 16 वीं शताब्दी  के आसपास का माना जाता है, जो बुंदेलखंड की समृद्ध तालाब संस्कृति का हिस्सा है, जिसका निर्माण चंदेल और बुंदेला शासकों के काल में हुआ, जो पानी के प्रबंधन और सिंचाई के लिए महत्वपूर्ण संरचना है, हालांकि वर्तमान में नदनवारा तालाब अपने पास कीमती खनिज (गौरा पत्थर) के खनन के कारण खतरे में है, बताया गया कि यह खदान प्रशासन द्वारा ईस्टन मिनरल्स को लीज पर दी गई है, जो स्थानीय समुदाय के लिए एक अहम मुद्दा बन गया है,  जल-सुरक्षा और पारंपरिक जल-संरचनाओं के महत्व को दर्शाता है। नंदनवारा तालाब का निर्माण बुंदेला शासको के समय में हुआ था यह क्षेत्र की प्राचीन जल संरचनाओं में से एक है जिसे अक्षय चंदेल कालीन तालाबों के साथ जोड़ा जाता है, इसे सिंधु सागर के नाम से भी जाना जाता है जो अपनी विशालता और स्थानीय महत्व के लिए प्रसिद्ध है, यहां तक की इसकी विस्तार की बात कहे तो 945.36 लाख वर्ग फीट जल संग्रहण की क्षमता रखता है। लेकिन अब तालाब की रोककर रखने वाली गौरा पत्थर की दीवार की अंधाधुंध खुदाई होने की वजह से तालाब गंभीर रूप से खतरे में है। यहां तक की इसी तरह निरंतर खनन होता रहा तो तालाब की संरचना एक दिन कमजोर हो जाएगी और तालाब के फूटने की आशंका बढ़ जाएगी जिससे आसपास के  दो दर्जन  से अधिक गांव बाढ़ क्षेत्र में जा पहुंचेंगे। 

सामुदायिक जीवनरेखा: 

ये तालाब न केवल सिंचाई के लिए, बल्कि स्थानीय समुदायों के लिए जीवनरेखा का काम करते थे, जैसा कि अलोपा और कुदार जैसे अन्य तालाबों के संदर्भ में देखा गया है, जिनका पुनरुद्धार किया गया है। 

नदनवारा तालाब की वर्तमान स्थिति पर खनन का खतरा:-
 नदनवारा तालाब के पास 'गौरा पत्थर' नामक खनिज का बड़ा भंडार है। इसके अवैध और अंधाधुंध खनन के कारण तालाब की संरचना जर्जर हो गई है और इसके टूटने का खतरा है, जिससे आस-पास के कई गांव प्रभावित हो सकते हैं।

जनता का मुद्दा: इस तालाब का मुद्दा स्थानीय चुनावों में एक अहम मुद्दा बन गया है, क्योंकि खनन ठेकेदारों को उच्च न्यायालय से स्टे (रोक) मिली हुई है, जिससे स्थानीय लोग अपनी पारंपरिक जल-संसाधनों को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

जल-सुरक्षा और चिंता: यह स्थिति क्षेत्र की तालाब संस्कृति पर संकट और जलवायु संकट के दौर में जल-सुरक्षा की बढ़ती चिंताओं को उजागर करती है।  संक्षेप में, नदनवारा तालाब का इतिहास स्थानीय शासकों द्वारा निर्मित पारंपरिक जल-संरचनाओं से जुड़ा है, लेकिन आज यह खनन के कारण अस्तित्व के संकट में है और स्थानीय पर्यावरण व जनजीवन के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है, जो बुंदेलखंड के कई अन्य तालाबों की दुर्दशा को भी दर्शाता है।

ग्रामीणों की चिंता है कि खदान में मनमाने तरीके से बगैर सूचना दिए ब्लास्टिंग की जाती है जिससे आसपास किसानों की फसलों के साथ आसपास में रह रहे लोगों में दहशत का माहौल बना रहता है यहां तक की ब्लास्टिंग में टूटे हुए पत्थर लोगों की बस्तियां तक पहुंच जाते हैं जिससे किसी जनहानि का अंदेशा बना रहता है।