*खेत खाली और चना, मसूर बिक गया क्वींटलों में*
*चंदवार पटवारी की भूमिका संदिग्ध*
लो भाई किसानों की पीठ पर एक और धोखा छाप दिया गया है, यहां किसान सिस्टम का सितम सह रहा है, वहां बिना खेती के ही चना और मसूर तौलकर मंडी पहुंच गया, यहां दर्जनों किसान भीषण गर्मी में पसीना बहा रहा है, लेकिन चंदवार हल्के के पटवारी ने जो कोई न करें वह कर दिखाया है, साहब ने बिन बोये फसल वाले खेत की गिरदावरी भर डाली और मौके पर न चना के ठूंठ बचे और न ही मजदूर लगे। बताया जाता है कि खेत तो साफ है पर चना और मसूर की बड़ी खेप कृषि उपज मंडी में पहुंच गई। हालांकि इसमें खरीदी प्रभारी की कोई ग़लती नही मानी जा रही है। मंडी में अपनी फसल बेचने आये कई किसानों के मुताबिक क्वींटलों में बिका चना और मसूर चंदवार निवासी रामानुज गुप्ता और ग्राम सिघंवाड़ निवासी रवि सिंह राठौर का है जो कि किसान बनकर अपनी फसलें तो बेच डाली मगर खेत अभी भी खाली के खाली पड़े दिखाई दे रहे हैं। बताया जाता है कि यह दोनों व्यापारी हैं और छोटे किसानों से वह हर फसल खरीद लेते हैं जो कि सरकार खरीद रही है, फिर शुरू होता है पटवारी का खेला जिसने बकायदा गेंहू और धान की फसलों का उपज देने वाले खेतों को चने के खेतों में परिवर्तित कर दिया और यह दोनों व्यापारी किसान बनकर औने पौने दाम में खरीदे गये चना और मसूर सहित दलहन फसलों को सरकार को ही अधिक दामों में बेचा है।
*और भी व्यापारी हैं संदेह के घेरे में..*
कृषि उपज मंडी में इन दिनों चना, मसूर सहित तमाम तरह की दलहनी फसलों की खरीदी की जा रही है, जिसमें किसानों के साथ साथ व्यापारी भी अपनी रोटियां सेंकने में लगा हुआ है, कुछ व्यापारी तो खुलेआम अपनी दुकानों की फसलों को बेंच रहे हैं और यहां मंडी प्रभारी से लेकर खरीदी प्रभारी सब कुछ अपनी खुली आंखें से देख रहे हैं। नाम न छापने की शर्त पर बताया गया है कि जिले भर में बोई गई दलहन और तिलहन की फसलों का रकवा कुछ कह रहा है और मंडी में इनकी आवक बढ़ती ही नजर आ रही है, जिसके कारण यह आरोप लगना भी लाजमी है मगर छोटे किसानों और मार्केट से फसलों को खरीदकर मंडी में खपाया जाना हजारों सवालों को जन्म देता है। हालांकि खरीदी प्रभारी की इसमें कोई ग़लती नही मानी जा रही है, लोगों का कहना है कि जिस व्यापारी की भूमि का पटवारी ने गिरदावरी कर दी मानों वह व्यापारी से किसान बन जाता है....!

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