मध्य प्रदेश के सागर जिले में जल संकट: चीलगढ़ डूंगरिया गांव की विकट स्थिति

मध्य प्रदेश के सागर जिले की जनपद पंचायत केसली के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत पुत्तर्रा के गांव चीलगढ़ डूंगरिया में इन दिनों गंभीर जल संकट गहराता जा रहा है। भीषण गर्मी की शुरुआत के साथ ही ग्रामीणों के सामने पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। पिछले लगभग एक महीने से नल-जल योजना का विद्युत कनेक्शन काट दिए जाने के कारण जल आपूर्ति पूरी तरह ठप हो चुकी है।

क्यों गहराया संकट?

जानकारी के अनुसार, विद्युत विभाग द्वारा बकाया बिल या अन्य तकनीकी कारणों से गांव के पंप हाउस का विद्युत कनेक्शन विच्छेद कर दिया गया है। बिजली न होने के कारण जल शोधन संयंत्र और पंप काम नहीं कर पा रहे हैं। पिछले 30 दिनों से नलों में पानी की एक बूंद भी नहीं टपकी है, जिससे पूरा गांव अब निजी कुओं और दूरदराज के जल स्रोतों पर निर्भर हो गया है।

महिलाओं पर सबसे अधिक बोझ

जल संकट की सबसे अधिक मार गांव की महिलाओं और बच्चों पर पड़ रही है। घरेलू कामकाज और मवेशियों की प्यास बुझाने के लिए महिलाओं को भीषण धूप में कई किलोमीटर का पैदल सफर तय करना पड़ रहा है।

  • समय की बर्बादी: पानी लाने में घंटों बीत जाने के कारण महिलाएं अपने अन्य दैनिक घरेलू कार्य समय पर नहीं कर पा रही हैं।
  • स्वास्थ्य का खतरा: दूर से भारी बर्तन ढोने के कारण ग्रामीणों में शारीरिक थकान और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी देखी जा रही हैं।

अधिकारियों की चुप्पी और ग्रामीणों का आक्रोश

ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने इस समस्या को लेकर कई बार पंचायत सचिव, सरपंच और संबंधित विभाग के उच्च अधिकारियों को लिखित व मौखिक रूप से अवगत कराया है। इसके बावजूद, अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

"हम कई बार गुहार लगा चुके हैं, लेकिन हमारी सुनने वाला कोई नहीं है। अगर जल्द ही बिजली कनेक्शन बहाल कर पानी की सप्लाई शुरू नहीं की गई, तो हम आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।" — स्थानीय ग्रामीण

प्रमुख मांगें

  • ग्राम चीलगढ़ डूंगरिया का विद्युत कनेक्शन तत्काल बहाल किया जाए।
  • नल-जल योजना के तहत नियमित पानी की सप्लाई सुनिश्चित की जाए।
  • बकाये की राशि का समाधान कर ग्रामीणों को इस संकट से मुक्ति दिलाई जाए।

'हर घर जल' अभियान पर सवालिया निशान

एक ओर सरकार 'हर घर जल' अभियान के जरिए घर-घर पानी पहुंचाने का दावा कर रही है, वहीं चीलगढ़ डूंगरिया जैसी जमीनी हकीकत इन दावों पर सवालिया निशान खड़ा करती है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर समस्या का समाधान कब तक कर पाता है।