*एस्टीमेट में चौड़ी सड़क, जमीन पर बाड़ियों का घेरा! करोड़ों के निर्माण से पहले जगह खाली कराने की मांग७ hg

नगर परिषद मानपुर में करोड़ों रुपये की लागत से कराए जा रहे सीसी सड़क निर्माण कार्यों के बीच वार्ड क्रमांक 10, वार्ड क्रमांक 11, खुटार और बांधा टोला क्षेत्र में स्वीकृत चौड़ाई के अनुरूप निर्माण को लेकर सवाल उठने लगे हैं। इन क्षेत्रों में संविदाकार द्वारा बेस गिट्टी बिछाने का कार्य शुरू कर दिया गया है, लेकिन सड़क के दोनों ओर बनी बाड़ियां और अन्य अवरोध अब भी यथावत बने हुए हैं।

जानकारी के अनुसार, स्वीकृत एस्टीमेट में 3.75 मीटर चौड़ी सीसी सड़क तथा दोनों ओर 1-1 मीटर पटरी का प्रावधान है। यानी सड़क और पटरी सहित कुल लगभग 5.75 मीटर चौड़ाई उपलब्ध होना आवश्यक है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई स्थानों पर सड़क किनारे बनी बाड़ियों के कारण इतनी चौड़ाई उपलब्ध नहीं हो पा रही है, जिससे निर्माण की उपयोगिता और भविष्य की जरूरतों को लेकर चिंता बढ़ गई है।
क्षेत्रवासियों के अनुसार, यदि निर्माण कार्य से पहले सड़क की निर्धारित चौड़ाई सुनिश्चित नहीं की गई और उपलब्ध जगह के हिसाब से ही काम पूरा कर दिया गया, तो आने वाले समय में बढ़ते यातायात के बीच यही सड़कें संकरी साबित हो सकती हैं। इससे आवागमन, जल निकासी और सड़क के रखरखाव से जुड़ी समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं।

सूत्रों के अनुसार, निर्माण एजेंसी की ओर से सड़क किनारे मौजूद अवरोधों की जानकारी संबंधित जिम्मेदारों को दी गई थी, लेकिन अब तक बाड़ियों और अन्य बाधाओं को हटाने के लिए कोई प्रभावी कार्रवाई सामने नहीं आई है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जब सार्वजनिक धन से करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, तो स्वीकृत मानकों के अनुरूप पर्याप्त जगह उपलब्ध कराए बिना निर्माण कार्य शुरू करने की जल्दबाजी क्यों दिखाई जा रही है।

स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि नगर परिषद अमला पहले सड़क किनारे लगी बाड़ियों और अन्य अवरोधों का सीमांकन कर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करे, ताकि 3.75 मीटर चौड़ी सीसी सड़क और दोनों ओर 1-1 मीटर पटरी का निर्माण स्वीकृत एस्टीमेट के अनुरूप कराया जा सके। लोगों का कहना है कि यदि अभी आवश्यक कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में इन्हीं सड़कों के चौड़ीकरण और सुधार के लिए फिर से सार्वजनिक धन खर्च करने की नौबत आ सकती है।

नगरवासियों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से बनने वाली सड़कें केवल वर्तमान नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई जानी चाहिए, ताकि भविष्य में यातायात संबंधी परेशानियों से बचा जा सके।